UPSC Success Story: चार बार असफल हुए विकास कुंडू, पहले IPS बने फिर 27वीं रैंक लाकर पूरा किया IAS का सपना

जींद के विकास कुंडू ने चार बार असफल होने के बाद UPSC में 288वीं रैंक से IPS और फिर 27वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया।

हरियाणा के जींद जिले के विकास कुंडू को UPSC की तैयारी में चार बार असफलता मिली। लोगों ने नौकरी करने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी। पांचवें प्रयास में IPS बने और छठे प्रयास में 27वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया।

IAS Vikas Kundu Success Story: हरियाणा के जींद जिले के रहने वाले विकास कुंडू ने जब UPSC की तैयारी शुरू की, तब शायद ही सोचा होगा कि मंजिल तक पहुंचने में इतने साल लग जाएंगे। कभी प्रीलिम्स में नंबर कम आए तो कभी इंटरव्यू तक पहुंचकर भी फाइनल लिस्ट में जगह नहीं मिली। आसपास के लोगों ने भी तैयारी छोड़ने की सलाह दी। लेकिन विकास ने हार नहीं मानी। आखिरकार उन्होंने पहले IPS में जगह बनाई और फिर IAS बनने में सफलता हासिल की।

जींद के छोटे से गांव से शुरू हुआ विकास कुंडू का सफर

विकास कुंडू हरियाणा के जींद जिले के गिल्लू खेड़ा गांव के रहने वाले हैं। उनके परिवार का संबंध खेती-किसानी से है। पिता करण सिंह और माता निर्मला देवी ने हमेशा उनकी पढ़ाई में साथ दिया। विकास ने शुरुआती पढ़ाई गांव के आसपास की और आगे की पढ़ाई के लिए जींद गए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में उच्च शिक्षा हासिल की।

कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही विकास के मन में सिविल सेवा में जाने का विचार आया। उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। शुरुआत में उन्हें लगा कि मेहनत करने से परीक्षा निकल जाएगी, लेकिन जैसे-जैसे प्रयास बढ़ते गए, उन्हें इस परीक्षा की मुश्किलों का अंदाजा होने लगा।

पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दोबारा परीक्षा दी, लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। कभी प्रीलिम्स में चूक हुई तो कभी मुख्य परीक्षा में नंबर कम आए। दो बार इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी उनका नाम अंतिम चयन सूची में नहीं आया।

बार-बार असफल होने से विकास काफी परेशान रहने लगे थे। कई बार उनका किसी से बातचीत करने का भी मन नहीं करता था। फिर भी उन्होंने तैयारी पूरी तरह बंद नहीं की।

लोगों ने तैयारी छोड़ने को कहा, लेकिन विकास अपने फैसले पर डटे रहे

लगातार असफलता मिलने के बाद विकास को आसपास के लोगों की बातें भी सुननी पड़ीं। कुछ लोग कहते थे कि इतने प्रयासों के बाद भी परीक्षा नहीं निकल रही है तो अब कोई दूसरी नौकरी देख लेनी चाहिए। उन्हें ग्रुप सी या ग्रुप डी की नौकरी करने की सलाह भी दी गई।

ऐसी बातें सुनकर विकास को बुरा लगता था। खासकर उस समय, जब वह खुद अपनी तैयारी और भविष्य को लेकर परेशान थे। हालांकि, उन्होंने दूसरों की बातों के आधार पर अपना फैसला नहीं बदला।

विकास ने अपने पिछले प्रयासों को देखा और समझने की कोशिश की कि आखिर कमी कहां रह रही है। उन्होंने पाया कि सिर्फ घंटों पढ़ना काफी नहीं है। परीक्षा में सवालों को समझना, समय पर पेपर पूरा करना और सही तरीके से जवाब लिखना भी उतना ही जरूरी है।

इसके बाद उन्होंने पढ़ाई के तरीके में बदलाव किया। जिन विषयों में नंबर कम आ रहे थे, उन पर ज्यादा ध्यान दिया। नियमित रिवीजन किया और मॉक टेस्ट के जरिए अपनी तैयारी जांचते रहे। मुख्य परीक्षा के लिए आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस भी बढ़ाई।

इस दौरान मानसिक दबाव भी कम नहीं था। कई साल से एक ही परीक्षा की तैयारी करने के कारण भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी कमियों पर काम करना जारी रखा।

पांचवें प्रयास में IPS और छठे प्रयास में मिली 27वीं रैंक

विकास कुंडू की मेहनत आखिरकार पांचवें प्रयास में रंग लाई। UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 288 हासिल की। इस रैंक के आधार पर उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS में हुआ। अप्रैल 2025 में परीक्षा का परिणाम आने के बाद उनके परिवार और गांव में खुशी का माहौल था।

इतने साल की मेहनत के बाद IPS बनना उनके लिए बड़ी उपलब्धि थी। परिवार के लोग भी चाहते थे कि वह अब अपनी नौकरी पर ध्यान दें। लेकिन विकास शुरू से IAS अधिकारी बनना चाहते थे। इसलिए उन्होंने एक बार और परीक्षा देने का फैसला किया।

उस समय वह IPS की ट्रेनिंग भी कर रहे थे। ऐसे में नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था। उन्होंने अपने बचे हुए समय का इस्तेमाल तैयारी के लिए किया और पिछले अनुभवों के आधार पर रणनीति बनाई।

दिलचस्प बात यह रही कि विकास ने इस बार परीक्षा देने की जानकारी परिवार को भी नहीं दी थी। वह चाहते थे कि पहले परिणाम आ जाए, उसके बाद घरवालों को बताएं।

आखिरकार UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 27 हासिल कर ली। छठे प्रयास में मिली इस सफलता ने उनका IAS बनने का सपना पूरा कर दिया।

जब परिवार को उनकी रैंक के बारे में पता चला तो सभी हैरान रह गए। जिस बेटे ने पहले चार प्रयासों में लगातार निराशा देखी थी, उसी ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली UPSC में टॉप 30 में अपनी जगह बना ली।

विकास कुंडू की कहानी UPSC की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक अहम सीख है। परीक्षा में असफल होने के बाद अपनी गलतियों को समझना और पढ़ाई का तरीका सुधारना जरूरी है। विकास ने भी हर प्रयास के बाद यही किया। उनकी सफलता दिखाती है कि सही रणनीति, लगातार मेहनत और धैर्य से मुश्किल लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

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