सिंहस्थ से पहले 2600 करोड़ के उज्जैन-गरोठ हाईवे पर सवाल, 7 महीने में दूसरी बार धंसी एप्रोच रोड

सिंहस्थ से पहले 2600 करोड़ के उज्जैन-गरोठ हाईवे की एप्रोच रोड फिर क्षतिग्रस्त हुई। NHAI ने 400-500 मीटर हिस्सा दोबारा बनाने के निर्देश दिए।

उज्जैन-गरोठ हाईवे के प्रेमनगर रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच रोड और रिटेनिंग वॉल सात महीने में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हुई है। तकनीकी जांच में खामियां मिलने के बाद NHAI ने करीब 400 से 500 मीटर हिस्सा दोबारा बनाने के निर्देश दिए हैं।

उज्जैन: सिंहस्थ महाकुंभ से पहले करीब 2600 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे उज्जैन-गरोठ ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रेमनगर रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच रोड और रिटेनिंग वॉल सात महीने के भीतर दूसरी बार क्षतिग्रस्त हुई है। तकनीकी जांच के बाद NHAI ने प्रभावित हिस्से को तोड़कर नए सिरे से बनाने का फैसला किया है।

सात महीने में दूसरी बार सामने आई समस्या

उज्जैन-गरोठ हाईवे के प्रेमनगर स्थित रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच रोड करीब 17 मीटर की ऊंचाई पर बनाई जा रही है। इस हिस्से में फरवरी 2026 में पहली बार धंसाव की समस्या सामने आई थी। इसके बाद प्रभावित हिस्से की मरम्मत कर रिटेनिंग वॉल को दोबारा तैयार किया गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद अगस्त में आरई ब्लॉक्स खिसकने और भराव सामग्री के प्रभावित होने की समस्या फिर सामने आ गई।

सिंहस्थ से पहले 2600 करोड़ के उज्जैन-गरोठ हाईवे पर सवाल, 7 महीने में दूसरी बार धंसी एप्रोच रोड

मामला सामने आने के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे। सोशल मीडिया पर पुल की एप्रोच रोड से जुड़े वीडियो और तस्वीरें भी सामने आए। निर्माण एजेंसी GHV कंस्ट्रक्शन के इंजीनियर अमित राय ने वायरल सामग्री को AI जनरेटेड बताते हुए पुल के धंसने से इनकार किया। हालांकि, NHAI अधिकारियों ने तकनीकी जांच में निर्माण से जुड़ी खामियां पाए जाने की पुष्टि की है।

IIT दिल्ली की जांच के बाद NHAI का फैसला

NHAI ने 22 अगस्त को IIT दिल्ली के विशेषज्ञों से प्रभावित हिस्से का तकनीकी निरीक्षण कराया। जांच में सामने आई कमियों को देखते हुए करीब 400 से 500 मीटर हिस्से को तोड़कर जमीन से नए सिरे से बनाने का निर्णय लिया गया है। इस काम पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसका खर्च निर्माण एजेंसी को उठाना होगा।

अधिकारियों का कहना है कि दोबारा निर्माण का उद्देश्य भविष्य में धंसाव जैसी समस्या की आशंका को खत्म करना है। रिपोर्टों के मुताबिक निर्माण एजेंसी ने प्रभावित हिस्से में खुदाई का काम शुरू कर दिया है। NHAI ने इस हिस्से को नए मानकों के अनुसार तैयार करने पर जोर दिया है।

सिंहस्थ के कारण हाईवे की गुणवत्ता अहम

उज्जैन-गरोठ हाईवे को सिंहस्थ महापर्व 2028 के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और वाहनों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में हाईवे के किसी महत्वपूर्ण हिस्से में तकनीकी समस्या यातायात और सुरक्षा दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। इसी वजह से NHAI प्रभावित हिस्से को दोबारा बनाने पर जोर दे रहा है।

करीब 2600 करोड़ रुपये की इस परियोजना का काम अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार चंदेसरी से खेड़ा खजूरिया के बीच करीब 41 किलोमीटर का हिस्सा अभी लंबित है। इसी पैकेज का निर्माण GVR Construction कर रही है। प्रभावित हिस्से के पुनर्निर्माण से परियोजना की समयसीमा पर भी असर पड़ने की आशंका है। NHAI की कोशिश है कि 31 मार्च 2027 तक हाईवे पर यातायात शुरू कराया जा सके।

स्थानीय स्तर पर निर्माण सामग्री, भराव और सपोर्ट सिस्टम को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल आधिकारिक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि तकनीकी जांच के बाद NHAI ने प्रभावित हिस्से को हटाकर दोबारा बनाने का निर्देश दिया है।

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