Ramayana Movie Review: रावण बनकर छाए यश, जबरदस्त VFX के बीच रणबीर कपूर क्यों नहीं छोड़ पाए खास असर?

Ramayana Movie Review: रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी की फिल्म 'रामायण' में शानदार VFX और भव्य दृश्य देखने को मिले। जानें रावण बने यश क्यों छाए और रणबीर की

रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी की फिल्म 'रामायण पार्ट 1' सिनेमाघरों में आ गई है। फिल्म के बड़े सेट और शानदार VFX देखने लायक हैं। रावण के किरदार में यश ने ध्यान खींचा है, लेकिन कहानी के कई भावुक हिस्से कमजोर लगते हैं।

  • Movie Review: रामायण पार्ट 1
  • कलाकार: रणबीर कपूर , यश , साई पल्लवी , रवि दुबे , अरुण गोविल , रकुल प्रीत , लारा दत्ता , विवेक ओबेरॉय और अनुपम खेर (वॉयस ओवर)
  • लेखक: श्रीधर राघवन, नितेश तिवारी, श्रेयस जैन
  • निर्देशक: नितेश तिवारी
  • निर्माता: नमित मल्होत्रा, यश
  • रिलीज डेट: 5 नवंबर 2026
  • रेटिंग: 3/5

Ramayana Movie Review: लंबे इंतजार के बाद नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण पार्ट 1' गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण बने हैं। नमित मल्होत्रा ने इस बड़े बजट की फिल्म को बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। पर्दे पर अयोध्या से लेकर सोने की लंका तक सब कुछ बेहद भव्य दिखाई देता है। हालांकि, खूबसूरत नजारों और बड़े एक्शन सीन के बीच कहानी कई जगह अपना असर खो देती है। खासकर राम और सीता से जुड़े भावुक हिस्सों में कुछ कमी महसूस होती है।

फिल्म की कहानी में क्या दिखाया गया है?

'रामायण पार्ट 1' की शुरुआत बाकी रामायण की कहानियों से कुछ अलग है। यहां सबसे पहले भगवान राम नहीं, बल्कि रावण की जिंदगी दिखाई गई है। लंका पर कुबेर का राज कैसे हुआ और रावण उसे दोबारा अपने कब्जे में क्यों लेना चाहता था, फिल्म पहले इसी पर चलती है। रावण की मां कैकसी उसे लंका वापस लेने के लिए कहती हैं। इसके बाद रावण ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए तपस्या करता है। वरदान मिलने के बाद उसकी ताकत बढ़ जाती है और वह लंका पर अपना अधिकार जमाने निकल पड़ता है।

शुरू के लगभग 40 मिनट रावण के नाम रहते हैं। फिर कहानी अयोध्या पहुंचती है और भगवान राम की जिंदगी से जुड़े प्रसंग शुरू होते हैं। राम का जन्म, सीता स्वयंवर और वनवास तक की घटनाएं दिखाई जाती हैं। ये बातें दर्शकों के लिए नई नहीं हैं, इसलिए फिल्म में इन्हें थोड़ा अलग ढंग से पेश किया गया है। परेशानी वहां आती है, जहां कहानी बिना रुके एक घटना से दूसरी घटना पर पहुंच जाती है। राम और उनके परिवार के बीच के कुछ पल ऐसे हैं, जिन्हें और खुलकर दिखाया जा सकता था। खासकर वनवास से पहले परिवार में जो कुछ होता है, वह हिस्सा जल्दी खत्म हो जाता है।

फिल्म में सोने की लंका और VFX कैसे हैं?

पर्दे पर सोने की लंका दिखाई देती है तो उसकी बनावट पर नजर ठहर जाती है। अयोध्या के महलों को भी बड़े स्तर पर तैयार किया गया है। जंगलों से लेकर पहाड़ों तक, हर जगह कुछ न कुछ अलग दिखाने की कोशिश हुई है। फिल्म के कई हिस्सों में VFX का खूब इस्तेमाल किया गया है। बड़े पर्दे पर इन नजारों का असर भी नजर आता है।

कुछ दृश्य खास तौर पर याद रह जाते हैं। इनमें देवराज इंद्र के हाथी ऐरावत और समुद्र में भगवान विष्णु का दृश्य शामिल है। रावण की तपस्या को भी काफी बड़े स्तर पर दिखाया गया है। जटायु और रावण के बीच लड़ाई वाला हिस्सा फिल्म के अच्छे एक्शन सीन में गिना जा सकता है। इस दौरान कैमरे का काम और VFX दोनों ध्यान खींचते हैं।

हालांकि, हर जगह यही बात नहीं कही जा सकती। राक्षसों की सेना वाले कुछ दृश्य बनावटी लगते हैं। लड़ाई के दौरान भी कई बार ऐसा महसूस होता है कि सामने असली किरदार नहीं, कंप्यूटर से तैयार किए गए चेहरे और शरीर हैं। इन कमियों के बावजूद फिल्म के ज्यादातर बड़े दृश्य पर्दे पर अच्छे लगते हैं।

रावण के रोल में यश का जलवा, रणबीर कपूर कैसे लगे?

