आइची-नागोया में आयोजित पैरा एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाज मोना अग्रवाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत की ही अवनि लेखरा ने सिल्वर मेडल हासिल किया।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारत की पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित पैरा एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में हमवतन और पैरालंपिक चैंपियन अवनि लेखरा को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया। मोना की इस उपलब्धि ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारतीय पैरा खिलाड़ियों की प्रतिभा को सामने रखा है।
फाइनल में मोना ने 250.0 अंक हासिल किए, जबकि अवनि लेखरा 249.6 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में देश को स्वर्ण और रजत पदक दिलाकर शानदार प्रदर्शन किया। मोना के लिए यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि निशानेबाजी में आने से पहले वह कई अन्य खेलों में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं।
राजस्थान के सीकर में हुआ जन्म, बचपन में पोलियो से जूझीं
मोना अग्रवाल का जन्म राजस्थान के सीकर में हुआ था। बचपन में ही उन्हें पोलियो हो गया, जिससे उनके पैरों की गतिविधि प्रभावित हुई। इसके बावजूद उन्होंने अपनी क्षमताओं को पहचानते हुए खेलों में आगे बढ़ने का रास्ता चुना। मोना का सफर इस बात का उदाहरण है कि किसी खिलाड़ी की पहचान केवल उसकी शारीरिक चुनौतियों से नहीं, बल्कि उसके कौशल, मेहनत और दृढ़ संकल्प से होती है। उन्होंने अलग-अलग खेलों में भाग लेकर अपने अनुभव को बढ़ाया और बाद में निशानेबाजी को अपना प्रमुख खेल बनाया।
भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की ओर से प्रकाशित उनकी उपलब्धियों से जुड़ी जानकारी के अनुसार, मोना ने वर्ष 2016 में पैरा-एथलेटिक्स में कदम रखा था। उन्होंने थ्रो स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और राज्य स्तर पर पदक जीते। इसके बाद पैरा-पावरलिफ्टिंग में भी अपनी क्षमता दिखाई।
सिटिंग वॉलीबॉल में भी राजस्थान को दिलाया स्वर्ण
![]()
निशानेबाजी में पहचान बनाने से पहले मोना अग्रवाल सिटिंग वॉलीबॉल में भी सक्रिय थीं। वर्ष 2019 में उन्होंने राजस्थान की महिला टीम की कप्तानी करते हुए राष्ट्रीय सिटिंग वॉलीबॉल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई। उनकी खेल यात्रा का यह पहलू दिखाता है कि उन्होंने एक ही खेल तक खुद को सीमित नहीं रखा।
एथलेटिक्स, पावरलिफ्टिंग और वॉलीबॉल में मिले अनुभव ने उन्हें प्रतिस्पर्धी खेलों की चुनौतियों को समझने का अवसर दिया। बाद में उन्होंने व्यक्तिगत खेल के रूप में राइफल शूटिंग को चुना और इसी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
2021 में शुरू किया निशानेबाजी का सफर
मोना ने दिसंबर 2021 में प्रतिस्पर्धी निशानेबाजी की शुरुआत की। कम समय में उन्होंने इस खेल में उल्लेखनीय प्रगति की और वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने लगीं। 2023 में उन्होंने पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में पदक हासिल किए। इसके बाद मार्च 2024 में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड कप में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इस प्रतियोगिता में उन्होंने 250.7 अंक के एशियाई रिकॉर्ड के साथ अपनी क्षमता का परिचय दिया।
उनका प्रदर्शन यहीं नहीं रुका। पेरिस पैरालंपिक 2024 में मोना ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। इस उपलब्धि ने उन्हें भारत की प्रमुख पैरा निशानेबाजों में शामिल कर दिया।
दो बच्चों की मां, फिर भी खेल के प्रति समर्पण
मोना अग्रवाल दो बच्चों की मां भी हैं। परिवार और खेल की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन उन्होंने अपने खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए लगातार मेहनत की। उनकी यात्रा उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो निजी जिम्मेदारियों के साथ खेल में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। पैरा एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतना उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि है। इस जीत ने उनके अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड को और मजबूत किया है।








