वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी निवेशकों की कैपिटल गेन टैक्स से जुड़ी चिंताओं पर विचार करने का भरोसा दिया है। उन्होंने टाटा समूह के विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी और दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से मामला सुलझाने की सलाह दी।
बिजनेस न्यूज़: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए कैपिटल गेन टैक्स को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार, 2 नवंबर को कहा कि सरकार विदेशी निवेशकों और शेयर बाजार से जुड़े लोगों की टैक्स संबंधी परेशानियों को गंभीरता से सुनेगी। पिछले कुछ समय से विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स घटाने की मांग उठ रही है। हालांकि, वित्त मंत्री ने अभी टैक्स में किसी तरह की कटौती का ऐलान नहीं किया है।
कैपिटल गेन टैक्स घटाने की मांग पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?
मुंबई में फाइनेंशियल एक्सप्रेस लीडरशिप अवॉर्ड्स 2026 के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से शेयर बाजार में विदेशी निवेश को लेकर सवाल हुआ। बात कैपिटल गेन टैक्स तक पहुंची तो उन्होंने बताया कि बाहर के निवेशक इसमें राहत मांग रहे हैं। खासकर वे लोग, जो भारतीय कंपनियों के शेयर खरीदकर लंबे समय तक अपने पास रखते हैं।
ऐसे शेयर बेचने पर होने वाले मुनाफे से सरकार जो टैक्स लेती है, उसे कम करने की मांग की जा रही है। सीतारमण ने कहा कि सरकार को निवेशकों की इस मांग की जानकारी है और इस पर विचार किया जाएगा। वित्त मंत्री ने यह भी समझाया कि विदेशी निवेशक सिर्फ टैक्स देखकर किसी देश में पैसा नहीं लगाते। वे यह भी देखते हैं कि वहां कारोबार की क्या स्थिति है, कंपनियां कैसा प्रदर्शन कर रही हैं और आने वाले वर्षों में कितना फायदा हो सकता है। उन्होंने साल 2023-24 का जिक्र किया।
उस दौरान भारतीय बाजार में विदेश से काफी पैसा आया था, जबकि टैक्स घटाने को लेकर ऐसी चर्चा नहीं थी। अब अंतरराष्ट्रीय बाजार के हालात पहले जैसे नहीं रहे हैं। इसी वजह से विदेशी निवेशक अपनी परेशानियां सरकार के सामने रख रहे हैं। सीतारमण ने कहा कि उनकी इन बातों पर सरकार गौर करेगी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली क्यों बनी चिंता?
पिछले कुछ महीनों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे ऊंचे शेयर मूल्यांकन, वैश्विक ब्याज दरें और दूसरे बाजारों में निवेश के अवसर जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं। इसी बीच शेयर बाजार से जुड़े कुछ पक्षों ने सरकार से कैपिटल गेन टैक्स की समीक्षा करने की मांग की है। उनका मानना है कि टैक्स का बोझ कम होने पर भारतीय बाजार विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन सकता है।
वित्त मंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि अब परिस्थितियां पहले जैसी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को देश की आर्थिक विकास दर सात फीसदी या उससे ऊपर बनाए रखने के लिए निवेश की जरूरत है। सीतारमण ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने बॉन्ड मार्केट को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया है। अब शेयर बाजार में निवेश को बढ़ावा देने की मांग भी उठ रही है और सरकार इन सुझावों को सुन रही है।
![]()
क्या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स कम होगा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बातों के बाद शेयर बाजार में निवेश करने वालों को अब अगले बजट का इंतजार है। निवेशक जानना चाहते हैं कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में कुछ राहत देगी या नहीं। फिलहाल शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड से एक साल में होने वाले 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के लंबी अवधि के मुनाफे पर 12.5 फीसदी टैक्स लगता है। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें भी तय हैं।
निवेशक काफी समय से इस टैक्स को घटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शेयर बाजार में लंबे समय तक पैसा लगाने पर होने वाली कमाई से कम टैक्स लिया जाना चाहिए। लेकिन वित्त मंत्री ने अभी ऐसी कोई बात नहीं कही है, जिससे साफ हो कि सरकार टैक्स घटाने की तैयारी में है।
सीतारमण ने अपने बयान में किसी नई टैक्स दर का जिक्र नहीं किया। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि टैक्स के नियमों में कब और क्या बदलाव हो सकता है। इतना जरूर कहा कि निवेशकों की ओर से उठाई जा रही बातों पर सरकार विचार करेगी। इसलिए अभी टैक्स घटने की उम्मीद को पक्की खबर नहीं माना जा सकता। इस बारे में स्थिति तभी साफ होगी, जब सरकार कोई आधिकारिक घोषणा करेगी।
टाटा समूह के विवाद पर भी दिया बयान
इसी कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से टाटा समूह के भीतर चल रहे मतभेदों को लेकर भी सवाल किया गया। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति और कंपनी की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर समूह के भीतर अलग-अलग राय सामने आई हैं। इस पर सीतारमण ने कहा कि यह एक संवेदनशील कारोबारी मामला है। इसे सुलझाने के लिए संबंधित लोगों को आपस में बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने टाटा समूह की आर्थिक अहमियत का भी जिक्र किया। वित्त मंत्री ने कहा कि टाटा सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में पहचान रखने वाला बड़ा कारोबारी समूह है। उन्होंने समूह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में पारसी समुदाय के योगदान की भी सराहना की। सीतारमण ने उम्मीद जताई कि टाटा समूह का नेतृत्व आपसी समझदारी से मतभेद दूर कर लेगा।










