IIP September 2026: भारत का औद्योगिक उत्पादन 6.7% बढ़ा, मैन्युफैक्चरिंग और बिजली सेक्टर में मजबूत तेजी

सितंबर 2026 में भारत का औद्योगिक उत्पादन 6.7% बढ़ा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 7.6% और बिजली एवं गैस आपूर्ति में 11.2% की वृद्धि दर्ज हुई। जानें IIP के ताजा

भारत के औद्योगिक उत्पादन में सितंबर 2026 के दौरान 6.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 7.6 प्रतिशत और बिजली एवं गैस आपूर्ति में 11.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। हालांकि, खनन क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर रहा।

बिजनेस न्यूज़: भारत की फैक्ट्रियों में सितंबर महीने के दौरान उत्पादन बढ़ा है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने बुधवार, 28 अक्टूबर को औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आंकड़े जारी किए। इनके मुताबिक, सितंबर 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 6.7 प्रतिशत बढ़ा। 

इस दौरान गाड़ियों, इलेक्ट्रिकल उपकरणों और प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में अच्छी तेजी रही। हालांकि, अगस्त के मुकाबले औद्योगिक विकास की रफ्तार कुछ धीमी हुई है।

अगस्त के मुकाबले सितंबर में कितनी रही औद्योगिक विकास की रफ्तार?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 124.3 पर पहुंच गया। पिछले साल सितंबर में यह 116.5 था। इस तरह सालाना आधार पर उत्पादन में 6.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। अगस्त में औद्योगिक उत्पादन की शुरुआती वृद्धि दर 8 प्रतिशत बताई गई थी। हालांकि, संशोधित आंकड़ों में इसे घटाकर 7.8 प्रतिशत कर दिया गया है। 

इससे साफ है कि सितंबर में उद्योगों का उत्पादन बढ़ा जरूर, लेकिन पिछले महीने के मुकाबले इसकी रफ्तार धीमी पड़ी। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान औद्योगिक उत्पादन में कुल 6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

मैन्युफैक्चरिंग और बिजली सेक्टर ने संभाली रफ्तार

सितंबर में सबसे ज्यादा मजबूती बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में देखने को मिली। इस सेक्टर का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 11.2 प्रतिशत बढ़ा।मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। इसलिए इसके प्रदर्शन का कुल IIP पर बड़ा असर पड़ता है।

पानी की आपूर्ति, सीवरेज और कचरा प्रबंधन क्षेत्र में 5.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, खनन और उत्खनन क्षेत्र में 6.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस सेक्टर का सूचकांक 90.4 रहा। इससे कुल औद्योगिक विकास दर पर कुछ दबाव पड़ा।

गाड़ियों और इलेक्ट्रिकल उपकरणों का उत्पादन बढ़ा

IIP September 2026: भारत का औद्योगिक उत्पादन 6.7% बढ़ा, मैन्युफैक्चरिंग और बिजली सेक्टर में मजबूत तेजी

मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े 23 उद्योग समूहों में से 17 का उत्पादन सितंबर में बढ़ा है। इनमें इलेक्ट्रिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों का प्रदर्शन खास रहा। इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माण क्षेत्र में 33.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर, कंट्रोल पैनल, यूपीएस सिस्टम और ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टर जैसे उत्पादों ने इस क्षेत्र की वृद्धि में योगदान दिया।

वहीं, मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर निर्माण क्षेत्र में 19 प्रतिशत की तेजी रही। यात्री वाहनों, कमर्शियल गाड़ियों और ऑटो पार्ट्स के उत्पादन में बढ़ोतरी से इस सेक्टर को फायदा मिला। रबर और प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के उत्पादन में भी 19.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

मशीनरी और निर्माण से जुड़े सामान की मांग का क्या संकेत?

सरकार ने सामान के इस्तेमाल के आधार पर भी औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े जारी किए हैं। सितंबर में इंटरमीडिएट गुड्स यानी दूसरे उत्पाद तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले सामान का उत्पादन 12.2 प्रतिशत बढ़ा। इसका सूचकांक 131.7 रहा। मशीनों और दूसरे पूंजीगत सामान के उत्पादन में 10.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कैपिटल गुड्स का सूचकांक 153.4 तक पहुंच गया।

इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण से जुड़े सामान का उत्पादन 7.2 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, प्राथमिक वस्तुओं में 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ सामान, जैसे घरेलू उपकरणों की श्रेणी में 6 प्रतिशत और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली गैर-टिकाऊ वस्तुओं में 1.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इन आंकड़ों से पता चलता है कि मशीनरी, उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले सामान और निर्माण से जुड़े उत्पादों का प्रदर्शन उपभोक्ता वस्तुओं की कुछ श्रेणियों से बेहतर रहा।

IIP के आंकड़े तैयार करने का तरीका भी बदला

सांख्यिकी मंत्रालय ने 1 जून 2026 को औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की नई सीरीज जारी की थी। इसमें आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया। नई सीरीज में 463 उत्पाद समूह शामिल हैं। इनमें से 234 समूहों के उत्पादन आंकड़े कीमत के आधार पर जुटाए जाते हैं। इन उत्पादों के लिए मंत्रालय ने जून में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की जगह आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) का इस्तेमाल शुरू किया था। 

इन उत्पाद समूहों की कुल सूचकांक में हिस्सेदारी करीब 36 प्रतिशत है। इस बदलाव का उद्देश्य कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर अलग करके वास्तविक उत्पादन का बेहतर अनुमान लगाना है।

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