बिहार की प्रीति कुमारी ने शादी, नौकरी और छोटी बेटी की जिम्मेदारी संभालते हुए BPSC 70वीं परीक्षा में 166वीं रैंक हासिल की। पहली कोशिश में असफल होने के बाद उन्होंने पढ़ाई का तरीका बदला और दूसरी बार में SDM बनने का सपना पूरा किया।
BPSC Success Story: बिहार की प्रीति कुमारी की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो परिवार और नौकरी के बीच अपने करियर के सपने पूरे करना चाहती हैं। प्रीति ने शिक्षक की नौकरी करते हुए अफसर बनने की तैयारी की। शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़ीं और बेटी के जन्म के बाद पढ़ाई के लिए समय निकालना मुश्किल हुआ। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी और BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल की।
नवोदय विद्यालय से JNU तक की पढ़ाई, फिर बनीं सरकारी टीचर
प्रीति कुमारी के घर में शुरू से पढ़ाई को काफी महत्व दिया जाता था। उनके पिता नंद किशोर प्रसाद नवोदय विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि मां अनीता कुमारी गृहिणी हैं। प्रीति का मायका बिहार के नवादा जिले में है। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई दरभंगा के जवाहर नवोदय विद्यालय से पूरी की।
![]()
12वीं के बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए भुवनेश्वर चली गईं। वहां रीजनल कॉलेज से बीएससी और बीएड की डिग्री ली। इसके बाद दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से लाइफ साइंसेज में एमएससी किया।
पढ़ाई पूरी होने के बाद प्रीति ने शिक्षक के तौर पर अपना करियर शुरू किया। उन्हें नवोदय विद्यालय में नौकरी मिली। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में भी पढ़ाया। करीब तीन साल तक वह शिक्षण कार्य से जुड़ी रहीं।
सरकारी नौकरी मिलने के बावजूद प्रीति आगे बढ़ना चाहती थीं। उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना था। इसी वजह से उन्होंने नौकरी के साथ बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
2023 में हुई शादी, नौकरी और घर के बीच जारी रखी पढ़ाई
साल 2023 में प्रीति की शादी मुजफ्फरपुर के रहने वाले सरोज कुमार से हुई। शादी के बाद घर और नौकरी की जिम्मेदारियां एक साथ संभालनी पड़ीं। सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक स्कूल में काम करने के बाद उन्हें परिवार के लिए भी समय निकालना होता था।
ऐसे में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए लगातार कई घंटे बैठ पाना आसान नहीं था। लेकिन प्रीति ने पढ़ाई बंद नहीं की। दिनभर के काम से जब भी थोड़ा समय बचता, वह किताबें लेकर बैठ जाती थीं।
उन्होंने पहले प्रयास में BPSC की प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिली। इस नतीजे के बाद उन्होंने अपनी तैयारी पर दोबारा ध्यान दिया और उन विषयों पर काम किया, जिनमें सुधार की जरूरत थी।
इसी दौरान उनके जीवन में एक और बड़ी जिम्मेदारी जुड़ गई। बेटी के जन्म के बाद उन्हें उसकी देखभाल के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखनी थी। बच्चे की जरूरतों और घर के कामों के बीच उन्होंने उपलब्ध समय का इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
प्रीति के मुताबिक, इस दौरान पति और परिवार का सहयोग काफी काम आया। घरवालों ने उन्हें तैयारी जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। इससे वह अपनी जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई पर भी ध्यान दे सकीं।
6 महीने की बेटी को लेकर पहुंचीं इंटरव्यू, दूसरी कोशिश में बनीं SDM
प्रीति के सफर का सबसे खास पल BPSC का इंटरव्यू था। उस समय उनकी बेटी सिर्फ छह महीने की थी। वह अपनी छोटी बच्ची को साथ लेकर साक्षात्कार देने पहुंची थीं।
इससे पहले वह प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के चरण पार कर चुकी थीं। अब अंतिम चयन के लिए इंटरव्यू देना था। प्रीति ने इस मौके को भी पूरी तैयारी के साथ लिया।
जून 2026 में घोषित BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम में उन्होंने 166वीं रैंक हासिल की और SDM पद के लिए चयनित हुईं। दूसरी कोशिश में मिली इस सफलता ने उनके कई वर्षों के प्रयास को मुकाम तक पहुंचाया।
अपनी सफलता के बाद प्रीति ने तैयारी के दौरान समय के सही इस्तेमाल को अहम बताया। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए रोज बहुत लंबे समय तक पढ़ना ही जरूरी नहीं है। नियमित पढ़ाई, अपनी कमजोरियों को पहचानना और कम समय में भी पूरे ध्यान से तैयारी करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय परिवार के सहयोग को भी दिया। खासकर शादी और बेटी के जन्म के बाद मिली मदद से उनके लिए नौकरी और परीक्षा की तैयारी के बीच संतुलन बनाना आसान हुआ।
प्रीति कुमारी की कहानी से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवार सीख ले सकते हैं कि पहली असफलता के बाद अपनी रणनीति में सुधार करना कितना जरूरी है। नौकरी करने वाले और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाले अभ्यर्थी भी अपनी परिस्थितियों के अनुसार पढ़ाई का समय तय कर सकते हैं।
BPSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी जानकारी के लिए संबंधित आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट देखते रहें।











