मैसूरु दशहरा में कंबाला आयोजन का विरोध, प्रदर्शनकारियों ने सफाईकर्मियों के वेतन की मांग उठाई

मैसूरु के सतागल्ली में दशहरा के दौरान कंबाला आयोजन का विरोध हुआ। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने धन पौरकर्मिकों के वेतन और कल्याण पर खर्च करने की मांग की।

मैसूरु के सतागल्ली में दशहरा के दौरान प्रस्तावित कंबाला आयोजन का पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने सूखे और जल संकट का हवाला देते हुए आयोजन पर खर्च होने वाली राशि पौरकर्मिकों के वेतन और कल्याण पर लगाने की मांग की।

मैसूरु: कर्नाटक के मैसूरु में दशहरा उत्सव के दौरान कंबाला आयोजन की तैयारियों के बीच पर्यावरण कार्यकर्ताओं और कंबाला विरोधी समूहों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सतागल्ली इलाके में प्रस्तावित आयोजन का विरोध करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कंबाला पर सार्वजनिक संसाधन खर्च करने के बजाय शहर के सफाईकर्मियों के कल्याण और जरूरी नागरिक सेवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सतागल्ली में प्रदर्शन उस स्थान पर किया गया जहां कंबाला आयोजन की तैयारियां पहले से चल रही थीं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर प्रस्तावित दौड़ के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई और अधिकारियों से दशहरा के दौरान आयोजित किए जाने वाले कंबाला कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने कंबाला आयोजन को केवल सांस्कृतिक या मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रम के रूप में देखने के बजाय मौजूदा सामाजिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों के संदर्भ में विचार करने की अपील की। उनका कहना था कि राज्य में सूखे और पानी से जुड़ी समस्याओं के बीच ऐसे आयोजन पर खर्च होने वाले संसाधनों का इस्तेमाल आवश्यक क्षेत्रों में किया जाना चाहिए।

सतागल्ली में कंबाला के खिलाफ प्रदर्शन

मैसूरु में दशहरा के दौरान कंबाला आयोजित करने की योजना के खिलाफ पर्यावरण कार्यकर्ता सतागल्ली में एकत्र हुए। जिस स्थान पर आयोजन की तैयारियां चल रही थीं, वहीं प्रदर्शनकारियों ने अपनी आपत्ति जताई।

प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से मांग की कि दशहरा उत्सव के दौरान प्रस्तावित कंबाला को आगे नहीं बढ़ाया जाए। उनका तर्क था कि शहर और राज्य के सामने इस समय कई जरूरी सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियां हैं, इसलिए सार्वजनिक धन और संसाधनों की प्राथमिकता तय करते समय नागरिक कल्याण को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए।

कंबाला कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों से जुड़ी पारंपरिक भैंस दौड़ है और इसे राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ा जाता है। हालांकि, मैसूरु में दशहरा के दौरान इसके आयोजन को लेकर पर्यावरण समूहों ने अलग दृष्टिकोण रखा और इसे वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में उचित नहीं बताया।

सफाईकर्मियों के वेतन को प्राथमिकता देने की मांग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शहर के सफाईकर्मियों यानी पौरकर्मिकों के वेतन और कल्याण से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। उनका कहना था कि कंबाला आयोजन पर खर्च होने वाले धन को पौरकर्मिकों के वेतन में बढ़ोतरी और उनके कल्याण पर लगाया जाना चाहिए।

पौरकर्मिक शहर की स्वच्छता व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ये कर्मचारी रोजाना शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं और उनके काम तथा कल्याण को पर्याप्त प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं का तर्क था कि किसी उत्सव आयोजन पर संसाधन खर्च करने से पहले यह देखा जाना चाहिए कि शहर की बुनियादी नागरिक जरूरतों को पर्याप्त समर्थन मिल रहा है या नहीं।

उनके अनुसार, यदि कंबाला आयोजन के लिए निर्धारित राशि को सफाईकर्मियों के वेतन और कल्याण से जुड़े उपायों पर खर्च किया जाए, तो इसका सीधा लाभ शहर की आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को मिल सकता है।

