अफगानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण के लगभग पांच साल बाद नूर अहमद नूर को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास का चार्ज डी’अफेयर्स नियुक्त किया गया है। नूर अहमद नूर तालिबान के वरिष्ठ सदस्य हैं और दक्षिण एशिया मामलों में विशेष अनुभव रखते हैं।
World News: अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के अक्टूबर में भारत के सात दिवसीय दौरे के दौरान उनके साथ नूर अहमद नूर भी भारत आए थे। अब उन्हें नई दिल्ली में अफगानिस्तान के दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स (कार्यवाहक राजदूत) के रूप में नियुक्त किया गया है। नूर अहमद नूर तालिबानी शासन द्वारा भारत में अफगानिस्तान का काउंसलर या कार्यवाहक प्रमुख नियुक्त किए गए वरिष्ठ राजनयिक हैं। उनकी यह नियुक्ति उस समय हुई है जब भारत और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक संबंधों में फिर से मजबूती लाने का प्रयास हो रहा है।
नूर अहमद नूर कौन हैं?
नूर अहमद नूर अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय में फर्स्ट पॉलिटिकल डिवीजन के पूर्व महानिदेशक रह चुके हैं। वह तालिबानी शासन के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और विशेष रूप से दक्षिण एशिया मामलों को संभालते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, नूर अहमद नूर दूतावास की जिम्मेदारी संभालने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं और अब नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास के मुख्य प्रतिनिधि के रूप में कार्य करेंगे।
उनकी नियुक्ति तालिबान शासन द्वारा भारत में नियुक्त सबसे महत्वपूर्ण राजनयिक प्रतिनिधियों में से एक मानी जा रही है। नूर अहमद नूर वह प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जो अक्टूबर 2025 में अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के साथ भारत आए थे। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय चर्चाएं हुईं और रिश्तों में सकारात्मक संकेत दिखाई दिए।

भारत-अफगानिस्तान संबंध और मुत्ताकी का दौरा
अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी अक्टूबर 2025 में सात दिवसीय दौरे पर भारत आए थे। इस दौरे के दौरान भारत और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक संपर्क और सहयोग के नए अवसर पैदा हुए। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अफगान विदेश मंत्री मुत्ताकी के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास के लिए तालिबानी नियुक्त राजनयिकों को स्वीकार करने पर सहमति बनी।
हालांकि भारत ने तालिबान शासन को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है, बावजूद इसके दोनों देशों ने कूटनीतिक संवाद जारी रखने का रास्ता चुना है। नूर अहमद नूर की नियुक्ति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
गनी सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी अभी भी दूतावास में
नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में पहले से ही पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी द्वारा नियुक्त सईद मोहम्मद इब्राहिम खिल चार्ज डी’अफेयर्स के रूप में कार्यरत हैं। मुंबई और हैदराबाद स्थित अफगान वाणिज्य दूतावास भी तालिबानी नियुक्तियों के जरिए संचालित हो रहे हैं। इस संदर्भ में यह स्पष्ट है कि नूर अहमद नूर की नियुक्ति पुराने पदाधिकारियों के साथ काम करने की प्रक्रिया के तहत हुई है। यह भारत और तालिबान दोनों के लिए संवेदनशील कूटनीतिक संतुलन का उदाहरण है।
नूर अहमद नूर ने दिसंबर 2025 में बांग्लादेश का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने कई इस्लामी नेताओं से मुलाकात की और बांग्लादेश में राजनीतिक व सामाजिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयास किए। बांग्लादेश चुनाव से पहले उनकी इस यात्रा को बांग्लादेशी मीडिया ने महत्वपूर्ण बताया।











