नेतन्याहू का बड़ा आरोप, 7 अक्टूबर हमले की सुबह सुरक्षा अधिकारियों ने जानबूझकर नहीं जगाया

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि 7 अक्टूबर 2023 को सुरक्षा अधिकारियों ने जानबूझकर उन्हें नहीं जगाया। उनके दावे पर राजनीतिक विवाद बढ़ा

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले की सुबह सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें जानबूझकर नहीं जगाया। उनकी पत्नी सारा के विपक्षी नेता यायर गोलान पर लगाए आरोपों के बाद इजराइल में राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।

तेल अवीव: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले को लेकर एक बार फिर सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को एक लाइव इंस्टाग्राम इंटरव्यू में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि हमले की सुबह सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें जानबूझकर नहीं जगाया। उनका कहना है कि यदि उन्हें समय रहते जानकारी दी जाती, तो वह तत्काल सेना को हाई अलर्ट पर कर सकते थे और गाजा सीमा से लगे इजराइली कस्बों को भी सतर्क किया जा सकता था।

नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलता को लेकर इजराइल में राजनीतिक और सार्वजनिक बहस लगातार जारी है। इस हमले के लिए जिम्मेदारी तय करने का सवाल प्रधानमंत्री और सुरक्षा प्रतिष्ठान के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

नेतन्याहू ने सुरक्षा अधिकारियों पर लगाया गंभीर आरोप

नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें जगाने से बचने का फैसला कथित तौर पर जानबूझकर किया गया था। उनके अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों को पता था कि यदि उन्हें हमले की गंभीरता के बारे में पहले जानकारी मिलती, तो वह सेना को तत्काल व्यापक स्तर पर अलर्ट करने का आदेश देते।

प्रधानमंत्री ने यह भी दावा किया कि इस जानकारी को लंबे समय तक जनता से छिपाया गया। उनका कहना है कि हमले से पहले उपलब्ध संकेतों के बावजूद सुरक्षा तंत्र ने स्थिति का सही आकलन नहीं किया।

नेतन्याहू पहले भी यह कह चुके हैं कि 7 अक्टूबर की सुबह उन्हें समय पर नहीं जगाया गया था। हालांकि, उनके हालिया बयानों में यह दावा अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया है कि ऐसा केवल गलती या गलत आकलन के कारण नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया।

सैन्य नेतृत्व और शिन बेट के पूर्व प्रमुख पर निशाना

नेतन्याहू ने सोमवार को प्रकाशित एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में भी तत्कालीन सैन्य नेतृत्व और उस समय शिन बेट के प्रमुख रहे रोनेन बार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उन्हें जगाने से इसलिए परहेज किया क्योंकि वे हमास के खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई से पैदा होने वाली संभावित स्थिति को लेकर चिंतित थे।

प्रधानमंत्री का दावा है कि सुरक्षा अधिकारियों को हमास की ओर से हमले की संभावना का अंदाजा नहीं था, लेकिन उन्हें यह पता था कि अगर उन्हें जानकारी मिलती तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी।

हालांकि, इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से साबित करने वाली कोई नई जानकारी इन बयानों के साथ पेश नहीं की गई है। इसलिए नेतन्याहू के दावों को फिलहाल उनके राजनीतिक और सार्वजनिक बयानों के रूप में ही देखा जा रहा है।

सारा नेतन्याहू के बयान से भी बढ़ा विवाद

प्रधानमंत्री के ताजा आरोपों से पहले उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने भी एक टीवी इंटरव्यू में विपक्षी नेता यायर गोलान को लेकर विवादित दावा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गोलान को 7 अक्टूबर के हमले की योजना के बारे में पहले से जानकारी थी।

सारा नेतन्याहू ने दावा किया कि हमले की सुबह गोलान पहले से तैयार थे, जबकि देश के अन्य लोगों और यहां तक कि प्रधानमंत्री को भी घटना की जानकारी नहीं थी। यह इंटरव्यू इजराइल के चैनल 14 पर प्रसारित हुआ, जिसे सरकार के करीब माना जाता है।

उनके बयान के बाद विपक्षी दलों और गोलान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। गोलान ने आरोप को षड्यंत्र फैलाने की कोशिश बताया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।

