NCLT ने अनिल अंबानी की RCIL का रिजॉल्यूशन प्लान लागू करने से रोका, ₹16.95 करोड़ की फंड कमी

NCLT मुंबई बेंच ने RCIL के रिजॉल्यूशन प्लान को रोका। क्रेडिटर्स को ₹318.67 करोड़ देने हैं, जबकि ₹301.72 करोड़ उपलब्ध हैं, जिससे ₹16.95 करोड़ की कमी है।

NCLT की मुंबई बेंच ने 21 अगस्त 2026 को RCIL के रिजॉल्यूशन प्लान को मौजूदा रूप में लागू करने योग्य नहीं माना। भुगतान के लिए ₹318.67 करोड़ की जरूरत है, जबकि उपलब्ध राशि ₹301.72 करोड़ है।

नई दिल्ली: NCLT मुंबई बेंच ने अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस इंफ्रास्ट्रक्चर के रिजॉल्यूशन प्लान पर अहम फैसला दिया है। 21 अगस्त 2026 के आदेश में ट्रिब्यूनल ने फंड की कमी के चलते योजना को मौजूदा रूप में लागू करने लायक नहीं माना। असहमति रखने वाले फाइनेंशियल क्रेडिटर्स को करीब ₹318.67 करोड़ का भुगतान करना है, जबकि उपलब्ध राशि ₹301.72 करोड़ है।

अनिल अंबानी की RCIL को NCLT से झटका

अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस इंफ्रास्ट्रक्चर (RCIL) को NCLT की मुंबई बेंच से बड़ा झटका लगा है। 21 अगस्त 2026 के आदेश में ट्रिब्यूनल ने कंपनी के रिजॉल्यूशन प्लान को मौजूदा रूप में लागू करने योग्य नहीं माना। प्लान के तहत असहमति रखने वाले फाइनेंशियल क्रेडिटर्स को करीब ₹318.67 करोड़ का भुगतान किया जाना है, जबकि उपलब्ध फंड ₹301.72 करोड़ है। इससे ₹16.95 करोड़ की कमी रह गई है।

भुगतान के लिए ₹16.95 करोड़ की कमी

कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, असहमति रखने वाले फाइनेंशियल क्रेडिटर्स (DFCs) को प्राथमिकता के आधार पर करीब ₹318.67 करोड़ का भुगतान किया जाना है।

इसके मुकाबले रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) के पास उपलब्ध लिक्विड फंड और सफल रिजॉल्यूशन आवेदक (SRA) की ओर से मिलने वाली अतिरिक्त राशि को मिलाकर कुल ₹301.72 करोड़ ही जुटाए जा सकते हैं। इस तरह जरूरी भुगतान और उपलब्ध रकम के बीच करीब ₹16.95 करोड़ का अंतर रह जाता है।

यही फंडिंग गैप रिजॉल्यूशन प्लान को मौजूदा रूप में लागू करने में मुख्य बाधा बना है।

अब CoC तय करेगी आगे की रणनीति

NCLT ने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को 30 दिनों के भीतर क्रेडिटर्स की समिति (CoC) की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। इस बैठक में CoC अपनी व्यावसायिक समझ के आधार पर आगे की प्रक्रिया पर फैसला करेगी।

CoC यह तय कर सकती है कि मौजूदा रिजॉल्यूशन प्लान के साथ किस तरह आगे बढ़ा जाए या उसमें किन बदलावों की जरूरत है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

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