इजराइल के आम चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। नेतन्याहू का गुट 53 और आइजनकोट का गठबंधन 48 सीटों पर आगे है। अरब पार्टियां 19 सीटों के साथ सरकार गठन में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
Israel Election 2026: इजराइल में 27 अक्टूबर को हुए आम चुनाव के बाद नई सरकार बनाने की तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। करीब 90 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन 53 सीटों पर आगे है। विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले गुट को 48 सीटें मिलने का अनुमान है। दोनों ही खेमे बहुमत से दूर हैं। वहीं, अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलती दिख रही हैं, जिससे सरकार गठन में उनकी भूमिका बढ़ गई है।
नेतन्याहू को बहुमत के लिए चाहिए 8 और सीटें
इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा रुझानों के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत हासिल करने के लिए आठ अतिरिक्त सीटों की जरूरत है। दूसरी ओर, आइजनकोट का गठबंधन 13 सीटों से पीछे है।
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। उसे 26 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, आइजनकोट की याशर पार्टी 21 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है। हालांकि, सबसे बड़ी पार्टी बनने का मतलब सरकार बनना नहीं है। इसके लिए दूसरे दलों का समर्थन जुटाना होगा।
अरब पार्टियां कैसे बन सकती हैं किंगमेकर?
इस चुनाव में अरब पार्टियों का प्रदर्शन सबसे ज्यादा चर्चा में है। जॉइंट लिस्ट को 12 और राम पार्टी को सात सीटें मिलने का अनुमान है। दोनों को मिलाकर 19 सीटें होती हैं। इजराइल के चुनावी इतिहास में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के लिए यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पिछले चुनाव के बाद इन दोनों दलों के पास कुल 10 सीटें थीं।
अगर अरब पार्टियां विपक्षी गठबंधन को समर्थन देती हैं तो सरकार बदलने की संभावना बन सकती है। हालांकि, आइजनकोट और उनके कई सहयोगी पहले अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से इनकार कर चुके हैं। यही वजह है कि विपक्ष के पास संभावित संख्या होने के बावजूद सरकार गठन आसान नहीं दिख रहा है।
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नेतन्याहू को हटाने के लिए समर्थन देने को तैयार जॉइंट लिस्ट
अरब पार्टियों के गठबंधन जॉइंट लिस्ट ने नेतन्याहू की सरकार को सत्ता से हटाने के लिए विपक्ष का सहयोग करने की इच्छा जताई है। पार्टी का कहना है कि चुनाव में उसके समर्थकों ने बड़ी संख्या में मतदान किया है। वह सरकार की मौजूदा नीतियों को बदलने और वैकल्पिक सरकार बनाने के प्रयासों का समर्थन करेगी।
विपक्षी डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान ने भी अरब पार्टियों के साथ बातचीत का समर्थन किया है। उनका कहना है कि सरकार बदलने के लिए विपक्षी दलों को मिलकर रास्ता निकालना चाहिए।
पांच लाख से ज्यादा वोटों की गिनती अभी बाकी
इजराइल में गुरुवार, 29 अक्टूबर को डबल-एनवेलप बैलेट की गिनती शुरू हुई। इनमें सैनिकों, राजनयिकों, चिकित्सा कर्मचारियों और निर्धारित मतदान केंद्र से अलग जगह वोट देने वाले लोगों के मत शामिल हैं।
इस प्रक्रिया में मतदाता का वोट एक लिफाफे में रखा जाता है। उसे दूसरे लिफाफे में बंद किया जाता है, जिस पर मतदाता की पहचान दर्ज होती है। चुनाव अधिकारी पहले जांच करते हैं कि किसी व्यक्ति ने दो बार मतदान तो नहीं किया। इसके बाद बाहरी लिफाफा हटाकर मत की गोपनीयता बनाए रखते हुए गिनती की जाती है। इन विशेष मतपत्रों की संख्या पांच लाख से ज्यादा बताई गई है। इनकी गिनती पूरी होने पर सीटों के आंकड़े बदल सकते हैं।
इजराइल में कैसे चुने जाते हैं सांसद?
इजराइल में भारत की तरह अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों से सीधे उम्मीदवार नहीं चुने जाते। यहां मतदाता राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। हर पार्टी चुनाव से पहले अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करती है। पूरे देश में मिले वोटों के अनुपात में पार्टियों को संसद की सीटें आवंटित होती हैं। संसद में पहुंचने के लिए किसी पार्टी को कम से कम 3.25 प्रतिशत वैध वोट हासिल करने जरूरी हैं। इससे कम वोट मिलने पर उसे कोई सीट नहीं मिलती।
तीन शहरों में यहूदी-अरब सरकार बनाने की मांग
चुनावी नतीजों के बीच यरुशलम, तेल अवीव और हाइफा में करीब 300 लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ऐसी सरकार बनाने की मांग की, जिसमें यहूदी और अरब समुदायों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व हो।
इस बीच नेतन्याहू के कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ इडो नॉर्डेन को हटाए जाने की अटकलें भी सामने आई हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है।
अब किसकी बनेगी सरकार?
चुनाव के अंतिम नतीजे आने के बाद राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग राजनीतिक दलों से बातचीत करेंगे। इसके आधार पर किसी नेता को सरकार बनाने का मौका दिया जाएगा। फिलहाल नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। अरब पार्टियों के समर्थन पर विपक्ष की सहमति और अंतिम सीटों का बंटवारा तय करेगा कि देश में अगली सरकार कौन बनाएगा।









