Tata Group Dispute: टाटा समूह में चल रही खींचतान पर निर्मला सीतारमण ने दी सलाह, कहा- मिल बैठकर सुलझाएं विवाद

Tata Group Dispute: टाटा समूह में चल रही खींचतान पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोनों पक्षों को मिल बैठकर विवाद सुलझाने की सलाह दी। जानें टाटा संस और टाटा

टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच चल रहे विवाद पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को आपस में बात करके रास्ता निकालना चाहिए। इस दौरान उन्होंने देश में विदेशी निवेश और अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा की।

बिजनेस डेस्क: टाटा समूह में पिछले कुछ समय से चल रहे मतभेदों पर अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के लोगों को एक साथ बैठकर उन बातों पर चर्चा करनी चाहिए, जिनको लेकर विवाद बना हुआ है। टाटा समूह का देश के कारोबार में बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में समूह के भीतर चल रही खींचतान का जल्द खत्म होना जरूरी है। 

टाटा विवाद पर वित्त मंत्री ने क्या कहा?

सोमवार, 2 नवंबर को मुंबई में आयोजित फाइनेंशियल एक्सप्रेस लीडरशिप अवॉर्ड्स 2026 में निर्मला सीतारमण से टाटा समूह के अंदर चल रहे विवाद को लेकर सवाल किया गया। जवाब में उन्होंने कहा कि यह काफी संवेदनशील मामला है। इसे सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को कारोबारी समझ और आपसी तालमेल के साथ आगे बढ़ना होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि इतने बड़े कारोबारी समूह के अंदर मतभेद होना अलग बात है, लेकिन उनका सार्वजनिक रूप से सामने आना ठीक नहीं है। दोनों पक्षों को जल्द बातचीत करके समाधान निकालना चाहिए, ताकि समूह का कामकाज सामान्य तरीके से चलता रहे। सीतारमण ने इस दौरान टाटा समूह की अंतरराष्ट्रीय पहचान का भी जिक्र किया। 

उन्होंने कहा कि इस कारोबारी घराने को दुनिया में पहचान दिलाने में पारसी समुदाय की बड़ी भूमिका रही है। आज टाटा समूह कई क्षेत्रों में कारोबार कर रहा है और देश की अर्थव्यवस्था में उसका अहम योगदान है। उनके मुताबिक, समूह के नेतृत्व से उम्मीद की जाती है कि वह मामले को समझदारी से संभालेगा और विवाद को ज्यादा लंबा नहीं खिंचने देगा।

आखिर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में विवाद क्यों है?

टाटा समूह के भीतर मतभेद की मुख्य वजह टाटा संस के नेतृत्व और कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट कराने का मुद्दा है। टाटा संस समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के पास इसकी करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन हैं और टाटा ट्रस्ट्स का नेतृत्व नोएल टाटा कर रहे हैं।

टाटा समूह के अंदर चल रहे विवाद में एन. चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाने का मुद्दा भी शामिल है। इसके अलावा टाटा संस को शेयर बाजार में उतारने को लेकर भी एक राय नहीं बन पा रही है। रिजर्व बैंक के नियमों के चलते कंपनी की लिस्टिंग का मामला पहले से ही अटका हुआ है। टाटा संस ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन खत्म कराने के लिए रिजर्व बैंक में आवेदन दिया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली। अब सवाल यह है कि कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट कराया जाएगा या नहीं। इसके साथ ही टाटा समूह के बड़े फैसले कौन लेगा और उनमें किसकी कितनी चलेगी, इसे लेकर भी दोनों पक्षों में मतभेद हैं।

क्या टाटा समूह के मामले में सरकार बीच में आएगी?

Tata Group Dispute: टाटा समूह में चल रही खींचतान पर निर्मला सीतारमण ने दी सलाह, कहा- मिल बैठकर सुलझाएं विवाद

एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से टाटा समूह में चल रही खींचतान को लेकर सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या सरकार इस विवाद को खत्म कराने के लिए टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के लोगों से बात करेगी। इस सवाल पर सीतारमण ने कोई साफ जवाब नहीं दिया। उन्होंने इतना जरूर कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है और फिलहाल इस पर कुछ कहना सही नहीं होगा।

हालांकि, वित्त मंत्री ने यह जरूर बताया कि वह इस मामले को किस तरह सुलझते देखना चाहती हैं। उनके मुताबिक, टाटा समूह के लोगों को खुद ही बैठकर अपनी बात रखनी चाहिए और जहां मतभेद हैं, उन्हें दूर करना चाहिए। उन्होंने टाटा समूह की अहमियत का भी जिक्र किया। सीतारमण ने उम्मीद जताई कि समूह की जिम्मेदारी संभाल रहे लोग आपसी बातचीत से मामला सुलझा लेंगे, ताकि कारोबार पर इसका असर न पड़े।

विदेशी निवेशक क्यों निकाल रहे हैं भारतीय बाजार से पैसा?

टाटा समूह के मामले के साथ वित्त मंत्री ने विदेशी निवेशकों की ओर से शेयर बाजार से पैसा निकालने पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने माना कि पिछले कुछ समय से विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार में चिंता बढ़ाई है। इसका असर आम निवेशकों पर भी पड़ रहा है। खासकर छोटे निवेशक जानना चाहते हैं कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसा क्यों निकाल रहे हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को सात प्रतिशत से ज्यादा की रफ्तार से आगे बढ़ाने के लिए निवेश जरूरी है। इसके लिए घरेलू पूंजी के साथ विदेश से आने वाले पैसे की भी जरूरत पड़ती है। शेयर बाजार के जरिए होने वाला निवेश भी इसमें अहम भूमिका निभाता है। सीतारमण ने वित्त वर्ष 2023-24 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी कर व्यवस्था लगभग ऐसी ही थी, लेकिन विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में अच्छा पैसा लगाया था। अब दुनिया के आर्थिक हालात बदल गए हैं, जिसका असर निवेशकों के फैसलों पर पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि हाल में विदेशी निवेशकों के दोबारा भारतीय बाजार में पैसा लगाने के कुछ संकेत मिले हैं। सरकार इस पूरे मामले पर नजर रख रही है। निवेशकों की जो भी चिंताएं सामने आएंगी, उन पर विचार किया जाएगा।

जीएसटी में बदलाव के बाद कंपनियां बढ़ा सकती हैं निवेश

देश में निजी कंपनियों के निवेश को लेकर भी वित्त मंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कई कंपनियां अब कारोबार बढ़ाने के लिए पैसा लगाने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, हर कंपनी अपनी जरूरत और बाजार की स्थिति देखकर ही आगे बढ़ रही है। सीतारमण के मुताबिक, जीएसटी में किए गए सुधारों के बाद बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद बनी है। इसका फायदा कारोबार करने वाली कंपनियों को मिल सकता है। जब बाजार में सामान की बिक्री बढ़ती है, तो कंपनियां भी उत्पादन बढ़ाने के बारे में सोचती हैं।

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