नालंदा। बिहार के नालंदा जिले से मानव तस्करी और शोषण से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां नौकरी दिलाने का झांसा देकर 13 लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा ग्रुप में काम करने के लिए मजबूर किया गया। इनमें कुछ नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में सभी लड़कियों को रेस्क्यू किया गया।
रेस्क्यू के बाद एक नाबालिग ने आरोप लगाया कि उन्हें बेहतर नौकरी और अच्छे वेतन का लालच देकर बुलाया गया था। शुरुआत में कहा गया कि उन्हें होटल या इवेंट मैनेजमेंट में काम मिलेगा, लेकिन बाद में उन्हें ऑर्केस्ट्रा टीम के साथ कार्यक्रमों में भेजा जाने लगा। उसने बताया कि जो लड़की भागने की कोशिश करती थी, उसके साथ बुरा व्यवहार किया जाता था और धमकाया जाता था।
लड़कियों के अनुसार, उन्हें बाहरी जिलों और राज्यों में कार्यक्रमों के लिए ले जाया जाता था। वहां देर रात तक काम कराया जाता था और उनकी आवाजाही पर भी निगरानी रखी जाती थी। कई बार मोबाइल फोन तक छीन लिए जाते थे ताकि वे परिवार से संपर्क न कर सकें।
परिजनों को जब काफी समय तक बेटियों की सही जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस को ऑर्केस्ट्रा संचालकों पर शक हुआ। इसके बाद छापेमारी कर 13 लड़कियों को सुरक्षित निकाला गया।
प्रशासन ने बताया कि सभी लड़कियों की काउंसलिंग कराई जा रही है और मेडिकल जांच भी कराई गई है। बाल संरक्षण इकाई और महिला विकास निगम की टीम भी इस मामले में सक्रिय है। जिन लड़कियों की उम्र कम पाई गई है, उनके मामले में बाल संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस ने ऑर्केस्ट्रा संचालक और उससे जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला मानव तस्करी और जबरन श्रम से जुड़ा हो सकता है, इसलिए सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ग्रामीण इलाकों की गरीब लड़कियों को नौकरी और बेहतर जीवन का सपना दिखाकर इस तरह जाल में फंसाया जाता है। उन्होंने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
फिलहाल सभी 13 लड़कियां सुरक्षित हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और पीड़िताओं को पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि रोजगार के नाम पर चल रहे फर्जी नेटवर्क पर निगरानी कितनी जरूरी है।











