मारुति सुजुकी इंडिया ने ओसामु सुजुकी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (OSCOE) फाउंडेशन बनाने को मंजूरी दी है। यह कंपनी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल बढ़ाने पर काम करेगी। फाउंडेशन गैर-लाभकारी होगा और इसमें मारुति की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी।
बिजनेस न्यूज़: देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की है। कंपनी के बोर्ड ने 'ओसामु सुजुकी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (OSCOE) फाउंडेशन' के गठन को मंजूरी दी है। यह मारुति की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी होगी, जिसका मकसद भारतीय उद्योगों में जापानी उत्पादन तकनीकों और काम करने के तरीकों को बढ़ावा देना है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में फाउंडेशन की पूंजी और प्रस्तावित कार्यों का ब्योरा दिया है।
मारुति सुजुकी की नई कंपनी क्या काम करेगी?
मारुति सुजुकी की नई सहायक कंपनी का मुख्य काम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम करने वाले लोगों की तकनीकी और व्यावसायिक क्षमताओं को बेहतर बनाना होगा। कंपनी का लक्ष्य ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना है, जिनसे उद्योगों को कुशल कर्मचारियों और बेहतर उत्पादन प्रक्रियाओं का फायदा मिल सके।
इसके लिए जापान में अपनाई जाने वाली उत्पादन तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण और कार्यस्थल पर बेहतर प्रबंधन से जुड़ी पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा।मारुति सुजुकी की योजना केवल ऑटोमोबाइल क्षेत्र तक सीमित नहीं है। फाउंडेशन दूसरे मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों को भी प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगा।
नई सहायक कंपनी में मारुति की कितनी हिस्सेदारी होगी?
शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित फाउंडेशन में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड की पूरी यानी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। नई इकाई का नाम 'ओसामु सुजुकी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फाउंडेशन' रखने का प्रस्ताव है। हालांकि, अंतिम नाम रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की मंजूरी के अनुसार तय होगा।इसकी शुरुआती पेड-अप शेयर कैपिटल एक लाख रुपये रखी गई है।
यह रकम 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 10,000 इक्विटी शेयरों में बंटी होगी। मारुति सुजुकी इन सभी शेयरों को नकद भुगतान के जरिए खरीदेगी। इस तरह नई कंपनी पूरी तरह मारुति के स्वामित्व में रहेगी।
मुनाफा कमाना नहीं होगा फाउंडेशन का उद्देश्य
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OSCOE फाउंडेशन को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत रजिस्टर किया जाएगा। इस प्रावधान के अंतर्गत सामाजिक, शैक्षणिक और अन्य निर्धारित उद्देश्यों के लिए गैर-लाभकारी कंपनियां बनाई जा सकती हैं। इसका मतलब है कि फाउंडेशन की स्थापना कार बेचने या सामान्य व्यावसायिक कारोबार से मुनाफा कमाने के लिए नहीं की जा रही है।
इसके बजाय यह कौशल विकास, उद्योगों में बेहतर कार्यप्रणाली और प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों पर ध्यान देगा। मारुति सुजुकी इस पहल को अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी CSR गतिविधियों के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहती है।
गुजरात और हरियाणा में सेंटर बनाने की योजना
मारुति सुजुकी और जापान की सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने अप्रैल 2025 में ही भारत में OSCOE स्थापित करने की योजना घोषित की थी। उस समय कंपनी ने बताया था कि गुजरात और हरियाणा में सेंटर बनाए जाने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों का मकसद भारतीय सप्लाई चेन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करना है।
फाउंडेशन के जरिए ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली छोटी और बड़ी कंपनियों की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता सुधारने पर भी काम किया जाएगा। इसमें टियर-1, टियर-2 और टियर-3 सप्लायर कंपनियों को शामिल करने की योजना है। ये कंपनियां वाहन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग पुर्जे और जरूरी सामान तैयार करती हैं।
कॉलेजों और उद्योगों के साथ मिलकर होगा प्रशिक्षण
OSCOE के प्रस्तावित कार्यक्रमों में शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के साथ सहयोग भी शामिल है। इसके तहत प्रशिक्षण, लेक्चर, सेमिनार और तकनीकी चर्चाओं के जरिए जापानी मैन्युफैक्चरिंग पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी। इस पहल से तकनीकी शिक्षा और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के बीच तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत और उनमें भाग लेने की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।