सूखे और जल संकट का मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक में जारी सूखे और पानी से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि जब राज्य के कई हिस्से जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तब ऐसे आयोजन पर संसाधन खर्च करने की प्राथमिकता पर पुनर्विचार होना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में पानी और अन्य आवश्यक संसाधनों का इस्तेमाल प्राथमिक जरूरतों के लिए किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, उत्सव के दौरान होने वाले आयोजन ऐसे समय में अतिरिक्त संसाधनों की मांग कर सकते हैं, जब नागरिक जरूरतें पहले से ही महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा कंबाला आयोजन से संबंधित संसाधन खपत और राज्य की मौजूदा जल स्थिति के बीच जो संबंध बताया गया, वह उनके विरोध का तर्क है। उपलब्ध जानकारी में संबंधित अधिकारियों की ओर से इस आपत्ति पर विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल

कंबाला विरोधी अभियान में शामिल पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने आयोजन की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों में मैसूरु में दशहरा के दौरान कंबाला आयोजित करने की जरूरत नहीं है।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से आग्रह किया कि कार्यक्रम के लिए निर्धारित संसाधनों को आवश्यक नागरिक सेवाओं की ओर मोड़ा जाए। उन्होंने विशेष रूप से पौरकर्मिकों के वेतन और कल्याण को प्राथमिकता देने की मांग की।

पर्यावरण समूहों का कहना था कि शहर के विकास और सार्वजनिक खर्च से जुड़े फैसलों में पर्यावरणीय परिस्थितियों के साथ-साथ सामाजिक जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

दशहरा और कंबाला आयोजन को लेकर बहस

मैसूरु दशहरा कर्नाटक के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सवों में से एक है। ऐसे में उत्सव के दौरान किसी अतिरिक्त पारंपरिक खेल या कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा सकता है। लेकिन सतागल्ली में हुए विरोध ने इस तरह के आयोजन को लेकर संसाधनों और प्राथमिकताओं की बहस सामने ला दी है।

एक ओर कंबाला को पारंपरिक खेल और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है, वहीं दूसरी ओर विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल बुनियादी जरूरतों के लिए किया जाना चाहिए।

इस विवाद में पौरकर्मिकों की स्थिति, जल संकट और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए हैं।

अधिकारियों से आयोजन रद्द करने की मांग

सतागल्ली में प्रदर्शन कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं और कंबाला विरोधी अभियान से जुड़े लोगों ने अधिकारियों से दशहरा के दौरान प्रस्तावित कंबाला आयोजन को छोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम पर खर्च होने वाले संसाधनों को उन क्षेत्रों में लगाया जाना चाहिए जहां उनकी तत्काल जरूरत है।

प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से पौरकर्मिकों के वेतन में सुधार और उनके कल्याण के लिए धन इस्तेमाल करने की मांग रखी। उनका कहना था कि शहर को स्वच्छ रखने वाले कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना प्रशासन की प्राथमिकताओं में होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि सूखे और पानी से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन को संसाधनों के इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए।

आगे क्या होगा?

सतागल्ली में प्रदर्शन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मैसूरु प्रशासन और संबंधित अधिकारी कंबाला आयोजन को लेकर क्या फैसला लेते हैं। फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांग स्पष्ट कर दी है कि दशहरा के दौरान प्रस्तावित कंबाला को रद्द किया जाए।

इस विरोध ने मैसूरु दशहरा की तैयारियों के बीच सांस्कृतिक आयोजन, सार्वजनिक खर्च, पर्यावरणीय परिस्थितियों और नागरिक कर्मचारियों के कल्याण से जुड़ी बहस को सामने ला दिया है।

कंबाला आयोजन को लेकर अंतिम निर्णय प्रशासन और संबंधित आयोजकों के स्तर पर लिया जाना है। वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और कंबाला विरोधी समूहों की ओर से यह मांग जारी है कि आयोजन पर खर्च होने वाले संसाधनों को पौरकर्मिकों के वेतन, उनके कल्याण और अन्य आवश्यक नागरिक सेवाओं की ओर मोड़ा जाए।

Leave a comment