नालंदा जिले के बिहारशरीफ सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार सीपीआर देते रहे, लेकिन दूसरी ओर मरीज को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए जरूरी एंबुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी। आरोप है कि अस्पताल में तैनात एंबुलेंसकर्मी इमरजेंसी की सूचना मिलने के बावजूद नाश्ता करने में व्यस्त रहे। परिजनों और अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से बार-बार फोन किए जाने के बाद भी एंबुलेंस पहुंचने में करीब 20 मिनट की देरी हुई। इस बीच मरीज की हालत फिर बिगड़ गई और पावापुरी मेडिकल कॉलेज ले जाने के दौरान रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
मृतक की पहचान नूरसराय थाना क्षेत्र के बृजपुर गांव निवासी केदार पासवान के रूप में हुई है। परिजन ने बुधवार की रात उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल में भर्ती कराया था। बताया जा रहा है कि परिवार के लोगों के बीच खलिहान को लेकर पिछले कुछ दिनों से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान कहासुनी और मारपीट की घटना हुई थी। घटना के बाद केदार पासवान काफी घबराए हुए थे। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इसी तनाव और दहशत के बीच उन्हें हार्ट अटैक आया, जिसके बाद परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान गुरुवार की सुबह अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। वह अस्पताल में ही अचेत होकर गिर पड़े। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर डॉ. महेंद्र कुमार और डॉ. कुमुद कुमार ने नर्सिंग स्टाफ के साथ तत्काल इलाज शुरू किया। डॉक्टरों ने मरीज को बचाने के लिए लगातार सीपीआर दिया। काफी देर तक प्रयास करने के बाद उनकी स्थिति में कुछ सुधार भी दिखाई दिया। हालांकि मरीज की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी और उन्हें बेहतर इलाज की जरूरत थी।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल पावापुरी स्थित वर्धमान आयुर्विज्ञान संस्थान यानी विम्स रेफर करने का निर्णय लिया। ऐसे मामलों में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध होना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि मरीज को जल्द से जल्द उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना आवश्यक था। अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंसकर्मियों को इमरजेंसी गेट के पास मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज को बिना देरी के दूसरे अस्पताल भेजा जा सके। लेकिन इस घटना में मौके पर एंबुलेंसकर्मी मौजूद नहीं थे।
मरीज को रेफर किए जाने के बाद अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों ने एंबुलेंसकर्मियों को फोन किया। उन्हें बताया गया कि मरीज की स्थिति गंभीर है और तत्काल एंबुलेंस की जरूरत है। आरोप है कि फोन पर एंबुलेंसकर्मियों ने कहा कि वे फिलहाल नाश्ता कर रहे हैं। इसके बाद भी एंबुलेंस तुरंत उपलब्ध नहीं हो सकी। इस दौरान डॉक्टर मरीज को सीपीआर देकर उसकी जान बचाने की कोशिश करते रहे और एंबुलेंस की व्यवस्था के लिए लगातार प्रयास किया जाता रहा। बताया गया कि एंबुलेंस करीब 20 मिनट बाद पहुंची।
एंबुलेंस आने में हुई देरी के कारण मरीज को समय पर पावापुरी मेडिकल कॉलेज नहीं ले जाया जा सका। इस बीच उनकी हालत दोबारा गंभीर हो गई। परिजन उन्हें लेकर विम्स पावापुरी के लिए रवाना हुए, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में केदार पासवान ने दम तोड़ दिया। मरीज की मौत के बाद परिजनों में शोक और आक्रोश का माहौल है। घटना ने सदर अस्पताल में एंबुलेंस की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि में खलिहान को लेकर गोतिया के बीच चल रहा विवाद बताया जा रहा है। मृतक की पत्नी श्यामा देवी के अनुसार, पिछले तीन दिनों से परिवार के लोगों के बीच खलिहान को लेकर विवाद चल रहा था। बुधवार को जब वह खलिहान देखने गई थीं, उसी दौरान देवर लक्ष्मण पासवान और उनके परिवार के लोगों के साथ कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद मारपीट तक पहुंच गया। इस घटना में दूसरे पक्ष की एक महिला के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।
नूरसराय थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में गोतिया के बीच विवाद और मारपीट की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक घटना के बाद केदार पासवान की तबीयत बिगड़ी थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रारंभिक जानकारी में उनके शरीर पर कोई गंभीर बाहरी चोट दिखाई नहीं देने की बात कही गई है। आशंका जताई गई है कि विवाद के बाद हुई घबराहट और तनाव के कारण उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया। हालांकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले में आवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अस्पताल में एंबुलेंस की देरी और कर्मियों की कथित लापरवाही को लेकर अस्पताल प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंसकर्मियों का समय पर उपलब्ध नहीं होना बेहद गंभीर मामला है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच में जिस भी कर्मी की लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। गंभीर मरीजों के लिए डॉक्टरों की ओर से तत्काल इलाज शुरू करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी रेफरल के दौरान एंबुलेंस और अन्य जरूरी संसाधनों का समय पर उपलब्ध होना भी है। केदार पासवान के मामले में डॉक्टरों ने सीपीआर देकर उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन एंबुलेंस मिलने में हुई देरी के कारण उन्हें समय पर उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने में बाधा आई। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि एंबुलेंसकर्मियों की ड्यूटी में किस स्तर पर चूक हुई और इस मामले में किन लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी







