NCTE की शुरुआती जांच में शिक्षक शिक्षा संस्थानों की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। एक ही शिक्षक का नाम 90 से ज्यादा कॉलेजों में दर्ज मिला है। अब परिषद करीब 13 हजार संस्थानों के रिकॉर्ड, शिक्षकों, छात्रों और सुविधाओं की जांच करेगी।
नई दिल्ली: देश में शिक्षक तैयार करने वाले कॉलेजों की जांच में हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) को शुरुआती रिकॉर्ड जांच के दौरान ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें एक ही शिक्षक का नाम 50, 60 और यहां तक कि 90 से ज्यादा संस्थानों में दर्ज है। इससे कई कॉलेजों में केवल कागजों पर शिक्षक दिखाने का शक बढ़ गया है। परिषद अब इन संस्थानों के रिकॉर्ड की गहराई से जांच करने की तैयारी में है।
एक ही शिक्षक का नाम इतने कॉलेजों में कैसे पहुंचा?
शिक्षक शिक्षा संस्थानों में पढ़ाने वाले स्टाफ की जानकारी जांचने के दौरान यह मामला सामने आया है। NCTE ने शिक्षकों के PAN कार्ड के आधार पर रिकॉर्ड का मिलान शुरू किया था। इसी प्रक्रिया में पता चला कि कुछ शिक्षकों का नाम कई अलग-अलग कॉलेजों की स्टाफ सूची में मौजूद है।
सूत्रों के मुताबिक, एक शिक्षक का नाम 90 से ज्यादा संस्थानों में दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि वह वास्तव में उन सभी कॉलेजों में पढ़ा रहा है। आशंका है कि कुछ संस्थान मान्यता से जुड़े नियम पूरे दिखाने के लिए शिक्षकों का नाम अपने रिकॉर्ड में शामिल कर लेते हैं।
ऐसे शिक्षकों को डमी टीचर कहा जाता है। आरोप है कि कुछ मामलों में नाम दर्ज कराने के बदले शिक्षकों को पैसे भी दिए जाते हैं। हालांकि, इन मामलों में वास्तविक स्थिति का पता विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।
13 हजार कॉलेजों का डेटा पहुंचा NCTE के पास
NCTE ने मान्यता प्राप्त शिक्षक शिक्षा संस्थानों को अपनी सालाना परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट यानी PAR जमा करने के निर्देश दिए थे। इस रिपोर्ट में कॉलेजों को अपने शिक्षकों, छात्रों, पढ़ाई की व्यवस्था और दूसरी जरूरी सुविधाओं की जानकारी देनी होती है।
अब तक करीब 13 हजार संस्थानों का डेटा परिषद के पास पहुंच चुका है। शुरुआती रिकॉर्ड जांच में ही कई ऐसी बातें सामने आई हैं, जिनका सत्यापन जरूरी माना जा रहा है।
परिषद यह भी देखेगी कि कॉलेजों ने शिक्षकों की जो संख्या बताई है, क्या वास्तव में उतने शिक्षक वहां काम कर रहे हैं। छात्रों के दाखिले और कॉलेज में मौजूद सुविधाओं की जानकारी भी जांच के दायरे में रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जांच को मिली मजबूती
PAR जमा करने के नियम को लेकर पहले कानूनी विवाद भी हुआ था। कुछ शिक्षक शिक्षा संस्थानों ने NCTE के निर्देशों को अदालत में चुनौती दी थी।
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने परिषद की कार्यकारी समिति की ओर से जारी नोटिस को अधिकार क्षेत्र से बाहर मानते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
3 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला पलट दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि NCTE और उसकी कार्यकारी समिति को शिक्षक शिक्षा संस्थानों से सालाना अप्रेजल रिपोर्ट मांगने का अधिकार है।
इस फैसले के बाद परिषद को संस्थानों से जरूरी जानकारी लेने और उनके कामकाज की निगरानी करने का कानूनी आधार और मजबूत हुआ है।
850 संस्थानों को रिपोर्ट जमा करने का आखिरी मौका
NCTE ने करीब 850 संस्थानों को अपनी अप्रेजल रिपोर्ट जमा करने का एक और मौका दिया है। ये ऐसे संस्थान हैं, जिनकी रिपोर्ट जमा करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी।
परिषद ने विस्तृत जांच के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP भी तैयार की है। इसके तहत संस्थानों से मिली जानकारी का मिलान किया जाएगा।
जांच में कॉलेज की इमारत, क्लासरूम, शिक्षकों की संख्या और छात्रों के रिकॉर्ड को देखा जाएगा। संस्थानों की ओर से भेजी गई तस्वीरों और उनके वास्तविक पते की भी पुष्टि की जाएगी।
इसके लिए जियो-टैगिंग और लोकेशन से जुड़ी जानकारी इस्तेमाल की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि जिस जगह कॉलेज चलने का दावा किया जा रहा है, वहां वास्तव में शिक्षण संस्थान मौजूद है या नहीं।
कागजों पर चलने वाले कॉलेज भी जांच के दायरे में
NCTE को पहले भी ऐसे संस्थानों की शिकायतें मिली हैं, जहां छात्रों के दाखिले तो दर्ज हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी बताई गई है।
कुछ कॉलेजों को लेकर यह भी शिकायत है कि वहां नियमित कक्षाएं नहीं चलतीं और संस्थान का कामकाज मुख्य रूप से दस्तावेजों तक सीमित है।
परिषद अब ऐसी शिकायतों की भी जांच करेगी। जिन कॉलेजों में कमियां मिलेंगी, उन्हें नियमों के अनुसार सुधार करने के लिए कहा जा सकता है।
वहीं, जो संस्थान बार-बार निर्देश मिलने के बाद भी जरूरी रिपोर्ट जमा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ मान्यता वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि, किसी कॉलेज की मान्यता पर अंतिम फैसला निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा।







