1 जनवरी को नया साल मनाने की परंपरा प्राचीन रोम से शुरू होकर ग्रेगोरियन कैलेंडर तक पहुंची है। पहले साल की शुरुआत मार्च से होती थी, लेकिन राजनीतिक जरूरतों और कैलेंडर सुधारों ने 1 जनवरी को वैश्विक नया साल बना दिया।
1 जनवरी नया साल का इतिहास: दुनिया भर में हर साल 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है, लेकिन यह परंपरा हमेशा से ऐसी नहीं थी। क्या है यह परंपरा, कहां से शुरू हुई, कब बदली, किसके फैसलों से लागू हुई और क्यों 1 जनवरी को साल की शुरुआत माना गया—इन सभी सवालों का जवाब इतिहास में छिपा है। प्राचीन रोमन काल में साल मार्च से शुरू होता था, लेकिन 153 ईसा पूर्व में रोमन सीनेट और बाद में 1582 में ग्रेगोरियन कैलेंडर के जरिए 1 जनवरी को आधिकारिक नया साल घोषित किया गया, जिसे धीरे-धीरे पूरी दुनिया ने अपनाया।
1 जनवरी से पहले कब शुरू होता था साल
प्राचीन रोमन कैलेंडर में सिर्फ 10 महीने होते थे और नया साल 1 मार्च से शुरू माना जाता था। यह समय खेती और युद्ध के मौसम से जुड़ा था, इसलिए प्रशासनिक और सामाजिक गतिविधियां इसी के अनुसार तय होती थीं।
लगभग 700 ईसा पूर्व रोमन राजा नूमा पोम्पिलियस ने जनवरी और फरवरी को कैलेंडर में जोड़ा, लेकिन तब भी साल की शुरुआत मार्च से ही मानी जाती रही।

राजनीति ने बदली तारीख
153 ईसा पूर्व में रोमन सीनेट ने बड़ा फैसला लिया और राजनीतिक वर्ष की शुरुआत 1 जनवरी से कर दी। इसका मकसद यह था कि नए चुने गए अधिकारी समय पर पदभार संभाल सकें और सैन्य अभियानों की तैयारी बेहतर ढंग से हो सके।
यहीं से 1 जनवरी को नए साल की औपचारिक शुरुआत का चलन मजबूत होने लगा, हालांकि यह अभी पूरी तरह सार्वभौमिक नहीं था।
ग्रेगोरियन कैलेंडर से मिली वैश्विक मान्यता
रोमन साम्राज्य के पतन के बाद मध्ययुग में ईसाई धर्मगुरुओं ने 1 जनवरी को मूर्तिपूजक परंपरा मानते हुए कई जगह नया साल 25 दिसंबर या 25 मार्च से मनाना शुरू किया।
1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया, जिसने 1 जनवरी को दोबारा आधिकारिक नया साल बना दिया। धीरे-धीरे ब्रिटेन, रूस और ग्रीस समेत अन्य देशों ने भी इसे अपनाया और यह तारीख वैश्विक मानक बन गई।