यायर गोलान ने दी मुकदमे की धमकी

यायर गोलान, जो इजराइली सेना के पूर्व डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं, ने सारा नेतन्याहू को कानूनी नोटिस की चेतावनी दी। उन्होंने कथित आरोप वापस लेने और माफी मांगने की मांग की।

गोलान के अनुसार, 7 अक्टूबर की सुबह जैसे ही हमास के हमले की जानकारी मिली, वह दक्षिणी इजराइल पहुंचे थे। उन्होंने नोवा म्यूजिक फेस्टिवल के आसपास फंसे लोगों को बचाने में मदद की थी। इस हमले में उस आयोजन स्थल और उसके आसपास बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।

गोलान ने कहा कि उनकी भूमिका को संदेह की नजर से देखने की कोशिश 7 अक्टूबर की घटनाओं की वास्तविकता को बदलने का प्रयास है। उनकी पार्टी ने भी सारा नेतन्याहू के बयान की कड़ी आलोचना की।

नेतन्याहू का बड़ा आरोप, 7 अक्टूबर हमले की सुबह सुरक्षा अधिकारियों ने जानबूझकर नहीं जगाया

विपक्ष ने नेतन्याहू पर साधा निशाना

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और उनके समर्थक 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलता की जिम्मेदारी से बचने के लिए वैकल्पिक दावे सामने ला रहे हैं।

पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट ने भी इस तरह के आरोपों को लेकर चिंता जताई। वह आगामी चुनाव में नेतन्याहू के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों में माने जा रहे हैं।

इजराइल में यह सवाल लंबे समय से उठ रहा है कि हमास इतने बड़े हमले की तैयारी करने में कैसे सफल हुआ और सुरक्षा एजेंसियों को उपलब्ध संभावित संकेतों के बावजूद इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। नेतन्याहू और सुरक्षा प्रतिष्ठान की जिम्मेदारी को लेकर बहस इसी वजह से राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

7 अक्टूबर की घटना को लेकर इजराइल में गहरी राजनीतिक बहस

हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले को इजराइल के इतिहास के सबसे घातक दिनों में गिना जाता है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर हमले में 1,221 लोगों की मौत हुई थी और 251 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया था।

हमले के बाद इजराइल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध में अब तक 73,462 से अधिक लोगों की मौत हुई है। यह मंत्रालय हमास-नियंत्रित प्रशासन के अधीन काम करता है और संयुक्त राष्ट्र इन आंकड़ों को व्यापक रूप से विश्वसनीय मानता है।

इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया और इजराइल की सुरक्षा नीति, सैन्य रणनीति तथा राजनीतिक नेतृत्व को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस तेज हुई।

बड़ी संख्या में लोग मानते हैं आंतरिक विश्वासघात हुआ

7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलता को लेकर इजराइल के भीतर साजिश संबंधी दावे भी चर्चा में हैं। अगस्त में चैनल 13 के लिए किए गए एक सर्वेक्षण में 40 प्रतिशत इजराइलियों ने माना कि हमले के पीछे किसी तरह का आंतरिक विश्वासघात था। मौजूदा दक्षिणपंथी गठबंधन के समर्थकों में यह आंकड़ा 63 प्रतिशत बताया गया।

हालांकि, किसी आंतरिक विश्वासघात के दावे को स्थापित तथ्य के तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है। सुरक्षा विफलता के वास्तविक कारणों को लेकर जांच, राजनीतिक बहस और सार्वजनिक चर्चा जारी है।

चुनाव से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी

नेतन्याहू के ताजा बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब इजराइल में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलता चुनावी राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।

प्रधानमंत्री जहां सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं विपक्षी नेता सरकार और राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में 7 अक्टूबर की घटनाओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप आने वाले महीनों में और तेज होने की संभावना है।

नेतन्याहू के लिए चुनौती यह है कि उन्हें एक ओर युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों का बचाव करना है, वहीं दूसरी ओर हमले से पहले हुई सुरक्षा चूक की जिम्मेदारी को लेकर उठ रहे सवालों का सामना भी करना पड़ रहा है। फिलहाल प्रधानमंत्री के नए आरोपों ने 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलता को एक बार फिर इजराइल की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में जांच, राजनीतिक बहस और चुनावी अभियान इस मुद्दे को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकते हैं।

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