न्यूयॉर्क के स्कूलों में AI पर रोक क्यों? 8वीं तक के छात्रों के लिए बदली गई नीति

New York City Schools ने 2026-27 में 2-K से 8वीं तक छात्रों के लिए generative AI पर रोक लगाई है। हाई स्कूल में supervised AI access मिलेगा।

New York City ने 2026-27 academic year में 2-K से 8वीं कक्षा तक students के लिए generative AI पर रोक लगाई है। सरकार का फोकस बच्चों की critical thinking, human interaction और सुरक्षित technology use पर है।

New York City Schools AI Policy: New York City Public Schools ने 2026-27 session के लिए student-facing generative AI पर नई policy लागू की है। इसके तहत 2-K से 8वीं कक्षा तक AI tools पर moratorium रहेगा, जबकि high school students को सीमित और supervised access मिलेगा। यह फैसला बच्चों की learning, critical thinking और technology पर उनकी dependency को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच लिया गया है।

8वीं तक AI के इस्तेमाल पर क्यों लगी रोक?

न्यूयॉर्क पब्लिक स्कूलों ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र में छात्रों के लिए जनरेटिव AI के इस्तेमाल को लेकर बड़ा बदलाव किया है। नई नीति के तहत 2-K से 8वीं कक्षा तक के छात्र ऐसे AI उपकरणों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे, जो उनके साथ सीधे संवाद करते हैं। इनमें AI चैटबॉट और AI ट्यूटर जैसे उपकरण शामिल हैं।

न्यूयॉर्क के स्कूलों में AI पर रोक क्यों? 8वीं तक के छात्रों के लिए बदली गई नीति

स्कूल प्रशासन का मानना है कि कम उम्र के बच्चों की पढ़ाई में शिक्षक और अन्य लोगों के साथ संवाद के अलावा पढ़ना, लिखना, तर्क करना और व्यावहारिक गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। शुरुआती कक्षाओं में AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता बच्चों की खुद सोचने और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

इसी वजह से छोटे छात्रों के लिए तकनीक के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा सख्त नियम बनाए गए हैं। इसका उद्देश्य AI को शिक्षा से पूरी तरह अलग करना नहीं, बल्कि छात्रों की उम्र और सीखने की जरूरतों के अनुसार इसके इस्तेमाल को नियंत्रित करना है।

हाईस्कूल छात्रों को सीमित AI इस्तेमाल की अनुमति

नई नीति के तहत 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए जनरेटिव AI पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई है। उन्हें स्वीकृत और जांचे गए AI कार्यक्रमों के जरिए सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। यह उपयोग शिक्षकों की निगरानी और तय शैक्षणिक उद्देश्यों के तहत होगा।

हाईस्कूल छात्रों को AI की समझ विकसित करने के लिए साल में दो बार 45-45 मिनट के AI साक्षरता सत्र भी पूरे करने होंगे। इन सत्रों में छात्रों को AI के काम करने के तरीके के साथ डेटा गोपनीयता, पक्षपात, नैतिक चुनौतियों और इससे जुड़े संभावित जोखिमों की जानकारी दी जाएगी।

इनमें भविष्य के रोजगार और करियर पर AI के संभावित प्रभाव को भी समझाया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को AI के फायदे और सीमाओं की जानकारी देना है, ताकि वे तकनीक का इस्तेमाल अधिक जिम्मेदारी से कर सकें।

हाईस्कूल स्तर पर पांच सीमित AI पायलट कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इनमें Quill, Edia, Brisk Teaching, Playlab और Intel AI-Ready Schools शामिल हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल शिक्षकों की निगरानी में और तय शैक्षणिक लक्ष्यों के अनुसार किया जाएगा।

AI के साथ स्क्रीन टाइम पर भी नियंत्रण

न्यूयॉर्क की नई नीति केवल AI तक सीमित नहीं है। इसमें कक्षा में व्यक्तिगत स्क्रीन के इस्तेमाल को लेकर भी दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। 2-K से दूसरी कक्षा तक एक छात्र के लिए एक स्क्रीन वाले इस्तेमाल की व्यवस्था नहीं रखी गई है।

तीसरी से पांचवीं कक्षा के छात्रों के लिए प्रतिदिन 30 मिनट तक व्यक्तिगत स्क्रीन इस्तेमाल की सिफारिश की गई है। वहीं छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए यह अवधि 45 मिनट तक रखी गई है।

हालांकि सहायक तकनीक को इन प्रतिबंधों से अलग रखा गया है। दिव्यांग छात्रों, अंग्रेजी भाषा सीखने वाले छात्रों और कुछ करियर-तैयारी कार्यक्रमों में शामिल छात्रों को उनकी जरूरत के अनुसार आवश्यक तकनीकी सुविधाएं मिलती रहेंगी।

शिक्षकों के लिए AI इस्तेमाल पर पूरी रोक नहीं

नई नीति में शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों के लिए AI का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया गया है। वे पाठ योजना तैयार करने और कुछ प्रशासनिक कार्यों में AI उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

हालांकि छात्रों की ग्रेडिंग, व्यवहार की निगरानी और उनके प्लेसमेंट, अगली कक्षा में भेजने या स्नातक करने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में AI का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इन मामलों में मानवीय निर्णय को प्राथमिकता दी गई है।

न्यूयॉर्क पब्लिक स्कूलों के अनुसार छात्रों को उपलब्ध कराने से पहले किसी भी तकनीकी उपकरण की डेटा गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़े मानकों के आधार पर समीक्षा की जाएगी। स्कूल प्रशासन 2026-27 सत्र के दौरान इस नीति के प्रभाव का आकलन करेगा और उसके आधार पर भविष्य की तकनीकी नीति को लेकर सुझाव तैयार किए जाएंगे।

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