नेपाल की नई सरकार के गठन के कुछ ही हफ्तों के भीतर प्रधानमंत्री Balen Shah के सामने राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियों का जटिल दौर शुरू हो गया है। तीन सप्ताह के भीतर दो मंत्रियों के इस्तीफे, बढ़ता ऊर्जा संकट और वैश्विक शक्तियों की सक्रियता ने नेपाल की राजनीति को अंतरराष्ट्रीय फोकस में ला दिया है।
काठमांडू: नेपाल की राजनीति में नई सरकार बनने के बाद अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। प्रधानमंत्री बालेन शाह को पद संभाले अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन उन्हें शुरुआती दौर में ही अपने दो मंत्रियों को कैबिनेट से हटाना पड़ा है। इससे उनकी सरकार की स्थिरता और आंतरिक संतुलन पर सवाल उठने लगे हैं।
इसी बीच वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालातों के कारण ऊर्जा संकट भी गहराता दिख रहा है, जिसका असर नेपाल जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है। इस स्थिति में बालेन शाह के सामने घरेलू चुनौतियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ गया है।
शुरुआती दौर में ही राजनीतिक झटके
प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इस दौरान दो मंत्रियों को कैबिनेट से हटाना पड़ा। इससे सरकार की स्थिरता और नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम शाह के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं का असर नेपाल जैसे आयात-निर्भर देश पर भी पड़ रहा है। ऊर्जा संकट ने सरकार के सामने आर्थिक प्रबंधन की चुनौती को और बढ़ा दिया है। नेपाल की अर्थव्यवस्था पहले से ही बाहरी कारकों पर निर्भर रही है, ऐसे में वैश्विक अस्थिरता का असर सीधे देश की नीतियों और विकास योजनाओं पर पड़ सकता है।
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काठमांडू में तीन महाशक्तियों की सक्रियता
नेपाल की विदेश नीति को लेकर इस समय India, China और United States तीनों की दिलचस्पी बढ़ गई है। हाल के दिनों में अमेरिकी प्रतिनिधि काठमांडू पहुंचे, वहीं चीन के वरिष्ठ अधिकारी भी स्थिति पर नजर रखने के लिए सक्रिय हो गए। इस कूटनीतिक हलचल ने साफ कर दिया है कि नेपाल अब क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीति का भी अहम हिस्सा बन चुका है।
इसी बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह को भारत की आधिकारिक यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है। परंपरा के अनुसार यह उनकी पहली विदेश यात्रा होगी, जिसमें उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री Narendra Modi से होने की संभावना है। यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। शाह का भारत से व्यक्तिगत जुड़ाव भी रहा है, क्योंकि उन्होंने बेंगलुरु से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।
चीन-अमेरिका-भारत के बीच संतुलन की चुनौती
नेपाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती तीनों महाशक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखना है। अमेरिका नेपाल में अपने रणनीतिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना चाहता है, जबकि चीन तिब्बत और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर संवेदनशील है। दूसरी ओर, भारत नेपाल को अपने पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र के रूप में देखता है और कनेक्टिविटी, ऊर्जा और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है। ऐसे में बालेन शाह की विदेश नीति यह तय करेगी कि नेपाल किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल अब पुराने राजनीतिक ढांचे से आगे बढ़ चुका है। बालेन शाह जैसे नए नेता से उम्मीद की जा रही है कि वे देशहित को प्राथमिकता देते हुए संतुलित और व्यावहारिक विदेश नीति अपनाएंगे।









