भारत सरकार ने 2030 तक कपड़ा और गारमेंट एक्सपोर्ट को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए नोएडा में खास ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कारोबारियों को विदेशों में अपना सामान बेचने और नए ग्राहक तलाशने के तरीके बताए गए।
Business News: भारत में कपड़े और रेडीमेड गारमेंट का बड़ा कारोबार है। यहां तैयार होने वाले कपड़ों की विदेशों में भी मांग है। हालांकि, कई छोटे कारोबारी चाहकर भी अपना सामान दूसरे देशों में नहीं बेच पाते। किसी को एक्सपोर्ट के नियम नहीं पता होते तो किसी को विदेशी ग्राहक ढूंढने में परेशानी होती है।
ऐसी ही दिक्कतों को दूर करने के लिए केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने नोएडा में TEXPORT ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें कारोबारियों को एक्सपोर्ट शुरू करने और अपना व्यापार बढ़ाने की जानकारी दी गई।
छोटे कारोबारियों को विदेश में सामान बेचने का मिलेगा मौका
देश में कई ऐसी कंपनियां हैं, जो अच्छी क्वालिटी के कपड़े बनाती हैं, लेकिन उनका कारोबार केवल भारतीय बाजार तक सीमित है। इसकी एक बड़ी वजह एक्सपोर्ट से जुड़ी सही जानकारी का न होना है। इसी समस्या को देखते हुए कपड़ा मंत्रालय ने TEXPORT कार्यक्रम शुरू किया है। इसका मकसद उन कारोबारियों की मदद करना है, जो पहली बार विदेशों में अपना सामान बेचना चाहते हैं। साथ ही पहले से एक्सपोर्ट कर रही कंपनियों को भी कारोबार बढ़ाने के तरीके बताए जा रहे हैं।
नोएडा में यह कार्यक्रम अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के सहयोग से आयोजित किया गया। इससे पहले गुजरात के सूरत में MATEXIL की मदद से पहला कार्यक्रम हुआ था।
2030 तक 100 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट का लक्ष्य
कार्यक्रम की अध्यक्षता कपड़ा मंत्रालय की संयुक्त सचिव अलकनंदा दयाल ने की। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक भारत के कपड़ा और गारमेंट एक्सपोर्ट को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए नए कारोबारियों को भी एक्सपोर्ट से जोड़ना जरूरी है। देश में कई ऐसे इलाके हैं, जहां बड़े स्तर पर कपड़े तैयार होते हैं, लेकिन वहां से विदेशों में ज्यादा सामान नहीं भेजा जाता।
सरकार ऐसे इलाकों के कारोबारियों को आगे लाना चाहती है। अलकनंदा दयाल ने नोएडा को गारमेंट एक्सपोर्ट का अहम केंद्र बताया। उन्होंने यहां के कारोबारियों के लिए विदेशी बाजारों में मौजूद अवसरों पर भी बात की।
देश के 100 जिलों से होता है 88 फीसदी एक्सपोर्ट
कार्यक्रम में AEPC के सेक्रेटरी जनरल मिथिलेश्वर ठाकुर ने बताया कि भारत के कुल निर्यात का करीब 88 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ 100 जिलों से आता है। उनके मुताबिक, दूसरे जिलों में भी एक्सपोर्ट बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। इसके लिए कारोबारियों को जरूरी सुविधाएं और सही जानकारी उपलब्ध करानी होगी। सरकार की योजना 100 चैंपियन जिलों को बड़े एक्सपोर्ट सेंटर के रूप में विकसित करने की है।
इसके अलावा 100 आकांक्षी जिलों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की तैयारी है। इससे छोटे शहरों और नए औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कारोबारियों को भी विदेशी बाजारों तक पहुंचने का मौका मिल सकता है।
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विदेश में कपड़े बेचने के लिए किन बातों का रखना होगा ध्यान?
कपड़ा मंत्रालय के व्यापार सलाहकार ए. बिपिन मेनन ने कारोबारियों को विदेशी बाजारों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दूसरे देशों में सामान बेचने से पहले वहां की मांग और व्यापार से जुड़े नियम समझना जरूरी है। कार्यक्रम में मुक्त व्यापार समझौतों यानी FTA के फायदे भी बताए गए। इसके अलावा विदेशी खरीदारों से संपर्क बनाने, जरूरी दस्तावेज तैयार करने और सामान की क्वालिटी बनाए रखने पर चर्चा हुई।
कारोबारियों को समझाया गया कि केवल अच्छे कपड़े बनाना ही काफी नहीं है। जिस देश में सामान भेजना है, वहां के नियम और ग्राहकों की जरूरतें भी समझनी होंगी।
नए और पुराने कारोबारियों को अलग-अलग ट्रेनिंग
नोएडा में हुए इस कार्यक्रम में कारोबारियों के लिए तीन अलग-अलग सत्र रखे गए। पहले सत्र में उन लोगों को जानकारी दी गई, जो नियमित रूप से विदेशों में सामान भेजते हैं। दूसरे सत्र में ऐसे कारोबारी शामिल हुए, जो कभी-कभी एक्सपोर्ट करते हैं। उनसे व्यापार में आने वाली परेशानियों के बारे में पूछा गया। तीसरा सत्र उन लोगों के लिए था, जो पहली बार विदेशों में अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं।
इन सत्रों में एक्सपोर्ट के नियम, बैंक से जुड़ी सुविधाएं, माल भेजने की व्यवस्था, पैसों के इंतजाम और प्रोडक्ट तैयार करने जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। कारोबारियों ने अधिकारियों और एक्सपर्ट्स से अपने सवाल भी पूछे।
दूसरे शहरों में भी होंगे ऐसे कार्यक्रम
कपड़ा मंत्रालय अब देश के दूसरे प्रमुख कपड़ा और गारमेंट उत्पादन केंद्रों में भी TEXPORT कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है। सरकार की कोशिश है कि छोटे और बड़े, दोनों तरह के कारोबारी एक्सपोर्ट में आगे आएं। इससे भारतीय कपड़ों को नए विदेशी बाजार मिल सकेंगे। जो कारोबारी विदेशों में कपड़े बेचने की तैयारी कर रहे हैं, वे कपड़ा मंत्रालय और AEPC की आधिकारिक वेबसाइट पर एक्सपोर्ट से जुड़ी योजनाओं और आने वाले ट्रेनिंग कार्यक्रमों की जानकारी देख सकते हैं।








