इंदौर-पीथमपुर से दुनिया तक पहुंचेंगी दवाएं, निर्यात बढ़ाने की तैयारी तेज, जानें क्या है योजना

मध्य प्रदेश में फार्मा एक्सपोर्ट बढ़ाने की तैयारी तेज। इंदौर-पीथमपुर की कंपनियों ने NOC नियम आसान करने, सब्सिडी और नए फार्मा पार्क की मांग की।

मध्य प्रदेश का फार्मा उद्योग विदेशों में कारोबार बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। दवा निर्यात में प्रदेश देश के प्रमुख पांच राज्यों में शामिल रहा है। इंदौर में हुई बैठक में एक्सपोर्ट की मुश्किलें दूर करने और नया फार्मा पार्क बनाने की मांग उठी।

इंदौर: मध्य प्रदेश में बनने वाली दवाओं की मांग देश के बाहर भी है। अब यहां की फार्मा कंपनियां अमेरिका, अफ्रीका और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपना कारोबार बढ़ाना चाहती हैं। इंदौर और पीथमपुर इस उद्योग के प्रमुख केंद्र हैं। हालांकि, विदेशों में दवाएं भेजने के लिए जरूरी मंजूरी, कागजी प्रक्रिया और सरकारी सहायता से जुड़ी शर्तें कंपनियों के सामने चुनौती बनी हुई हैं। इन परेशानियों को दूर करने के लिए उद्योग जगत ने सरकार से सहयोग मांगा है।

इंदौर में फार्मा कंपनियों ने उठाई अपनी परेशानियां

मध्य प्रदेश का दवा उद्योग अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता। प्रदेश में बनी दवाएं पहले से विदेशों में भेजी जा रही हैं, लेकिन कंपनियों का मानना है कि निर्यात बढ़ाने की अभी काफी गुंजाइश है। इसके लिए जरूरी है कि कारोबार से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाएं आसान हों और उद्योगों को बेहतर सुविधाएं मिलें।

इसी मुद्दे पर इंदौर में फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (Pharmexcil) की बैठक हुई। इसमें मध्य प्रदेश के साथ दिल्ली और गुजरात से आए फार्मा उद्योग के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में दवाओं के निर्यात से जुड़ी परेशानियों और उनके समाधान पर चर्चा की गई।

उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि विदेशी खरीदारों से ऑर्डर मिलने के बाद भी कई बार जरूरी मंजूरी लेने में देर हो जाती है। इससे माल भेजने का समय बढ़ जाता है। कुछ मामलों में कंपनियों के हाथ से ऑर्डर निकलने की आशंका भी रहती है। 

दवा निर्यात में मध्य प्रदेश की मजबूत पहचान

मध्य प्रदेश देश के प्रमुख दवा उत्पादक राज्यों में अपनी जगह बना चुका है। वित्त वर्ष 2023-24 में फार्मा एक्सपोर्ट के मामले में प्रदेश पांचवें स्थान पर था। इंदौर, पीथमपुर और देवास जैसे औद्योगिक क्षेत्र इस कारोबार में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

मालवा क्षेत्र में कई दवा निर्माण इकाइयां काम कर रही हैं। अकेले इंदौर में करीब 50 फार्मा फैक्ट्रियां होने की जानकारी सामने आई है। पीथमपुर में भी बड़ी संख्या में दवा कंपनियां सक्रिय हैं। यहां तैयार होने वाली दवाएं घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ विदेशी बाजारों में भी पहुंचती हैं।

प्रदेश के व्यापार पोर्टल के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश से लगभग 1.72 अरब डॉलर के फार्मास्युटिकल उत्पाद निर्यात किए गए। यह राज्य के कुल निर्यात का करीब 22 प्रतिशत था। इससे साफ है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में दवा उद्योग की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण बनी हुई है। 

अमेरिका में कीमत के हिसाब से भारतीय दवाओं की बड़ी मांग

भारतीय दवाओं के लिए अमेरिका सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में शामिल है। वहां दवाओं की बिक्री से मिलने वाली रकम दूसरे कई बाजारों की तुलना में अधिक रहती है। वहीं अफ्रीकी देशों में भारतीय दवाओं की मांग बड़ी मात्रा में होती है। कम कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराना भारतीय कंपनियों की बड़ी ताकत मानी जाती है।

हालांकि, अमेरिकी बाजार में कारोबार करना आसान नहीं है। वहां दवाओं की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और मंजूरी से जुड़े नियम सख्त हैं। इसलिए विदेशी बाजारों में आगे बढ़ने के लिए कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना जरूरी है।

भारत का कुल फार्मा निर्यात वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 16.14 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस दौरान यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका से बढ़ती मांग ने निर्यात को सहारा दिया। 

NOC और सब्सिडी की शर्तों में राहत चाहते हैं कारोबारी

इंदौर की बैठक में दवा निर्यातकों ने तीन प्रमुख मुद्दों पर सरकार का ध्यान दिलाया। इनमें निर्यात के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC की प्रक्रिया आसान करना, सब्सिडी की शर्तों में राहत देना और प्रदेश में आधुनिक फार्मा पार्क विकसित करना शामिल है।

कारोबारियों का कहना है कि अलग-अलग श्रेणी की दवाओं के लिए मंजूरी की व्यवस्था उनकी जरूरतों के अनुसार होनी चाहिए। इससे गैरजरूरी देरी कम हो सकती है। उद्योग से जुड़ी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए ज्ञापन तैयार किया जा रहा है। 

नया फार्मा पार्क बनने से उद्योग को मिल सकती है मदद

प्रदेश में आधुनिक फार्मा पार्क बनाने की मांग भी महत्वपूर्ण है। ऐसी औद्योगिक व्यवस्था में दवा निर्माण से जुड़ी कंपनियों को जरूरी सुविधाएं एक ही क्षेत्र में उपलब्ध कराने की संभावना रहती है। इससे उत्पादन, जांच और माल की आवाजाही को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

इंदौर और पीथमपुर में पहले से मौजूद फार्मा कंपनियों के कारण मध्य प्रदेश के पास उद्योग बढ़ाने का आधार है। अब नए निवेश, बेहतर सुविधाओं और निर्यात मंजूरी की आसान प्रक्रिया पर आगे की प्रगति अहम होगी।

फिलहाल उद्योग की मांगें सरकार के सामने रखी जा रही हैं। इन पर क्या फैसला होता है, इसी से तय होगा कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश की दवा कंपनियां विदेशी बाजारों में अपनी हिस्सेदारी कितनी बढ़ा पाती हैं।

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