रेजीनगर में मतदान के दौरान गिरफ्तारी के एक दिन बाद हुमायूं कबीर ने राजनीति से दूरी बनाने के संकेत दिए। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम बहुल सीट पर बीजेपी जीतेगी। कबीर ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पद पर रहने तक विधानसभा नहीं जाने की बात कही।
मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल के रेजीनगर में मतदान के दौरान पुलिस के साथ टकराव के बाद गिरफ्तार किए गए एजेयूपी प्रमुख और नौदा विधायक हुमायूं कबीर ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को मीडिया के सामने भावुक होकर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा संकेत दिया। उन्होंने चुनावी राजनीति से जल्द दूरी बनाने की संभावना जताई और दावा किया कि मुर्शिदाबाद जिले की मुस्लिम बहुल रेजीनगर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जीत दर्ज करेगी।
हुमायूं कबीर का यह बयान मतदान के एक दिन बाद आया है। मतदान के दौरान उनके पार्टी कार्यालय के बाहर पुलिस के साथ तीखी झड़प हुई थी, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। करीब 12 घंटे हिरासत में रहने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
अभियान के दौरान कई विवादों में घिरे रहे हुमायूं कबीर ने अपने राजनीतिक रुख को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पद पर बने रहेंगे, तब तक वह विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे। साथ ही उन्होंने नौदा के लोगों से अपने इस फैसले के लिए माफी भी मांगी।
मतदान के बाद भावुक हुए हुमायूं कबीर
रेजीनगर में मतदान के दौरान हुई घटना के बाद बुधवार को हुमायूं कबीर मीडिया के सामने भावुक हो गए। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर और मौजूदा परिस्थितियों को लेकर बात की और चुनावी राजनीति छोड़ने की संभावना का संकेत दिया।
हालांकि, उन्होंने तत्काल और औपचारिक रूप से राजनीति से इस्तीफा देने की घोषणा नहीं की। उनके बयान से इतना संकेत मिला कि वह मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से निराश हैं और भविष्य में चुनावी राजनीति से खुद को अलग कर सकते हैं।
उनके भावुक बयान ने रेजीनगर में मतदान के दौरान हुई घटनाओं को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। मतदान के दौरान पुलिस और हुमायूं कबीर के समर्थकों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
करीब 12 घंटे हिरासत में रहे विधायक
मतदान के दौरान पार्टी कार्यालय के बाहर पुलिस के साथ हुए टकराव के बाद हुमायूं कबीर को गिरफ्तार किया गया था। वह करीब 12 घंटे पुलिस हिरासत में रहे और इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
उनकी गिरफ्तारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर कानून-व्यवस्था, चुनावी तनाव और राजनीतिक दलों तथा प्रशासन के बीच टकराव जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया।
रेजीनगर में मतदान पहले से ही हाई-वोल्टेज राजनीतिक मुकाबले के कारण चर्चा में था। ऐसे में मतदान के दिन हुई झड़प और उसके बाद विधायक की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया।
मुस्लिम बहुल सीट पर बीजेपी की जीत का दावा
हुमायूं कबीर ने रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी नतीजे को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि मुर्शिदाबाद जिले की मुस्लिम बहुल रेजीनगर सीट पर बीजेपी जीत हासिल करेगी।
यह दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रेजीनगर में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी है और पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुर्शिदाबाद जिले को लंबे समय से महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है।
हालांकि, हुमायूं कबीर का बीजेपी की जीत को लेकर किया गया दावा उनका राजनीतिक आकलन है। मतदान के बाद वास्तविक परिणाम चुनावी नतीजे घोषित होने पर ही स्पष्ट होंगे।
उनके बयान से यह भी संकेत मिलता है कि स्थानीय चुनावी समीकरणों को लेकर उनके आकलन में बड़ा बदलाव आया है। मतदान से पहले क्षेत्र में विभिन्न दलों के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा था।
विधानसभा से दूरी बनाने की घोषणा
हुमायूं कबीर ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पद पर बने रहेंगे, तब तक वह विधानसभा में उपस्थित नहीं होंगे। उन्होंने अपने इस फैसले के लिए नौदा विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं से माफी भी मांगी।
एक निर्वाचित विधायक के तौर पर उनका यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। विधानसभा की कार्यवाही से दूरी बनाने का फैसला उनके समर्थकों और मतदाताओं के बीच भी चर्चा का विषय बन सकता है।
उन्होंने अपने फैसले के लिए क्षेत्र की जनता से माफी मांगते हुए संकेत दिया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में वह खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
अभियान के दौरान विवादों में रहे कबीर
हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान कई विवादों के केंद्र में रहे। रेजीनगर में मतदान के दौरान पुलिस के साथ उनका टकराव इसी सिलसिले की एक प्रमुख घटना रही।
उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों और राजनीतिक विरोधियों के बीच भी इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस और हुमायूं कबीर के बीच टकराव के सभी कारणों का विस्तृत आधिकारिक पक्ष शामिल नहीं है।
ऐसे में घटना से जुड़े आरोपों और दावों को संबंधित पक्षों के बयानों के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयान के मायने
हुमायूं कबीर का ताजा बयान पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में कई स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा सकता है। एक तरफ उन्होंने चुनावी राजनीति से दूरी बनाने का संकेत दिया है, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम बहुल सीट पर बीजेपी की संभावित जीत का दावा किया है।
मुर्शिदाबाद लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति का महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। यहां चुनावी परिणामों पर समुदाय आधारित मतदान, स्थानीय राजनीतिक समीकरण और विभिन्न दलों की संगठनात्मक ताकत का असर पड़ता है।
रेजीनगर में मतदान के दौरान हुई घटना और उसके बाद हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान तनाव और राजनीतिक टकराव के सवाल भी उठाए हैं।
कबीर के राजनीतिक भविष्य पर नजर
हुमायूं कबीर के बुधवार के बयान से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने चुनावी राजनीति से अलग होने की अंतिम घोषणा नहीं की है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि वह वास्तव में सक्रिय राजनीति छोड़ेंगे या मौजूदा परिस्थितियों के कारण केवल अपनी निराशा व्यक्त कर रहे हैं।
उनका विधानसभा में नहीं जाने का बयान भी आगे की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अब यह देखना होगा कि वह अपने इस फैसले पर कितने समय तक कायम रहते हैं और एजेयूपी की राजनीतिक रणनीति क्या रहती है।
रेजीनगर में बीजेपी की जीत को लेकर उनका दावा भी चुनाव परिणाम आने के बाद ही परखा जाएगा। फिलहाल उनके बयान ने मतदान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीतिक चर्चा को एक नया मोड़ दे दिया है।
रेजीनगर में पुलिस के साथ टकराव, गिरफ्तारी, करीब 12 घंटे की हिरासत, राजनीति छोड़ने के संकेत और बीजेपी की जीत के दावे—इन सभी घटनाक्रमों ने हुमायूं कबीर को एक बार फिर पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति के केंद्र में ला दिया है।











