लखनऊ में चबूतरे के 9 इंच के विवाद में ट्रिपल मर्डर डेढ़ महीने तक शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप

लखनऊ के सआदतगंज में चबूतरे और पार्किंग विवाद के बाद तीन लोगों की गोली मारकर हत्या हुई। परिजनों ने डेढ़ महीने तक शिकायतों की अनदेखी का आरोप लगाया।
लखनऊ में चबूतरे के 9 इंच के विवाद में ट्रिपल मर्डर डेढ़ महीने तक शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप
Photo Credit / Attribution: Google

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सआदतगंज क्षेत्र में चबूतरे को लेकर शुरू हुआ पुराना विवाद आखिरकार तीन लोगों की हत्या तक पहुंच गया। नौबस्ता के ब्राह्मणी टोला में पड़ोसी परिवारों के बीच बरगद के पेड़ के नीचे चबूतरा बनाने और वहां गाड़ी खड़ी करने को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा था। आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच विवाद पहले भी कई बार हुआ और शिकायतें पुलिस तक पहुंचीं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। करीब डेढ़ महीने से शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोपों के बीच सोमवार को विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गोलीबारी में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई। इस घटना के बाद नगर निगम और पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई है।

घटना में जान गंवाने वालों की पहचान शिवाजी तिवारी, उनके भाई शंभू उर्फ शिवेंद्र तिवारी और शिवाजी के बेटे सुयश तिवारी के रूप में हुई है। तीनों की हत्या से परिवार पूरी तरह टूट गया है। घर में जहां कुछ समय बाद शादी की खुशियां मनाने की तैयारी चल रही थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है। सुयश की शादी 5 दिसंबर को तय बताई गई थी और परिवार में इसकी तैयारियां चल रही थीं। रिश्तेदारों और परिचितों को शादी के निमंत्रण दिए जा रहे थे, लेकिन वारदात ने परिवार की खुशियों को गहरे सदमे में बदल दिया।  स्थानीय जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत बरगद के पुराने पेड़ के नीचे चबूतरा बनवाने को लेकर हुई थी। दोनों परिवार आसपास रहते थे और पेड़ के पास की जगह को लेकर उनकी राय अलग-अलग थी। एक पक्ष चबूतरा बनवाना चाहता था, जबकि दूसरे पक्ष को इस पर आपत्ति थी। चबूतरे के आकार और जगह को लेकर मतभेद बढ़ते गए। इसी के साथ वहां वाहन खड़ा करने को लेकर भी तनाव बना रहने लगा। जिस जगह को लेकर विवाद शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे दोनों परिवारों के बीच टकराव का कारण बन गई। नौबत यहां तक पहुंच गई कि मामूली निर्माण और पार्किंग का विवाद जानलेवा हिंसा में बदल गया।

बताया गया है कि दोनों परिवारों के बीच पहले भी कई बार कहासुनी हुई थी। मामला स्थानीय स्तर पर उठने के बाद पुलिस तक भी पहुंचा था। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार की ओर से आरोप लगाए गए हैं कि शिकायतों के बावजूद विवाद को गंभीरता से नहीं सुलझाया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने पहले हस्तक्षेप किया था और चबूतरे का निर्माण रोकने की स्थिति भी बनी थी, लेकिन दोनों परिवारों के बीच तनाव खत्म नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब विवाद पहले से चल रहा था, तब दोनों पक्षों के बीच स्थायी समाधान कराने और भविष्य में हिंसा रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे। इन सवालों की जांच जरूरी है, हालांकि शिकायतों की अनदेखी के आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी।  घटना वाले दिन विवाद फिर से गाड़ी खड़ी करने को लेकर बढ़ा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बरगद के पेड़ के पास कार खड़ी करने को लेकर दोनों पक्षों में बहस शुरू हुई। पुरानी रंजिश के कारण कहासुनी जल्द ही तेज हो गई। आरोप है कि इसी दौरान ऋषभ शुक्ला घर के अंदर गया और पिस्टल लेकर बाहर आया। इसके बाद उसने गोलीबारी कर दी। फायरिंग में तीन लोगों की जान चली गई। गोली चलने की आवाज से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए। पुलिस ने मुख्य आरोपी को घटनास्थल से गिरफ्तार किया और मामले में इस्तेमाल की गई पिस्टल बरामद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।  इस वारदात के बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पहले की शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती, तो विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता था। परिजनों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों के आरोपों में यह बात भी सामने आई कि विवाद को पहले नगर निगम से संबंधित मामला बताकर टाल दिया गया था। हालांकि, चबूतरे या सार्वजनिक जगह से जुड़ा विवाद होने के बावजूद यदि किसी पक्ष की ओर से धमकी, मारपीट या हिंसा की शिकायत की जाती है, तो संबंधित शिकायत की प्रकृति के अनुसार पुलिस और नगर निगम के बीच समन्वय जरूरी होता है। यह जांच का विषय है कि अलग-अलग स्तर पर शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और क्या किसी अधिकारी की लापरवाही रही।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए सआदतगंज थाना प्रभारी और कश्मीरी मोहल्ला पुलिस चौकी के प्रभारी उपनिरीक्षक को निलंबित कर दिया। अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए जाने की भी खबर है। यह कार्रवाई उन आरोपों के बीच हुई है, जिनमें कहा गया कि परिवारों के बीच पहले से विवाद की जानकारी पुलिस को थी। विभागीय जांच में यह देखा जा सकता है कि शिकायत मिलने के बाद क्या कदम उठाए गए, विवाद को रोकने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं। निलंबन अपने आप में दोष साबित होना नहीं है, बल्कि जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।  तीन लोगों की हत्या के बाद इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने हत्या के मामले में कार्रवाई शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य आरोपी के साथ उसके परिवार के कुछ सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य नामजद लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। मामले में किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही, यह पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।  इस घटना ने स्थानीय विवादों को समय रहते सुलझाने की जरूरत को एक बार फिर सामने रखा है। किसी पेड़ के नीचे चबूतरा बनाने, जमीन के इस्तेमाल या वाहन पार्किंग जैसे मुद्दे पहली नजर में छोटे लग सकते हैं, लेकिन जब विवाद लगातार बढ़ता रहे और पक्षों के बीच तनाव बना रहे, तो प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में शिकायतों को दर्ज करना, दोनों पक्षों की बात सुनना, जमीन या निर्माण से जुड़े अधिकारों की स्थिति स्पष्ट करना और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है। केवल समझौता कराकर मामले को अस्थायी रूप से शांत कर देना पर्याप्त नहीं होता, यदि विवाद की जड़ बनी रहती है।

लखनऊ के सआदतगंज में हुई इस वारदात में तीन लोगों की जान चली गई और एक परिवार की खुशियां उजड़ गईं। अब इस मामले में दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। पहला, गोलीबारी और तीन हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और दूसरा, पहले हुए विवाद तथा शिकायतों पर प्रशासनिक प्रतिक्रिया की जांच। यदि यह साबित होता है कि किसी स्तर पर शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया या आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। फिलहाल पुलिस की जांच और विभागीय कार्रवाई से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चबूतरे के विवाद को रोकने में कहां चूक हुई और इस खूनी वारदात तक पहुंचने की परिस्थितियां कैसे बनीं।

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