उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को गाजियाबाद में विद्या भारती के 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह में पहुंचे। उन्होंने प्रतियोगिता जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस दौरान धामी ने कहा कि खेल बच्चों को मेहनत, अनुशासन और मिलकर आगे बढ़ना सिखाते हैं।
गाजियाबाद: विद्या भारती के 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह का बुधवार, 4 नवंबर 2026 को समापन हो गया। गाजियाबाद पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने अलग-अलग प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार दिए। खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि खेल में जीतना अच्छी बात है, लेकिन हारने के बाद दोबारा मेहनत करना भी उतना ही जरूरी है।
देशभर से आए खिलाड़ियों को देखकर खुश हुए सीएम धामी
गाजियाबाद में एक से चार नवंबर तक चले इस खेलकूद समारोह में देश के कई राज्यों से विद्यार्थी हिस्सा लेने पहुंचे थे। एथलेटिक्स की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में 731 से ज्यादा खिलाड़ियों ने भाग लिया। चार दिन तक चले मुकाबलों के बाद बुधवार को विजेताओं को सम्मानित किया गया।
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समारोह में मुख्यमंत्री धामी ने खिलाड़ियों से कहा कि वे मैदान में मिली जीत को अपनी आखिरी मंजिल न समझें। अभी उन्हें आगे कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना है। इसके लिए रोज अभ्यास करना होगा। उन्होंने उन विद्यार्थियों का भी हौसला बढ़ाया, जो इस बार पदक नहीं जीत सके।
धामी ने कहा कि अलग-अलग प्रदेशों से आए बच्चों को एक साथ देखकर अच्छा लग रहा है। यहां किसी की भाषा अलग है तो किसी का पहनावा, लेकिन मैदान में उतरते समय सभी का मकसद अच्छा खेलना होता है। ऐसे आयोजनों से बच्चों को दूसरे राज्यों के साथियों से मिलने और उनके बारे में जानने का मौका मिलता है।
खेल में हारने वाला भी बहुत कुछ सीखकर लौटता है
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बच्चों को खेल के साथ पढ़ाई पर भी ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मैदान में खेलते समय खिलाड़ी को कई बार मुश्किल फैसले लेने पड़ते हैं। कभी अपनी टीम के लिए मौका छोड़ना होता है तो कभी दबाव में भी अच्छा प्रदर्शन करना पड़ता है।
खेलों में हिस्सा लेने से बच्चों की दिनचर्या भी बदलती है। उन्हें अभ्यास के लिए समय निकालना पड़ता है। खाने-पीने और आराम का ध्यान रखना होता है। धीरे-धीरे यही आदतें उनके दूसरे कामों में भी मदद करती हैं।
धामी ने कहा कि जीत मिलने पर घमंड नहीं करना चाहिए। वहीं, हारने के बाद अपनी कमियों को समझना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत जारी रखें।
विद्या भारती के स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेलों पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विद्या भारती के कामकाज का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि संस्था की शुरुआत 1952 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पहले सरस्वती शिशु मंदिर से हुई थी। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में विद्यालय खोले गए।
धामी ने कहा कि आज देशभर में विद्या भारती के 25 हजार से अधिक शिक्षण संस्थान हैं, जहां 34 लाख से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। उत्तराखंड में भी संस्था के करीब 562 विद्यालय चल रहे हैं। इनमें सवा लाख से अधिक बच्चे पढ़ते हैं।
उन्होंने ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में शिक्षा पहुंचाने के लिए संस्था के प्रयासों की तारीफ की। मुख्यमंत्री के मुताबिक, स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेलकूद और दूसरी गतिविधियां भी होनी चाहिए। कई बच्चों में खेल की अच्छी प्रतिभा होती है, लेकिन उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के लिए सही मंच नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं ऐसे विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित हो सकती हैं। यहां अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
पैरालंपिक पदक विजेता निषाद कुमार का किया जिक्र
खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने भारतीय पैरा एथलीट निषाद कुमार का उदाहरण दिया। निषाद ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में पुरुषों की ऊंची कूद प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था।
धामी ने उनकी उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा कि खेल में आगे बढ़ने के लिए लगातार मेहनत करनी पड़ती है। मुश्किल परिस्थितियां आने पर भी अभ्यास नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समारोह में हिस्सा लेने वाले कई विद्यार्थी आने वाले वर्षों में बड़े खेल मुकाबलों में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
समारोह में यह जानकारी भी दी गई कि स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) में विद्या भारती को राज्य इकाई के रूप में मान्यता मिली है। इससे चयनित खिलाड़ियों को आगे SGFI की प्रतियोगिताओं में विद्या भारती का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा।
खेलो इंडिया और फिट इंडिया अभियान पर भी की बात
मुख्यमंत्री धामी ने केंद्र सरकार की खेलों से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य युवाओं को खेलों से जोड़ना और लोगों को अपनी सेहत के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने कहा कि अब छोटे शहरों और गांवों से भी खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच रहे हैं। ऐसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए अच्छे मैदान, प्रशिक्षण और खेल का सामान मिलना जरूरी है।
धामी ने उत्तराखंड में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों को भी खेल में आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए।
शिक्षकों और प्रशिक्षकों को भी दी बधाई
कार्यक्रम के आखिर में मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों के साथ उनके शिक्षकों और प्रशिक्षकों की मेहनत की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी विद्यार्थी को प्रतियोगिता के लिए तैयार करने में उसके परिवार, स्कूल और कोच का भी बड़ा योगदान रहता है।