Ramayana Movie Review: रावण बनकर छाए यश, जबरदस्त VFX के बीच रणबीर कपूर क्यों नहीं छोड़ पाए खास असर?

रावण बनकर आए यश का अंदाज फिल्म में अलग ही नजर आता है। उनके चेहरे पर गुस्सा हो या बातों में घमंड, दोनों रावण के स्वभाव के मुताबिक लगते हैं। रावण जब अपने दस सिरों से बात करता है, तब यश की एक्टिंग देखने लायक है। इस किरदार के हिंदी डायलॉग शरद केलकर की आवाज में सुनाई देते हैं। उनकी भारी आवाज रावण के अंदाज के साथ अच्छी तरह मेल खाती है।

रणबीर कपूर की बात करें तो उन्होंने राम के स्वभाव को शांत रखने की कोशिश की है। वह ज्यादा तेज आवाज में बात नहीं करते और उनके हावभाव में भी संयम दिखाई देता है। लेकिन जहां राम को दुखी या परेशान दिखाया गया है, वहां कुछ कमी महसूस होती है। परिवार से अलग होने वाले सीन में उनके चेहरे पर वह दर्द नहीं दिखता, जो कहानी के हिसाब से होना चाहिए था। हालांकि, जटायु के साथ उनका एक दृश्य बाकी हिस्सों से बेहतर बन पड़ा है।

माता सीता बनीं साई पल्लवी भी अपने किरदार में सहज दिखाई देती हैं। उनका पहनावा, बातचीत का तरीका और चेहरे के भाव सीता के स्वभाव से मेल खाते हैं। कुछ जगह उन्हें लड़ाई करते हुए भी दिखाया गया है। मगर राम और सीता के साथ वाले दृश्य ज्यादा नहीं हैं। दोनों के बीच बातचीत के लिए भी कम वक्त रखा गया है। इस वजह से उनके रिश्ते के कई पहलू खुलकर सामने नहीं आ पाते। कहानी में इन दोनों को थोड़ा और समय मिलता तो दर्शक उनके रिश्ते को बेहतर ढंग से महसूस कर सकते थे।

अरुण गोविल का काम अच्छा, बाकी कलाकार कैसे रहे?

राजा दशरथ बने अरुण गोविल ने अपने अभिनय से प्रभावित किया है। बेटे राम से बिछड़ने का दुख उनके चेहरे पर साफ दिखाई देता है। वहीं, लक्ष्मण बने रवि दुबे के काम में कहीं जोश नजर आता है, तो कुछ जगह उनके संवाद उतने असरदार नहीं लगते। रकुल प्रीत सिंह ने शूर्पणखा का किरदार निभाया है। कैकेयी बनी लारा दत्ता और मंथरा के रोल में शीबा चड्ढा भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं। हालांकि, इतने सारे कलाकार होने के कारण कुछ किरदारों को ज्यादा समय नहीं मिल पाया है।

Ramayana Movie Review: रावण बनकर छाए यश, जबरदस्त VFX के बीच रणबीर कपूर क्यों नहीं छोड़ पाए खास असर?

कहानी और गानों में कहां रह गई कमी?

नितेश तिवारी ने फिल्म को बड़े स्तर पर बनाया है, लेकिन कुछ जगह ऐसा लगता है कि उनका पूरा ध्यान शानदार दृश्य दिखाने पर रहा। राम के वनवास जाने और परिवार से बिछड़ने वाले हिस्सों में ज्यादा ठहराव होता, तो कहानी का असर बढ़ सकता था। संगीत की जिम्मेदारी एआर रहमान और हैंस जिमर जैसे बड़े नामों ने संभाली है। कुछ दृश्यों में बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा लगता है, मगर गाने उतनी गहरी छाप नहीं छोड़ते। खासकर भावुक मौकों पर संगीत से और बेहतर काम लिया जा सकता था।

रामायण पार्ट 1 देखने जाएं या नहीं?

फिल्म देखने का मन बना रहे हैं तो पहले यह जान लीजिए कि इसमें कहानी से ज्यादा जोर बड़े सेट और VFX पर दिया गया है। अयोध्या के महल, सोने की लंका और लड़ाई के सीन अच्छे बने हैं। रावण के रोल में यश भी खूब जमे हैं। खासकर जटायु के साथ उनकी लड़ाई वाला हिस्सा देखने लायक है। लेकिन फिल्म की कहानी हर जगह उतना असर नहीं छोड़ती। 

राम के वनवास और परिवार से दूर होने वाले सीन में वह दर्द महसूस नहीं होता, जिसकी उम्मीद थी। कई घटनाएं इतनी जल्दी आगे बढ़ जाती हैं कि किरदारों से जुड़ने का मौका ही नहीं मिलता। फिल्म को बनाने में पैसा और मेहनत दोनों खूब लगे हैं, यह पर्दे पर साफ दिखता है। फिर भी कुछ सीन को थोड़ा और समय दिया जाता तो कहानी ज्यादा अच्छी बन सकती थी। अब दूसरे पार्ट में इन कमियों को कितना सुधारा जाएगा, यह देखना बाकी है।

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