नवंबर 2025: रिटेल महंगाई दर 0.71% दर्ज, सब्ज़ी और ईंधन भी हुए महंगे

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार नवंबर 2025 में CPI आधारित रिटेल महंगाई 0.71% रही। सब्ज़ियों और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ाई।

नवंबर 2025 में खुदरा महंगाई दर 0.71% दर्ज की गई। सब्ज़ियों, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने मुख्य मुद्रास्फीति को बढ़ाया। RBI ने मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहने की पुष्टि की।

CPI November 2025: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में रिटेल महंगाई दर यानी Consumer Price Index (CPI) आधारित inflation 0.71% दर्ज की गई। यह अक्टूबर में रिकॉर्ड निचले स्तर 0.25% के मुकाबले अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि नवंबर में महंगाई दर में वृद्धि का मुख्य कारण सब्ज़ियों, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं। अक्टूबर में महंगाई दर कम रहने का कारण GST दरों में कटौती और अनुकूल आधार प्रभाव माना गया था।

खाद्य वस्तुओं की महंगाई में बदलाव

एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में खाद्य पदार्थों में मूल्यह्रास 3.91% रहा, जो अक्टूबर में 5.02% था। इसका मतलब यह है कि खाद्य वस्तुओं में महंगाई का दबाव थोड़ी कम हुआ है, लेकिन सब्ज़ियों, अंडे, मांस, मछली और मसालों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मुख्य मुद्रास्फीति में वृद्धि देखने को मिली। विशेष रूप से ईंधन और प्रकाश खर्चों की कीमतों में उछाल का असर महंगाई दर पर स्पष्ट रहा। ईंधन और प्रकाश मुद्रास्फीति नवंबर में 2.32% रही, जो अक्टूबर के 1.98% से अधिक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सब्ज़ियों और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की कीमतों में मौसमी उतार-चढ़ाव और वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी ने भी मुद्रास्फीति दर को प्रभावित किया है। घरेलू मांग और सप्लाई की स्थिति भी महंगाई पर असर डाल रही है।

ईंधन और प्रकाश में बढ़ोतरी का प्रभाव

ईंधन और प्रकाश खर्चों की महंगाई नवंबर में 2.32% रही। इसका मुख्य कारण पेट्रोल, डीज़ल और गैस की बढ़ती कीमतें हैं। तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव, घरेलू डिमांड, और एक्साइज ड्यूटी ने महंगाई दर पर सीधा प्रभाव डाला है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी आम उपभोक्ता के खर्च में वृद्धि करती है। इससे रिटेल महंगाई पर दबाव बनता है और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ता है। इस महीने की रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में ईंधन और सब्ज़ियों की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा।

RBI का दृष्टिकोण

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने इस माह की शुरुआत में चालू वित्तीय वर्ष के लिए मुद्रास्फीति अनुमान घटाकर 2% कर दिया। पहले यह अनुमान 2.6% था। RBI ने बताया कि अर्थव्यवस्था में तेजी से डिसइन्फ्लेशन देखा जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दर 25 बेसिस प्वाइंट घटाकर 5.25% कर दी है। RBI ने इसे एक दुर्लभ “Goldilocks Period” बताया, यानी उच्च वृद्धि के साथ कम मुद्रास्फीति का संतुलन।

RBI ने FY26 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान 7.3% रखा है, जो पहले 6.8% था। भारतीय अर्थव्यवस्था ने सितंबर तिमाही में 8% और जून तिमाही में 7.8% की विकास दर दर्ज की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकेत करता है कि महंगाई दर नियंत्रण में है और आर्थिक विकास की गति मजबूत बनी हुई है।

महंगाई और निवेशकों के लिए संदेश

महंगाई दर में बढ़ोतरी निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती है। उपभोक्ताओं को अपने खर्चों की योजना बनाते समय सब्ज़ियों, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों और ईंधन के दामों में बढ़ोतरी का ध्यान रखना होगा। वहीं निवेशकों को यह संकेत मिल सकता है कि inflation-targeted निवेश और सरकारी बॉन्ड में लंबी अवधि के लिए निवेश सुरक्षित रह सकते हैं।

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