अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरें 3.75 से 4 प्रतिशत के बीच बरकरार रखी हैं। महंगाई अभी भी चिंता बनी हुई है। दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना से भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
बिजनेस न्यूज़: अमेरिका में महंगाई कम नहीं होने के बावजूद फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरें नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। बुधवार, 28 अक्टूबर को हुई बैठक में अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने मौजूदा दरों को बनाए रखने पर सहमति जताई। हालांकि, सभी अधिकारी इस फैसले से सहमत नहीं थे। दो सदस्यों ने तुरंत दरें बढ़ाने की मांग की। अब निवेशकों की नजर दिसंबर की बैठक पर है, जहां एक बार फिर ब्याज दरों में बदलाव हो सकता है।
फेड की बैठक में 10 सदस्यों ने किया फैसले का समर्थन
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति FOMC ने 10-2 के बहुमत से ब्याज दरें स्थिर रखने का फैसला सुनाया। इसके बाद बेंचमार्क ब्याज दर 3.75 से 4 प्रतिशत के दायरे में बनी रहेगी। बैठक में फेड गवर्नर लिसा कुक और क्लीवलैंड फेड की अध्यक्ष बेथ हैमैक ने इस फैसले का विरोध किया। दोनों अधिकारी ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के पक्ष में थे।
फेड ने अपने बयान में माना कि अमेरिका में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। घरेलू खर्च और निवेश की स्थिति अच्छी है, जबकि रोजगार बाजार में भी ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। इसके बावजूद बढ़ती कीमतें केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
सितंबर में तीन साल बाद बढ़ाई गई थीं ब्याज दरें
![]()
इससे पहले सितंबर 2026 की बैठक में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी। लगभग तीन साल बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने दरें बढ़ाने का फैसला लिया था। अक्टूबर की बैठक से पहले भी बाजार में दरें बढ़ने को लेकर चर्चा थी। हालांकि, फेड अधिकारियों के बयानों से संकेत मिलने लगे थे कि बैंक कुछ और आर्थिक आंकड़े आने तक इंतजार कर सकता है।
फेड का लक्ष्य महंगाई को 2 प्रतिशत तक लाना है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि आगे के फैसले महंगाई और अर्थव्यवस्था से मिलने वाले नए आंकड़ों के आधार पर होंगे।
दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की कितनी संभावना?
अक्टूबर में दरें स्थिर रहने के बाद अब दिसंबर की बैठक अहम हो गई है। फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति बैठक 8 और 9 दिसंबर 2026 को होगी। CME FedWatch के 28 अक्टूबर के आंकड़ों के मुताबिक, बाजार में दिसंबर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना करीब 85 प्रतिशत आंकी गई। अगर फेड दरें बढ़ाता है, तो बेंचमार्क ब्याज दर 4 से 4.25 प्रतिशत के दायरे में पहुंच सकती है। हालांकि, यह बाजार का अनुमान है। फेडरल रिजर्व ने दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
भारतीय शेयर बाजार में क्यों बढ़ सकता है दबाव?
अमेरिका के ब्याज दर संबंधी फैसलों का असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी पड़ता है। जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो वहां के सरकारी बॉन्ड निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयरों से पैसा निकालकर अमेरिकी बाजार की तरफ जा सकते हैं।
अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ती है, तो सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, बाजार की दिशा कंपनियों की कमाई, घरेलू निवेश और दूसरे आर्थिक हालात पर भी निर्भर करेगी।









