झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग से सुनवाई की अवधि 30 दिन बढ़ाने की मांग की है। पार्टी के मुताबिक, राज्य में 19.31 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं और पांच लाख से अधिक नोटिस मतदाताओं तक नहीं पहुंचे हैं।
रांची: झारखंड में वोटर लिस्ट की जांच से जुड़ी SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने कई समस्याएं रखी हैं। पार्टी का कहना है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं की सुनवाई अभी बाकी है। कई लोगों को जरूरी कागजात बनवाने में भी परेशानी हो रही है। इसी मुद्दे पर बुधवार, 4 नवंबर को प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात की और सुनवाई के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय देने की मांग की।
19 लाख से ज्यादा मामलों की सुनवाई अभी बाकी
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर 31 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट का हवाला दिया है। पार्टी के मुताबिक, राज्य में कुल 59 लाख 56 हजार 574 नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से 40 लाख 25 हजार 102 मामलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन 19 लाख 31 हजार 472 मामले अभी भी लंबित हैं।
इसके अलावा 5 लाख 6 हजार 625 नोटिस ऐसे हैं, जो अब तक संबंधित मतदाताओं तक नहीं पहुंच पाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर मामले लंबित रहने के कारण तय समय में पूरी प्रक्रिया निपटाना आसान नहीं होगा।
फिलहाल SIR की सुनवाई पूरी करने की समयसीमा 23 नवंबर बताई गई है। कांग्रेस चाहती है कि इसे कम से कम एक महीने आगे बढ़ाया जाए, ताकि जिन लोगों की सुनवाई बाकी है, उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका मिल सके।
कांग्रेस नेताओं ने चुनाव अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
बुधवार को झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार से मिला। नेताओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर मतदाताओं के सामने आ रही परेशानियों की जानकारी दी।
कांग्रेस ने कहा कि SIR की प्रक्रिया के दौरान आम लोगों को दस्तावेज जमा करने से लेकर सुनवाई में शामिल होने तक कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने चुनाव अधिकारियों से इन समस्याओं को जल्द दूर करने की अपील की है।
प्रतिनिधिमंडल में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, विधायक रामचंद्र सिंह, भूषण बाड़ा, सुबोधकांत सहाय, प्रदीप कुमार बलमुचु, बन्ना गुप्ता सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
जरूरी कागजात बनवाने में लोगों को हो रही परेशानी
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कहा कि झारखंड के कई प्रखंडों में लोगों को स्थायी निवासी प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहे हैं। इसके अलावा जाति प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर और वंशावली जैसे दस्तावेज तैयार करवाने में भी समय लग रहा है।
इन कागजात की जरूरत पड़ने पर लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि दस्तावेज समय पर नहीं मिलने से कई पात्र मतदाता अपनी सुनवाई के दौरान जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
पार्टी ने मांग की है कि लंबित प्रमाण पत्र जल्द जारी किए जाएं। साथ ही सत्यापन के बाद स्थानीय स्तर पर जारी निवासी प्रमाण पत्र भी स्वीकार किए जाएं, ताकि कागजात की समस्या के कारण किसी मतदाता को परेशानी न हो।
BLO ऐप में तकनीकी दिक्कतों का भी उठाया मुद्दा
कांग्रेस ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर बढ़ते काम के दबाव की ओर भी चुनाव आयोग का ध्यान दिलाया है। पार्टी के अनुसार, SIR से जुड़े ऑनलाइन काम में इस्तेमाल होने वाले BLO ऐप में तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं।
कुछ मामलों में मतदाता सुनवाई में शामिल हो चुके हैं, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में उनकी स्थिति अब भी लंबित दिखाई दे रही है। ऐसे लोगों को दोबारा नोटिस मिलने की शिकायत भी सामने आई है।
कांग्रेस ने इन तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के साथ सुनवाई में शामिल होने वाले मतदाताओं को SMS के जरिए पुष्टि भेजने की मांग की है। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि उनकी सुनवाई दर्ज हुई है या नहीं।
दिवाली और छठ के कारण भी समय बढ़ाने की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि दिवाली, भैया दूज और छठ जैसे त्योहारों के दौरान लोगों की व्यस्तता बढ़ जाती है। कई सरकारी कार्यालयों में छुट्टियां भी रहती हैं। ऐसे में लोगों के लिए दस्तावेज तैयार करवाना और तय समय पर सुनवाई में पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
कांग्रेस का मानना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए अतिरिक्त समय देना जरूरी है। पार्टी ने कहा है कि SIR का काम पूरा करते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक केवल सरकारी प्रक्रिया या दस्तावेजों की कमी के कारण मतदाता सूची से बाहर न हो।
फिलहाल कांग्रेस ने अपनी मांग चुनाव अधिकारियों के सामने रख दी है। सुनवाई की अवधि बढ़ाने को लेकर अंतिम फैसला चुनाव आयोग को करना है। अभी 30 दिन का अतिरिक्त समय देने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।









