BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने जन्माष्टमी पर दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित ISKCON मंदिर में पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से देशवासियों की शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान हर्ष मल्होत्रा, तरुण चुघ और बांसुरी स्वराज भी मौजूद रहे।
नई दिल्ली: BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित ISKCON मंदिर में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया और देशवासियों के लिए शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। इस दौरान उनके साथ कई BJP नेता और भगवान श्रीकृष्ण के श्रद्धालु भी मौजूद रहे।
पूजा के बाद नबीन ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेशों को धर्म, कर्तव्य और अधर्म के खिलाफ संघर्ष से जोड़ते हुए लोगों से उनके बताए मार्ग पर चलने की अपील की।
BJP नेताओं के साथ मंदिर पहुंचे नितिन नबीन
जन्माष्टमी के अवसर पर नितिन नबीन के साथ दिल्ली BJP अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, राज्यसभा सांसद तरुण चुघ और लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज भी ISKCON मंदिर पहुंचे।
सभी नेताओं ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और देश के नागरिकों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर भक्तिमय माहौल था और बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे थे।
नबीन ने मंदिर में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में जन्माष्टमी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर अपनी बात रखी।
‘भगवान कृष्ण ने धर्म की स्थापना के लिए जीवन समर्पित किया’
नितिन नबीन ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण श्रद्धालुओं के लिए पूजनीय देवता होने के साथ भारत की सनातन परंपरा और संस्कृति के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपना पूरा जीवन अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए समर्पित किया। नबीन के मुताबिक, श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेशों से लोगों को धर्म और कर्तव्य के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कामना की कि भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद भारत के सभी नागरिकों और हिंदू समाज पर बना रहे।
नबीन ने देशवासियों के जीवन में सुख और शांति की प्रार्थना करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से भारत पहले की तरह गौरवशाली बना रहे।
सोशल मीडिया पर भी साझा किया संदेश
मंदिर में पूजा के बाद BJP अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी जन्माष्टमी के अवसर पर संदेश साझा किया।
उन्होंने कहा कि मंदिर के पवित्र और भक्तिमय वातावरण में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेशों को याद करना लोगों को धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
नबीन ने देश के सभी नागरिकों के लिए भगवान श्रीकृष्ण की कृपा की प्रार्थना की। उन्होंने मंदिर यात्रा की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पोस्ट के साथ साझा कीं।
उनके संदेश का केंद्र भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से मिलने वाली नैतिक सीख और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता रहा।
देशभर में मनाई जा रही कृष्ण जन्माष्टमी
कृष्ण जन्माष्टमी, जिसे कई स्थानों पर गोकुलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, देशभर में धार्मिक उत्साह के साथ मनाई जा रही है।
यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रतीक है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में आधी रात को हुआ था। इसी मान्यता के कारण जन्माष्टमी पर रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म का विशेष उत्सव मनाया जाता है।
इस अवसर पर श्रद्धालु उपवास रखते हैं, मंदिरों में पूजा करते हैं, भजन-कीर्तन में हिस्सा लेते हैं और मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं।
मंदिरों और घरों में विशेष सजावट
जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर के मंदिरों और घरों को फूलों, रोशनी और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाओं से सजाया जाता है। श्रद्धालु भगवान कृष्ण के लिए विशेष पूजा और भोग तैयार करते हैं।
कई मंदिरों में पूरे दिन धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें भजन, कीर्तन, प्रवचन और विशेष आरती शामिल होती हैं।
रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु इस दौरान मंदिरों में एकत्र होकर धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हैं।
जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मथुरा-वृंदावन में विशेष आयोजन
जन्माष्टमी का सबसे विशेष महत्व उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन में माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है, जबकि वृंदावन उनके बाल और युवा जीवन से जुड़ा प्रमुख क्षेत्र माना जाता है।
हर वर्ष यहां जन्माष्टमी के अवसर पर बड़े पैमाने पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु इन आयोजनों में हिस्सा लेने के लिए मथुरा और वृंदावन पहुंचते हैं।
मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़े प्रसंगों को धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए प्रस्तुत किया जाता है।
हालांकि, जन्माष्टमी का उत्सव केवल मथुरा-वृंदावन तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी हिस्सों में श्रद्धालु इसे अपनी स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार मनाते हैं।
महाराष्ट्र में दही हांडी की परंपरा
जन्माष्टमी के साथ दही हांडी उत्सव का भी विशेष संबंध है। खासकर महाराष्ट्र और पश्चिमी भारत के अन्य हिस्सों में दही हांडी बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।
दही हांडी में लोग मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर लटकी दही से भरी हांडी को तोड़ने की कोशिश करते हैं। यह परंपरा भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप और उनके मित्रों के साथ मिलकर माखन-दही चुराने की कथाओं से जुड़ी मानी जाती है।
इस वर्ष दही हांडी का आयोजन 5 सितंबर को किया जाएगा।
महाराष्ट्र में दही हांडी के दौरान विभिन्न स्थानों पर बड़े कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इनमें स्थानीय समुदायों और गोविंदा समूहों की भागीदारी रहती है।
श्रीकृष्ण के संदेश पर जोर
नितिन नबीन के जन्माष्टमी संदेश में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके विचारों के जरिए धर्म और कर्तव्य पर विशेष जोर दिया गया।
भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र भारतीय धार्मिक और दार्शनिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। महाभारत और भगवद्गीता से जुड़े उनके संदेशों में कर्तव्य, धर्म और नैतिक जिम्मेदारी को प्रमुखता दी गई है।
BJP अध्यक्ष ने भी अपने संदेश में नागरिकों से श्रीकृष्ण द्वारा दिखाए गए धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
उन्होंने देश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए भगवान श्रीकृष्ण से सभी नागरिकों पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।
जन्माष्टमी के धार्मिक और सामाजिक संदेश
जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर में होने वाले कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी माध्यम बनते हैं। मंदिरों में सामूहिक पूजा, भजन और धार्मिक आयोजन लोगों को एक साथ जोड़ते हैं।
विभिन्न राज्यों में इस पर्व को मनाने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा और उनके जीवन से जुड़े संदेश सभी आयोजनों के केंद्र में रहते हैं।
दिल्ली में नितिन नबीन का ISKCON मंदिर पहुंचना भी इसी धार्मिक उत्सव का हिस्सा रहा। उन्होंने पूजा-अर्चना के बाद देश की शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की और लोगों से धर्म तथा कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की अपील की।










