राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने IAS शिखर अग्रवाल को एपीओ करने के मामले में भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जवाब मांगा और पूरे मामले की ED-CBI से जांच कराने की मांग की है।
जयपुर: राजस्थान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को एपीओ किए जाने के बाद सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक अधिकारी को पद से हटाने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे सरकारी फैसलों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े कई सवाल हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। डोटासरा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग से जांच कराने की मांग की है।
मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए क्या बोले डोटासरा?
डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पहले मगरमच्छ ढूंढ रहे थे, अब उन्हें मगरमच्छ मिलने शुरू हो गए होंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक होने लगी है। पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुधांश पंत को हटाया गया, फिर शिखर अग्रवाल को एपीओ किया गया। इसके बाद पुलिस महानिदेशक पद को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गईं।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के मुताबिक, सरकार में अधिकारी और नेता एक-दूसरे को कमजोर करने में लगे हैं। आने वाले दिनों में इससे जुड़े और मामले सामने आ सकते हैं।
दौलतपुरा में रिजॉर्ट की नीलामी पर उठाए सवाल
डोटासरा ने दौलतपुरा में पहाड़ी क्षेत्र से जुड़े एक रिजॉर्ट प्रोजेक्ट का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि नीलामी की अंतिम समय-सीमा से महज दो घंटे पहले प्रक्रिया को किसके निर्देश पर रोका गया था।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि नीलामी रोकने का फैसला क्यों लिया गया और इससे किसे फायदा मिलने की संभावना थी।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि इस मामले में सरकारी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की किसी स्वतंत्र जांच से पुष्टि होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
ED और CBI से जांच कराने की चुनौती
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि यदि केंद्रीय जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार रोकने के लिए काम करती हैं, तो उन्हें इस मामले की भी जांच करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ED, CBI और आयकर विभाग की कार्रवाई केवल विपक्षी नेताओं तक सीमित रहेगी या सत्ता पक्ष से जुड़े मामलों में भी जांच होगी।
डोटासरा ने मुख्यमंत्री कार्यालय में शिखर अग्रवाल की पुरानी भूमिका का जिक्र किया। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारी के स्तर पर लिए गए फैसलों की जिम्मेदारी से सरकार अलग नहीं हो सकती। उन्होंने दावा किया कि संबंधित कंपनी को जो राहत मिली, वह मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी के फैसलों से जुड़ी थी। ऐसे में सरकार को सभी दस्तावेज और निर्णय सार्वजनिक करने चाहिए।
शिखर अग्रवाल को एपीओ क्यों किया गया?
राजस्थान सरकार ने 28 अक्टूबर की रात 1993 बैच के आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को एपीओ करने का आदेश जारी किया था। उस समय वह उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।
मीडिया रिपोर्टों में उनके परिवार से जुड़े 40 विला और कॉटेज की खरीद और उन्हें उसी कंपनी को लीज पर देने के लेनदेन पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, कार्मिक विभाग ने अपने आदेश में एपीओ करने का कारण प्रशासनिक बताया है। आदेश में किसी भ्रष्टाचार के आरोप को प्रमाणित नहीं किया गया है।
सुधांश पंत का नाम लेकर भी साधा निशाना
डोटासरा ने पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारी को हटाना सामान्य घटना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मतभेद का असर सरकार के कामकाज पर पड़ सकता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार के भीतर चल रही यह लड़ाई सिर्फ अफसरों की आपसी खींचतान नहीं है। उनके अनुसार, इससे सरकारी फैसलों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जानकारी भी बाहर आ सकती है।
डोटासरा का दावा- आगे नेताओं के नाम भी आएंगे
डोटासरा ने कहा कि अभी अधिकारियों से जुड़े मामले चर्चा में हैं, लेकिन आने वाले समय में राजनीतिक नेताओं से जुड़े मुद्दे भी सामने आ सकते हैं। उन्होंने भाजपा नेताओं पर एक-दूसरे के खिलाफ जानकारी सार्वजनिक करने का आरोप लगाया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का कहना था कि सरकार के भीतर का विवाद आगे और बढ़ सकता है।
फिलहाल ये सभी आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। शिखर अग्रवाल को एपीओ करने का प्रशासनिक आदेश जारी हो चुका है, लेकिन कथित भ्रष्टाचार और सरकारी फैसलों में अनियमितता के सवालों पर आधिकारिक जांच के नतीजे सामने नहीं आए हैं।









