एक मंच पर दिखे फडणवीस, उद्धव और राज ठाकरे, सीएम बोले- राजनीतिक मतभेद के बावजूद साथ बैठना हमारी परंपरा

महाराष्ट्र: मुंबई में देवेंद्र फडणवीस, उद्धव और राज ठाकरे एक मंच पर नजर आए। फडणवीस ने 2019 की बात याद दिलाई और इसे महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा बताया।

मुंबई में एक किताब के विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे साथ नजर आए। फडणवीस ने इसे महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा बताया। तीनों नेताओं ने पुराने रिश्तों, राजनीति और कार्टून कला पर खुलकर बातचीत की।

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े रहने वाले तीन बड़े नेता गुरुवार, 29 अक्टूबर को एक ही मंच पर नजर आए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे मुंबई में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए। तीनों नेताओं को साथ देखकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, फडणवीस ने साफ कहा कि इसमें हैरान होने जैसी कोई बात नहीं है। महाराष्ट्र में राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सभी दलों के नेता एक साथ आते रहे हैं।

फडणवीस बोले- साथ बैठकर चाय पीने में क्या परेशानी

मुंबई के दादर स्थित सावरकर स्मारक सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस हल्के-फुल्के अंदाज में नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कुछ लोग तीनों नेताओं को एक मंच पर देखकर इतने हैरान क्यों हैं।

फडणवीस के मुताबिक, महाराष्ट्र की राजनीति में अलग-अलग विचार रखने वाले नेताओं का एक-दूसरे से मिलना कोई नई बात नहीं है। राजनीतिक विरोधी किसी कार्यक्रम में साथ बैठ सकते हैं, हंसी-मजाक कर सकते हैं और चाय भी पी सकते हैं। इसके लिए उनके राजनीतिक विचारों का एक जैसा होना जरूरी नहीं है।

उद्धव ठाकरे को लेकर याद दिलाई 2019 की बात

कार्यक्रम में फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के साथ अपने पुराने संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि 2019 तक उद्धव ठाकरे जब भी उन्हें बुलाते थे, वह जरूर जाते थे। लेकिन उसके बाद उद्धव ने उन्हें फोन ही नहीं किया। वह उनके बुलावे का इंतजार करते रहे।

इस टिप्पणी के बाद दोनों नेताओं के पुराने राजनीतिक रिश्तों की चर्चा फिर शुरू हो गई। दरअसल, 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और तत्कालीन अविभाजित शिवसेना के बीच विवाद हुआ था।

दोनों दल लंबे समय तक सहयोगी रहे थे, लेकिन सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद गठबंधन टूट गया और दोनों पार्टियां राजनीतिक विरोधी बन गईं।

एक मंच पर दिखे फडणवीस, उद्धव और राज ठाकरे, सीएम बोले- राजनीतिक मतभेद के बावजूद साथ बैठना हमारी परंपरा

राज ठाकरे बोले- हर मंच पर राजनीति करना जरूरी नहीं

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी तीनों नेताओं की मौजूदगी पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ कार्यक्रम ऐसे होते हैं, जहां राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर शामिल होना चाहिए।

उनके मुताबिक, कला, साहित्य और संस्कृति से जुड़े आयोजनों का अपना महत्व है। ऐसे मौकों पर अलग-अलग दलों के नेताओं का एक साथ आना महाराष्ट्र की पुरानी परंपरा रही है।

कार्यक्रम में राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार भी मौजूद थे। उन्होंने फडणवीस के कार्यक्रम में आने की सराहना की। इस पर राज ठाकरे ने मजाक में कहा कि अगर फडणवीस 2029 तक मुख्यमंत्री बने रहें, तो उन्हें आगे भी ऐसे आयोजनों में बुलाया जा सकता है।

राज ठाकरे से बोले थे- मेरा कार्टून बनाओ तो नाक बड़ी रखना

कार्यक्रम में राजनीति के साथ कार्टून कला पर भी दिलचस्प बातचीत हुई। फडणवीस ने एक पुराना किस्सा सुनाते हुए बताया कि उन्होंने कभी राज ठाकरे से कहा था कि अगर वह उनका कार्टून बनाएं, तो उनकी नाक थोड़ी बड़ी बनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्टून केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं। इनके जरिए समाज और राजनीति की कई गंभीर बातों को कम शब्दों में समझाया जा सकता है।

उन्होंने मराठी कार्टूनिस्टों के लिए अलग आर्ट गैलरी बनाने का भी आश्वासन दिया, ताकि उनकी रचनाओं को सुरक्षित रखा जा सके और नई पीढ़ी उनसे परिचित हो सके।

उद्धव ठाकरे ने कार्टून को बताया कलाकार का मजबूत हथियार

पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसी कार्टूनिस्ट के लिए उसका ब्रश सबसे बड़ा हथियार होता है। एक अच्छे कार्टून में बिना ज्यादा शब्दों के बड़ी बात कहने की ताकत होती है।

उन्होंने शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की कार्टून कला को भी याद किया। उद्धव ने बताया कि बाल ठाकरे के निर्माणाधीन स्मारक में उनके बनाए कार्टून रखे जाएंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके रचनात्मक काम को देख सकेंगी।

किताब में समेटा गया 100 साल का इतिहास

कार्यक्रम में 'महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा' पुस्तक का विमोचन किया गया। वरिष्ठ कार्टूनिस्ट प्रशांत कुलकर्णी द्वारा संपादित और ग्रंथाली संस्था से जुड़ी इस किताब में मराठी कार्टून कला के करीब 100 वर्षों के इतिहास को संजोया गया है।

इसमें 75 कार्टूनिस्टों के काम और उनके योगदान को जगह दी गई है। फडणवीस ने पुस्तक तैयार करने वाली टीम की सराहना की, जबकि उद्धव ठाकरे ने इसे एक अनमोल ऐतिहासिक संग्रह बताया।

हालांकि, तीनों नेताओं की मुलाकात का कार्यक्रम सांस्कृतिक था, लेकिन राजनीतिक विरोधियों का एक मंच पर आना चर्चा का विषय बना रहा। फिलहाल इसे किसी नए राजनीतिक गठबंधन का संकेत मानने का ठोस आधार सामने नहीं आया है।

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