SEBI की शेल कंपनियों पर सख्ती की तैयारी, IPO से जुटाए पैसे की होगी निगरानी, निवेशकों के लिए अहम खबर

सेबी ने शेल कंपनियों पर सख्ती और IPO से जुटाए पैसों की निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है। नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर जुर्माना भी लग सकता है। जानें नए प्रस्ताव।

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बिना कारोबारी गतिविधि वाली लिस्टेड कंपनियों पर चिंता जताई है। सेबी IPO से जुटाए गए पैसे की निगरानी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। नए प्रस्तावों में नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर जुर्माने का प्रावधान भी है।

बिजनेस न्यूज़: शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले निवेशकों की सुरक्षा को लेकर बाजार नियामक सेबी ने बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बुधवार, 28 अक्टूबर को कहा कि कुछ लिस्टेड कंपनियां बिना किसी वास्तविक कारोबार के बाजार में बनी हुई हैं। ऐसी कंपनियों से निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि सेबी IPO के जरिए जुटाई गई रकम के इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए नियमों को और सख्त बनाने की तैयारी कर रहा है।

बिना कारोबार वाली कंपनियों पर क्यों उठे सवाल?

एक कार्यक्रम में तुहिन कांत पांडे ने उन कंपनियों का मुद्दा उठाया, जो शेयर बाजार में लिस्टेड तो हैं, लेकिन उनकी कोई खास आर्थिक गतिविधि नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी कुछ कंपनियां शेल कंपनियों की तरह काम करती हैं और बाजार के लिए जोखिम पैदा करती हैं। दरअसल, शेल कंपनी ऐसी संस्था होती है, जिसका सक्रिय कारोबार बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता। कई बार ऐसी कंपनियां कानूनी उद्देश्यों के लिए भी बनाई जाती हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल फर्जी लेन-देन, टैक्स चोरी और काले धन को छिपाने जैसी गतिविधियों में भी किया जा सकता है।

हालांकि, हर शेल कंपनी का अवैध गतिविधियों में शामिल होना जरूरी नहीं है। सेबी की चिंता उन लिस्टेड कंपनियों को लेकर है, जिनका वास्तविक कारोबार न होने से निवेशकों को जोखिम उठाना पड़ सकता है।

IPO से जुटाए पैसे का हिसाब देना होगा

सेबी चेयरमैन ने बताया कि बाजार नियामक IPO के पैसों की निगरानी के लिए थर्ड-पार्टी एजेंसियों की व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रहा है। जब कोई कंपनी IPO लेकर आती है, तो वह निवेशकों को बताती है कि जुटाई गई रकम कहां खर्च की जाएगी। इसमें कर्ज चुकाने, कारोबार बढ़ाने, नए प्लांट लगाने या दूसरी जरूरतों का जिक्र हो सकता है।

नई व्यवस्था के तहत स्वतंत्र निगरानी एजेंसियां जांच करेंगी कि कंपनी ने पैसा बताए गए काम में लगाया है या नहीं। इससे निवेशकों को कंपनी के खर्च और उसके कारोबारी फैसलों के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकेगी।

अभी क्या नियम हैं और क्या बदलने वाला है?

SEBI की शेल कंपनियों पर सख्ती की तैयारी, IPO से जुटाए पैसे की होगी निगरानी, निवेशकों के लिए अहम खबर

मौजूदा नियमों के मुताबिक, अगर किसी IPO में नए शेयर जारी करके 100 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए जाते हैं, तो उस रकम की निगरानी के लिए सेबी-पंजीकृत क्रेडिट रेटिंग एजेंसी नियुक्त करनी होती है। सेबी अब यह व्यवस्था छोटे इश्यू तक बढ़ाने पर विचार कर रहा है। 13 अक्टूबर 2026 को जारी कंसल्टेशन पेपर में प्रस्ताव दिया गया है कि इश्यू के आकार की परवाह किए बिना निगरानी एजेंसी नियुक्त की जाए।

इसमें IPO के अलावा दूसरे तरीकों से शेयर जारी कर पैसा जुटाने वाली कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं। हालांकि, ऑफर फॉर सेल (OFS) वाले हिस्से को इस प्रस्ताव से बाहर रखा गया है, क्योंकि उसमें पैसा कंपनी के बजाय शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलता है।

नियम नहीं मानने पर 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रस्ताव

सेबी के पूर्व कार्यकारी निदेशक वी. एस. सुंदरेशन की अध्यक्षता वाले कार्य समूह ने निगरानी व्यवस्था में कई बदलाव सुझाए हैं। इनमें एक प्रस्ताव यह भी है कि अगर कोई कंपनी निगरानी एजेंसी को जरूरी जानकारी नहीं देती या जांच में सहयोग नहीं करती, तो स्टॉक एक्सचेंज हर मामले में 50 हजार रुपये का जुर्माना लगा सकेगा।

कंपनी की ओर से लगातार सहयोग नहीं मिलने पर उसके प्रमोटरों के डीमैट खाते फ्रीज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अलावा, जिस कंपनी के खिलाफ सहयोग नहीं करने की शिकायत दर्ज होगी, वह समस्या दूर किए बिना अपनी निगरानी एजेंसी को बदल नहीं सकेगी। निगरानी एजेंसियों को सीधे स्टॉक एक्सचेंज के पास रिपोर्ट जमा करने की अनुमति देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

IPO निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

इन बदलावों का सीधा संबंध उन लोगों से है, जो नई कंपनियों के IPO में निवेश करते हैं। कई बार निवेशक कंपनी के कारोबार और भविष्य की योजनाओं को देखकर पैसा लगाते हैं। ऐसे में कंपनी का जुटाई गई रकम को सही जगह खर्च करना महत्वपूर्ण होता है। अगर निगरानी मजबूत होती है, तो निवेशकों के लिए यह जानना आसान हो सकता है कि कंपनी अपने वादों पर कितना अमल कर रही है। हालांकि, यह व्यवस्था किसी IPO में मुनाफे की गारंटी नहीं देगी। शेयर की कीमत कंपनी के प्रदर्शन और बाजार की स्थिति के अनुसार बदलती रहेगी।

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