भारत ने ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के बीच लेजर हथियारों पर काम तेज कर दिया है। DURGA-II और Mk-II(A) जैसे हाई-पावर लेजर सिस्टम छोटे और झुंड में आने वाले ड्रोन को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर सकते हैं। इस तकनीक से महंगी मिसाइलों की जरूरत कम होगी और देश की सुरक्षा मजबूत होगी।
DRDO Laser Weapon: भारत ने ड्रोन हमलों के खतरे को कम करने के लिए DURGA-II और Mk-II(A) लेजर सिस्टम विकसित किए हैं। ये हथियार जमीन, समुद्र और हवा में तैनात किए जा सकते हैं और छोटे या झुंड में आने वाले ड्रोन को तेजी से निष्क्रिय कर सकते हैं। इस नई टेक्नोलॉजी से रक्षा खर्च कम होगा और सुरक्षा ज्यादा प्रभावी बनेगी। यह कदम देश की आधुनिक युद्ध रणनीति को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
ड्रोन खतरे के सामने क्यों बदल रही रणनीति?
पश्चिम एशिया में हालिया संघर्षों ने दिखाया है कि कम लागत वाले ड्रोन भी बड़ी सैन्य ताकतों को चुनौती दे सकते हैं। एक साथ कई ड्रोन के हमले पारंपरिक रक्षा प्रणालियों को कमजोर कर देते हैं।
ऐसे हमलों से निपटने के लिए महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल करना व्यावहारिक नहीं है। यही वजह है कि भारत समेत कई देश अब ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जो कम खर्च में ज्यादा प्रभावी हो।
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लेजर हथियार कैसे करते हैं काम?
लेजर हथियार गोलियों या मिसाइल की जगह हाई-एनर्जी बीम का इस्तेमाल करते हैं। यह बीम सीधे लक्ष्य पर पड़कर उसे गर्म करती है और कुछ ही सेकंड में ड्रोन के अहम हिस्सों को नुकसान पहुंचा देती है।
इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें बार-बार गोला-बारूद की जरूरत नहीं होती। केवल ऊर्जा की सप्लाई से यह लगातार काम कर सकता है, जिससे ऑपरेशन की लागत काफी कम हो जाती है।
DURGA-II और Mk-II(A)
भारत का DURGA-II प्रोजेक्ट एक हाई-पावर लेजर सिस्टम है, जिसे जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्म पर तैनात किया जा सकता है। यह बड़े खतरों से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है और भविष्य में रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा।
वहीं Mk-II(A) लेजर सिस्टम खासतौर पर छोटे ड्रोन और स्वार्म अटैक को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। हालिया परीक्षणों में इसने कई ड्रोन को ट्रैक कर उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता दिखाई है, जो भारत की तकनीकी प्रगति का संकेत है।









