दिवाली से पहले सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 25 प्रतिशत नीचे आ गई हैं। बैंक ऑफ अमेरिका ने आगे भी गिरावट का जोखिम जताया है। जानिए सोना कितना सस्ता हो सकता है और कीमतों पर किन बातों का असर पड़ेगा।
बिजनेस न्यूज़: धनतेरस और दिवाली से पहले सोना खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार से बड़ी खबर आई है। जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा सोना अब काफी नीचे कारोबार कर रहा है। गुरुवार, 29 अक्टूबर को भी घरेलू वायदा बाजार में कीमतों पर दबाव रहा। इस बीच बैंक ऑफ अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट में सोने की कीमतों को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। बैंक का अनुमान है कि अमेरिकी ब्याज दरें ऊंची रहने और डॉलर की मजबूती के कारण सोने में आगे भी गिरावट आ सकती है।
रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 50 हजार रुपये सस्ता हुआ सोना
इस साल सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 29 जनवरी 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोना 1,92,991 रुपये प्रति 10 ग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में गिरावट शुरू हुई और अक्टूबर में सोना काफी सस्ता हो गया। 29 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:11 बजे MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,43,382 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
इस हिसाब से जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से सोना करीब 49,609 रुपये यानी 25.7 प्रतिशत नीचे आ चुका है। हालांकि, वायदा बाजार में कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। इसलिए खरीदारी के समय भाव अलग हो सकते हैं।
बैंक ऑफ अमेरिका ने सोने को लेकर क्या कहा?
बैंक ऑफ अमेरिका ने अक्टूबर में जारी अपनी गोल्ड आउटलुक रिपोर्ट में कहा कि सोने पर अभी दबाव बना रह सकता है। बैंक के कमोडिटी विश्लेषकों के मुताबिक, ऊंची ब्याज दरों, मजबूत डॉलर और कमजोर फिजिकल डिमांड के कारण फिलहाल सोने की कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना सीमित है। बैंक ने चौथी तिमाही के दौरान सोने के लगभग 3,750 डॉलर प्रति औंस तक गिरने की आशंका जताई है।
वहीं, कुछ बाजार रिपोर्ट में 3,700 डॉलर प्रति औंस के स्तर का भी जिक्र किया गया है। भारतीय मुद्रा में इसे करीब 1.12 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम बताया जा रहा है। हालांकि, यह निश्चित भाव या बैंक की ओर से भारतीय बाजार के लिए घोषित कोई पक्का मूल्य लक्ष्य नहीं है। रुपये की विनिमय दर, आयात शुल्क और स्थानीय टैक्स के अनुसार भारत में वास्तविक कीमत अलग हो सकती है।
![]()
अमेरिकी फेड के फैसले से सोने के दाम पर क्या असर होगा?
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसलों का असर सोने की कीमतों पर भी पड़ता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरें 3.75 से 4 प्रतिशत के बीच ही रखने का फैसला किया है। फेड के चेयरमैन केविन वॉर्श का कहना है कि अमेरिका में महंगाई अभी भी चिंता बढ़ा रही है। ऐसे में आगे ब्याज दरें बढ़ेंगी या घटेंगी, इसका फैसला नए आर्थिक आंकड़ों को देखकर किया जाएगा।
बाजार में चर्चा है कि दिसंबर की बैठक में फेड ब्याज दरें बढ़ा सकता है। ऐसा हुआ तो सोने के दाम नीचे आ सकते हैं। दरअसल, सोना खरीदकर रखने पर कोई ब्याज नहीं मिलता। दूसरी तरफ अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा ब्याज मिलने लगे, तो कुछ निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगाना पसंद कर सकते हैं। इससे सोने की मांग घट सकती है।
डॉलर और कच्चे तेल के दाम भी डालेंगे असर
सोने की कीमतों पर डॉलर की चाल का भी असर पड़ता है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों को सोना महंगा पड़ सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी खरीदारी कम होने की संभावना रहती है। वहीं, मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और महंगे कच्चे तेल ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। तेल महंगा होने से अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती है। अगर ऐसा होता है, तो फेड ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है।
इससे अमेरिकी बॉन्ड में निवेश बढ़ने और सोने पर दबाव पड़ने की आशंका रहेगी। हालांकि, जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, तो कई निवेशक अपने पैसे की सुरक्षा के लिए सोना भी खरीदते हैं। इसलिए ऐसे हालात में सोने के दाम हमेशा गिरेंगे, यह जरूरी नहीं है।








