चुनाव आयोग चार राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट की दोबारा जांच कराएगा। 30 नवंबर को पहली लिस्ट आएगी। इसमें नाम छूटने या कोई गलती मिलने पर लोग सुधार करा सकेंगे। फाइनल लिस्ट 21 जनवरी 2027 को आएगी।
नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट की जांच के लिए नया कार्यक्रम जारी किया है। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को आयोग ने बताया कि चार राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची की दोबारा जांच होगी। इसे विशेष सारांश पुनरीक्षण यानी SSR कहते हैं। इस दौरान जिन लोगों का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, वे अपना नाम जुड़वा सकेंगे।
अगर किसी का नाम गलत लिखा है या पते और उम्र में गड़बड़ी है, तो उसे भी ठीक कराया जा सकेगा। जिन युवाओं की उम्र 18 साल पूरी होने वाली है, उन्हें भी आवेदन करने का मौका मिलेगा।
किन राज्यों में होगी वोटर लिस्ट की जांच?
चुनाव आयोग के मुताबिक, इस बार अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में वोटर लिस्ट की जांच होगी। इनके अलावा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव को भी इसमें शामिल किया गया है। इस काम का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होगा, जिनकी उम्र वोट डालने के लिए पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं जुड़ा है। ऐसे लोग अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
जिन लोगों का नाम पहले से दर्ज है, वे भी अपनी जानकारी देख सकते हैं। अगर नाम की स्पेलिंग, उम्र, पता या दूसरी जानकारी गलत है, तो उसे ठीक कराने का मौका मिलेगा। आयोग ने साफ किया है कि यह काम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत होगा। चुनाव अधिकारियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि कोई योग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट से बाहर न रह जाए।
30 नवंबर को आएगी पहली लिस्ट, कब तक कर सकेंगे सुधार?
चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट की जांच से लेकर अंतिम सूची जारी करने तक का कार्यक्रम तय कर दिया है। सबसे पहले मतदान केंद्रों की व्यवस्था देखी जाएगी। कहीं मतदान केंद्र बदलने या उनकी व्यवस्था ठीक करने की जरूरत होगी, तो यह काम 20 नवंबर 2026 तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 30 नवंबर को पहली वोटर लिस्ट जारी होगी। लोग इस सूची में अपना नाम देख सकेंगे। अगर किसी का नाम नहीं मिलता है या कोई जानकारी गलत लिखी है, तो वह उसे ठीक कराने के लिए आवेदन कर सकता है।
इसके लिए 30 नवंबर से 30 दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है। इसी दौरान लोग सूची में किसी गलत नाम या जानकारी को लेकर आपत्ति भी दर्ज करा सकेंगे। आवेदन मिलने के बाद चुनाव अधिकारी उनकी जांच करेंगे। आयोग ने यह काम 18 जनवरी 2027 तक पूरा करने को कहा है। इसके तीन दिन बाद यानी 21 जनवरी को अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी जाएगी। इसलिए जिन लोगों को अपने नाम या दूसरी जानकारी में सुधार कराना है, उन्हें तय तारीख के अंदर आवेदन करना होगा।
2027 में 18 साल के होने वाले युवा भी जुड़वा सकेंगे नाम
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इस बार नए वोटरों के लिए भी अच्छी खबर है। जिन युवाओं की उम्र 1 जनवरी 2027 को 18 साल हो जाएगी, वे वोटर लिस्ट में अपना नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इतना ही नहीं, जो युवा 1 अप्रैल, 1 जुलाई या 1 अक्टूबर 2027 को 18 साल के होंगे, वे भी पहले से अपना फॉर्म भर सकेंगे। हालांकि, फॉर्म भरते ही उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ जाएगा।
जिस तारीख को वे वोटर बनने के योग्य होंगे, उसके आधार पर उनके आवेदन पर आगे की कार्रवाई होगी। इस व्यवस्था से युवाओं को बार-बार आवेदन की तारीख का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे पहले से अपने कागजात तैयार करके आवेदन कर सकेंगे।
SSR और SIR में क्या फर्क है?
चुनाव आयोग समय-समय पर वोटर लिस्ट की जांच कराता है। इसके लिए SSR और SIR की प्रक्रिया अपनाई जाती है। SSR में पुरानी वोटर लिस्ट को ही ठीक किया जाता है। मसलन, किसी का नाम छूट गया है तो उसे जोड़ा जाएगा। नाम, उम्र या पते में गलती है तो उसे सुधारा जाएगा। अगर किसी का नाम दो जगह लिखा है तो उसकी भी जांच होगी।
SSR के दौरान पुराने वोटरों को आमतौर पर फिर से फॉर्म नहीं भरना पड़ता। उनका नाम पहले से लिस्ट में रहता है। फिर भी एक बार अपना नाम देख लेना ठीक रहेगा, ताकि बाद में वोट डालने के समय परेशानी न हो। SIR में मामला थोड़ा अलग है। इसमें वोटर लिस्ट की गहराई से जांच होती है। चुनाव आयोग के कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों से जानकारी ले सकते हैं।
जरूरत पड़ने पर कागजात भी मांगे जा सकते हैं। इससे पता किया जाता है कि लिस्ट में जिन लोगों के नाम हैं, वे वोट देने के योग्य हैं या नहीं। पूरी जांच आयोग के तय नियमों के हिसाब से की जाती है।
चुनाव आयोग ने अधिकारियों को क्या जिम्मेदारी दी?
चुनाव आयोग ने संबंधित राज्यों के अधिकारियों से कहा है कि वोटर लिस्ट का काम समय पर निपटाया जाए। इसके लिए पहले ही कर्मचारी लगा दिए जाएं। जहां मतदान केंद्र बदलने की जरूरत है, वहां भी समय रहते इंतजाम कर लिया जाए। जिलों में चुनाव का काम देख रहे अधिकारियों को खास ध्यान रखना होगा कि 18 साल की उम्र पूरी कर चुके किसी योग्य व्यक्ति का नाम छूटने न पाए।
अगर किसी का नाम गलत लिखा है या दूसरी जानकारी में गड़बड़ी है तो उसे ठीक करने का मौका दिया जाए। किसी वोटर का नाम हटाने से पहले भी तय नियमों का पालन करना होगा।









