नई स्टडी में दावा किया गया है कि NASA के Artemis मिशन के दौरान रॉकेट से निकलने वाली गैसें चंद्रमा के ध्रुवों पर मौजूद अरबों साल पुरानी बर्फ को दूषित कर सकती हैं। इससे शुरुआती सौर मंडल और जीवन की उत्पत्ति से जुड़े अहम वैज्ञानिक प्रमाण प्रभावित हो सकते हैं।
अमेरिका: NASA के Artemis मिशन को लेकर सामने आई एक नई स्टडी में चेतावनी दी गई है कि भविष्य के मानवयुक्त चंद्र मिशनों से निकलने वाला रॉकेट एग्जॉस्ट चंद्रमा के ध्रुवों पर मौजूद प्राचीन बर्फ को प्रदूषित कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे अरबों वर्षों से सुरक्षित रासायनिक प्रमाण नष्ट होने का खतरा बढ़ सकता है।
प्राचीन बर्फ पर पड़ सकता है भविष्य के मिशनों का असर
नई स्टडी के अनुसार, NASA के Artemis कार्यक्रम के तहत भविष्य में होने वाली मानवयुक्त चंद्र यात्राएं अनजाने में चंद्रमा की उन बर्फीली परतों को प्रभावित कर सकती हैं, जो अरबों वर्षों से लगभग बिना किसी बदलाव के सुरक्षित हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा के दक्षिणी और उत्तरी ध्रुवों के स्थायी रूप से छायादार गड्ढों (Permanently Shadowed Regions) में मौजूद बर्फ सौर मंडल के शुरुआती दौर का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड अपने भीतर संजोए हुए है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन बर्फीले क्षेत्रों में धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों के जरिए पहुंचे ऐसे कार्बनिक अणु मौजूद हो सकते हैं, जिन्हें जीवन की उत्पत्ति के शुरुआती तत्वों के रूप में देखा जाता है। पृथ्वी पर भूगर्भीय गतिविधियों और कटाव के कारण ऐसे कई पुराने रासायनिक प्रमाण नष्ट हो चुके हैं, जबकि चंद्रमा पर वे अब भी सुरक्षित हैं।
रॉकेट से निकलने वाली मीथेन बन सकती है खतरा
अध्ययन में कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए यह पता लगाया गया कि चंद्रमा पर उतरने वाले लैंडर से निकलने वाली मीथेन गैस तेजी से पूरी सतह पर फैल सकती है। चंद्रमा पर वातावरण (Atmosphere) लगभग नहीं होने के कारण गैस हवा में घुलने के बजाय सतह पर उछलते हुए लंबी दूरी तक पहुंच सकती है।
शोध के अनुसार, यदि दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग होती है, तो मीथेन दो चंद्र दिनों से भी कम समय में उत्तरी ध्रुव तक पहुंच सकती है। लगभग एक चंद्र सप्ताह के भीतर इस गैस का बड़ा हिस्सा उन स्थायी छायादार क्षेत्रों में जमा हो सकता है, जहां वैज्ञानिक भविष्य में बर्फ के नमूनों का अध्ययन करने की योजना बना रहे हैं।
भविष्य के शोध के लिए बढ़ी नई चुनौती
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इन बर्फीले क्षेत्रों में रॉकेट एग्जॉस्ट से निकले रसायन मिल जाते हैं, तो मूल प्राकृतिक नमूनों और मानव गतिविधियों से पैदा हुए प्रदूषण के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। इससे चंद्रमा पर मौजूद प्राचीन रासायनिक इतिहास और जीवन की उत्पत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रमाण प्रभावित होने की आशंका है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि Artemis जैसे भविष्य के मिशनों की योजना बनाते समय ऐसे उपायों पर विचार करना जरूरी होगा, जिनसे चंद्रमा के संवेदनशील क्षेत्रों को यथासंभव सुरक्षित रखा जा सके। इससे आने वाले वर्षों में होने वाले वैज्ञानिक अनुसंधान अधिक सटीक और विश्वसनीय परिणाम दे सकेंगे।








