नोएडा। बारिश के बाद नोएडा में जलभराव की समस्या एक बार फिर सामने आई। शहर के एक अंडरपास में बारिश का पानी इतना भर गया कि वहां से गुजर रही एक एंबुलेंस फंस गई। देखते ही देखते पानी करीब 3 से 4 फीट तक पहुंच गया और एंबुलेंस का निचला हिस्सा पानी में डूब गया। गनीमत रही कि उस समय एंबुलेंस के अंदर कोई मरीज नहीं था। आसपास मौजूद लोगों ने स्थिति देखी तो वे मदद के लिए पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद एंबुलेंस को धक्का देकर पानी से बाहर निकाला।
बारिश के बाद अंडरपास में तेजी से पानी भरने लगा था। पानी की गहराई बढ़ने के बावजूद एंबुलेंस वहां से निकलने की कोशिश कर रही थी। कुछ दूरी तक आगे बढ़ने के बाद वाहन पानी में फंस गया। पानी इतना ज्यादा था कि एंबुलेंस के पहिए पूरी तरह जलमग्न हो गए और उसका आगे बढ़ना मुश्किल हो गया।
एंबुलेंस के फंसने के बाद आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने सबसे पहले यह जानने की कोशिश की कि वाहन के अंदर कोई मरीज तो नहीं है। जब पता चला कि एंबुलेंस खाली है, तो लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद कई लोग वाहन के आसपास जुट गए और उसे धक्का देकर बाहर निकालने की कोशिश शुरू की।
काफी लोगों के एक साथ जोर लगाने के बाद एंबुलेंस धीरे-धीरे पानी से बाहर निकलने लगी। कुछ देर की मशक्कत के बाद वाहन को अंडरपास से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान बारिश और जलभराव के कारण सड़क पर आवाजाही भी प्रभावित रही।
घटना ने नोएडा में बारिश के दौरान अंडरपास में होने वाले जलभराव की समस्या को फिर सामने ला दिया है। शहर में कई अंडरपास ऐसे हैं जहां तेज बारिश के दौरान पानी तेजी से जमा हो जाता है। ऐसे में वाहन चालकों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि सड़क के नीचे पानी की वास्तविक गहराई कितनी है।
अंडरपास में पानी भरने की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि ऊपर से देखने पर पानी की गहराई का सही अंदाजा नहीं लगता। कई बार वाहन चालक पानी को सामान्य समझकर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन कुछ ही दूरी पर वाहन बंद हो जाता है। इस घटना में भी एंबुलेंस के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।
एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहन का इस तरह पानी में फंसना चिंता का विषय है। हालांकि इस बार वाहन के अंदर मरीज नहीं था, लेकिन यदि मरीज या गंभीर हालत में कोई व्यक्ति एंबुलेंस में मौजूद होता तो स्थिति ज्यादा मुश्किल हो सकती थी। बारिश के दौरान अस्पताल जाने वाले मरीजों और आपातकालीन सेवाओं के लिए ऐसे जलभराव वाले रास्ते बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होने के बाद अंडरपास में पानी तेजी से जमा हुआ। जलनिकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण कुछ ही समय में पानी कई फीट तक पहुंच गया। लोगों को उम्मीद थी कि प्रशासन या संबंधित विभाग की टीम जल्द मौके पर पहुंचेगी, लेकिन उससे पहले स्थानीय लोगों ने खुद एंबुलेंस को बाहर निकालने में मदद की।
एंबुलेंस को धक्का देकर बाहर निकालने के दौरान लोगों ने काफी सावधानी बरती। पानी में वाहन का संतुलन और सड़क की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण किसी के फिसलने या घायल होने का खतरा भी था। इसके बावजूद लोगों ने एकजुट होकर वाहन को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।
बारिश के दौरान नोएडा में सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हुई। कई जगह वाहन चालकों को पानी से होकर गुजरना पड़ा। दोपहिया वाहन चालकों के लिए परेशानी और ज्यादा रही, क्योंकि गहरे पानी में वाहन बंद होने का खतरा बना रहता है।
अंडरपास में जलभराव की स्थिति को देखते हुए वाहन चालकों को ऐसे रास्तों से गुजरते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि किसी अंडरपास में पानी काफी ज्यादा जमा हो तो वहां से वाहन निकालने की कोशिश करने के बजाय वैकल्पिक मार्ग अपनाना सुरक्षित रहता है।
इस घटना ने जलनिकासी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। बारिश के मौसम में अंडरपास को सुरक्षित रखने के लिए पानी निकालने वाली पंपिंग व्यवस्था और ड्रेनेज सिस्टम का सक्रिय रहना जरूरी होता है। यदि बारिश के कुछ ही समय बाद पानी 3 से 4 फीट तक जमा हो जाए तो आपातकालीन वाहनों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बारिश के दौरान जिन अंडरपास में पानी तेजी से भरता है, वहां पहले से निगरानी की व्यवस्था की जाए। पानी एक निश्चित स्तर तक पहुंचते ही रास्ते को वाहनों के लिए बंद कर दिया जाए, ताकि कोई वाहन बीच में फंसने की स्थिति में न आए।
फिलहाल इस घटना में सबसे बड़ी राहत यही रही कि एंबुलेंस में कोई मरीज नहीं था। अगर उसमें कोई गंभीर मरीज मौजूद होता तो जलभराव के बीच उसे सुरक्षित बाहर निकालना और अस्पताल पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता था।
बारिश के दौरान अंडरपास में फंसी एंबुलेंस को स्थानीय लोगों द्वारा धक्का देकर बाहर निकालने का वीडियो या तस्वीरें सामने आने पर यह घटना चर्चा में आ गई। लोगों ने जिस तरह से बिना किसी इंतजार के मदद के लिए आगे बढ़कर वाहन को बाहर निकाला, उससे स्थानीय स्तर पर सहयोग की तस्वीर भी सामने आई।
हालांकि, यह घटना यह भी बताती है कि भारी बारिश के दौरान सिर्फ वाहन चालकों की सावधानी काफी नहीं है। जलभराव वाले अंडरपास को समय रहते बंद करना और पानी की निकासी सुनिश्चित करना प्रशासन की भी बड़ी जिम्मेदारी है। खासकर उन रास्तों पर जहां से एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन गुजरते हैं, वहां जलभराव की समस्या को प्राथमिकता से दूर करना जरूरी है।
नोएडा में बारिश का दौर जारी रहने पर आने वाले समय में भी ऐसे जलभराव वाले स्थानों पर नजर रखने की जरूरत होगी। लोगों को सलाह दी जाती है कि अंडरपास या निचले रास्तों पर पानी की गहराई अधिक दिखाई दे तो जोखिम लेकर वाहन न निकालें।
इस घटना में एंबुलेंस के अंदर मरीज नहीं होने से बड़ा हादसा टल गया। लेकिन 3 से 4 फीट पानी में एंबुलेंस का फंसना नोएडा की बारिश और जलनिकासी व्यवस्था की चुनौती को जरूर उजागर करता है। स्थानीय लोगों की मदद से वाहन बाहर निकल गया, लेकिन आने वाले दिनों में तेज बारिश के दौरान ऐसे अंडरपास पर प्रशासन की सक्रिय निगरानी बेहद जरूरी होगी।