केंद्रीय कैबिनेट ने SIDBI को ₹5,000 करोड़ की इक्विटी सहायता मंजूर की है। इससे MSME सेक्टर को सस्ता और आसान कर्ज मिलेगा। सरकार के अनुसार इससे लाखों नए उद्यम जुड़ेंगे और रोजगार सृजन को गति मिलेगी।
Cabinet Decision: केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी MSME सेक्टर को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) को ₹5,000 करोड़ की इक्विटी सहायता देने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का सीधा फायदा देशभर के लाखों MSMEs को मिलेगा, जिन्हें आने वाले समय में ज्यादा कर्ज और कम ब्याज दर पर फाइनेंसिंग मिल सकेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार 21 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार यह इक्विटी कैपिटल वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के जरिए SIDBI में डालेगी। इस निवेश को एक साथ नहीं बल्कि तीन चरणों में पूरा किया जाएगा, ताकि बैंक की पूंजी स्थिति लगातार मजबूत बनी रहे।
तीन चरणों में होगा पूंजी निवेश
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, यह ₹5,000 करोड़ की इक्विटी सहायता तीन वित्त वर्षों में दी जाएगी। पहले चरण में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ₹3,000 करोड़ की इक्विटी डाली जाएगी। यह निवेश 31 मार्च 2025 को तय बुक वैल्यू ₹568.65 प्रति शेयर के आधार पर होगा।
दूसरे चरण में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान ₹1,000 करोड़ की इक्विटी दी जाएगी। इसकी कीमत उस वर्ष की बुक वैल्यू के अनुसार तय की जाएगी। तीसरे और अंतिम चरण में वित्त वर्ष 2027-28 के दौरान ₹1,000 करोड़ की अतिरिक्त इक्विटी दी जाएगी, जो उस समय लागू बुक वैल्यू पर आधारित होगी।
सरकार का मानना है कि इस तरह चरणबद्ध निवेश से SIDBI की बैलेंस शीट मजबूत होगी और बैंक बिना किसी दबाव के MSME सेक्टर को लगातार फंडिंग कर सकेगा।
MSME को क्या मिलेगा सीधा फायदा
सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस इक्विटी सपोर्ट के बाद SIDBI की फाइनेंशियल क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। इससे बैंक ज्यादा MSMEs को कर्ज देने में सक्षम होगा।
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 के अंत तक SIDBI के जरिए करीब 76.26 लाख MSMEs को वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है। वहीं वित्त वर्ष 2028 के अंत तक यह संख्या बढ़कर लगभग 102 लाख MSMEs तक पहुंच सकती है।
इसका मतलब है कि करीब 25.74 लाख नए MSME लाभार्थी इस सिस्टम से जुड़ेंगे। ये वे छोटे कारोबारी और उद्यमी होंगे, जिन्हें अब तक पर्याप्त या सस्ता कर्ज नहीं मिल पाता था।
रोजगार पर पड़ेगा सीधा असर
MSME मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर 2025 तक देश में करीब 6.90 करोड़ MSMEs पंजीकृत हैं। ये इकाइयां लगभग 30.16 करोड़ लोगों को रोजगार दे रही हैं। औसतन एक MSME से 4.37 लोगों को रोजगार मिलता है।

अगर 25.74 लाख नए MSMEs इस फंडिंग सिस्टम से जुड़ते हैं, तो इसके जरिए करीब 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा होने का अनुमान है। सरकार का मानना है कि यह फैसला केवल कर्ज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार सृजन और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से भी बेहद अहम साबित होगा।
SIDBI को क्यों चाहिए अतिरिक्त पूंजी
सरकार ने साफ किया है कि आने वाले वर्षों में SIDBI की भूमिका और ज्यादा बढ़ने वाली है। बैंक का फोकस अब सिर्फ पारंपरिक लोन तक सीमित नहीं रहेगा।
SIDBI का जोर डायरेक्टेड क्रेडिट, डिजिटल लेंडिंग, बिना गारंटी वाले लोन और स्टार्टअप्स के लिए वेंचर डेट जैसे नए प्रोडक्ट्स पर बढ़ेगा। ये सभी सेगमेंट ग्रोथ के लिहाज से तो मजबूत हैं, लेकिन इनमें रिस्क भी ज्यादा होता है।
इन गतिविधियों के बढ़ने से SIDBI की रिस्क-वेटेड एसेट्स (RWA) में तेज बढ़ोतरी होगी। ऐसे में बैंक को अपने कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो यानी CRAR को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखने के लिए अतिरिक्त इक्विटी की जरूरत थी।
CRAR और क्रेडिट रेटिंग होगी मजबूत
CRAR किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था की मजबूती का एक अहम पैमाना होता है। यह दिखाता है कि बैंक के पास संभावित जोखिमों को झेलने के लिए कितनी पूंजी उपलब्ध है।
सरकार के मुताबिक, इस ₹5,000 करोड़ की इक्विटी सहायता के बाद हाई स्ट्रेस सिचुएशन यानी खराब से खराब हालात में भी SIDBI का CRAR 10.50 प्रतिशत से ऊपर बना रहेगा।
मजबूत CRAR का सीधा असर SIDBI की क्रेडिट रेटिंग पर पड़ेगा। अच्छी क्रेडिट रेटिंग का मतलब है कि बैंक बाजार से कम ब्याज दर पर फंड जुटा सकेगा। इसका फायदा आखिरकार MSMEs को ही मिलेगा, जिन्हें सस्ते और प्रतिस्पर्धी दरों पर कर्ज उपलब्ध कराया जा सकेगा।
MSME सेक्टर को मिलेगी नई ताकत
सरकार का मानना है कि यह फैसला MSME सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। छोटे उद्योग, स्टार्टअप्स और नए उद्यमी अक्सर पूंजी की कमी से जूझते हैं। बैंक लोन महंगे होने या गारंटी की शर्तों की वजह से कई अच्छे बिजनेस आइडिया आगे नहीं बढ़ पाते।
SIDBI में अतिरिक्त इक्विटी आने से बैंक ज्यादा रिस्क लेने की स्थिति में होगा। इससे बिना गारंटी वाले लोन, डिजिटल लोन और स्टार्टअप फाइनेंसिंग जैसे क्षेत्रों में MSMEs को बेहतर मौके मिलेंगे।
आर्थिक ग्रोथ को मिलेगी रफ्तार
MSME सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह सेक्टर न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार देता है, बल्कि निर्यात, इनोवेशन और स्थानीय विकास में भी अहम भूमिका निभाता है।
सरकार का मानना है कि SIDBI को दिया गया यह इक्विटी सपोर्ट MSME सेक्टर को मजबूती देगा, जॉब जेनेरेशन बढ़ाएगा और समग्र आर्थिक ग्रोथ को नई रफ्तार देगा।









