नोएडा साइबर पुलिस ने सेक्टर-22 में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी करता था। मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, जबकि कथित मास्टरमाइंड एमबीबीएस डॉक्टर फरार बताया जा रहा है।
नोएडा: नोएडा साइबर पुलिस ने सेक्टर-22 में संचालित एक कथित फर्जी जॉब कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह एविएशन सेक्टर और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से प्रोसेसिंग फीस और ट्रेनिंग के नाम पर पैसे वसूलता था। मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि जांच एजेंसियां कथित मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हैं।
साइबर पुलिस की कार्रवाई में सामने आया बड़ा नेटवर्क
साइबर डीसीपी शैव्या गोयल के अनुसार, 8 जुलाई को 'प्रतिबिंब पोर्टल' से मिले इनपुट के आधार पर साइबर थाना पुलिस ने सेक्टर-22 स्थित एक संस्थान में छापेमारी की। वहां कई युवक-युवतियां कॉलिंग करते मिले, जिसके बाद पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साकिब, अफरोज, सुमित गुप्ता, आमिर और आकाश उर्फ अमन के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह परिसर पहले पैरामेडिकल संस्थान के रूप में संचालित होता था, जिसे बाद में कथित तौर पर फर्जी कॉल सेंटर में बदल दिया गया।
नौकरी के नाम पर बनाए जाते थे फर्जी ऑफर लेटर
पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह विभिन्न एविएशन कंपनियों और ट्रेनिंग संस्थानों के नाम से कथित फर्जी ऑफर लेटर, एडमिशन लेटर और प्रमाणपत्र तैयार करता था। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से एक कथित फर्जी वेबसाइट भी बनाई थी। इन दस्तावेजों और वेबसाइट की मदद से नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं का भरोसा जीतकर उनसे पैसे वसूले जाते थे।
छह महीने से चल रहा था ठगी का खेल
पुलिस के अनुसार, आरोपी पिछले करीब छह महीने से इस नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। वे इंटरनेट और गूगल पर नौकरी से जुड़े विज्ञापनों के माध्यम से उम्मीदवारों का डेटा जुटाते थे। इसके बाद उन्हें कॉल कर प्रोसेसिंग फीस, ट्रेनिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करवाई जाती थी। शिकायतें बढ़ने पर आरोपी कथित तौर पर कंपनी का नाम, कार्यालय और कॉलिंग डेटा बदल देते थे, ताकि पुलिस की नजर से बच सकें।
फरार MBBS डॉक्टर पर सिंडिकेट चलाने का आरोप
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने दावा किया कि पूरे नेटवर्क का संचालन मेरठ निवासी एक एमबीबीएस डॉक्टर अजय कर रहा था। पुलिस के अनुसार, फिलहाल वह फरार है और उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जांच एजेंसियां उसके बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य संपर्कों की भी जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
जांच में मिले कई अहम साक्ष्य
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज, कथित फर्जी एविएशन सर्टिफिकेट, कॉलिंग डेटा, डायरी और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इन सभी उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस का मानना है कि इनसे ठगी के दायरे, पीड़ितों की संख्या और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिल सकती है।
पुलिस ने नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं से अपील की है कि किसी भी कंपनी या संस्थान में आवेदन करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट, भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करें। यदि कोई संस्था नौकरी दिलाने के नाम पर पहले पैसे जमा कराने की मांग करती है, तो उसकी सत्यता की पुष्टि करना जरूरी है। मामले की जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।











