फिल्म ओ रोमियो की रिलीज़ से पहले शाहिद कपूर ने कहा कि नए किरदार और डर उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। विशाल भारद्वाज के निर्देशन को खास बताते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि हर भूमिका कलाकार की नहीं होती और सीख हर जगह मिलती है।
Bollywood: फिल्म ओ रोमियो की रिलीज़ से पहले अभिनेता शाहिद कपूर ने अपनी नई फिल्म और अपने फिल्मी सफर को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा की हैं। दैनिक जागरण को दिए गए इंटरव्यू में शाहिद ने खुलकर बताया कि वह हर प्रोजेक्ट में कुछ नया करने की कोशिश क्यों करते हैं और कैसे यह फिल्म उनके लिए खास है। शाहिद जल्द ही ओ रोमियो में नज़र आने वाले हैं और इस फिल्म को लेकर उनकी उम्मीदें काफी ऊंची हैं।
नया काम करने का उत्साह देता है आगे बढ़ने की हिम्मत
शाहिद कहते हैं कि एक कलाकार के रूप में उनके लिए यह बेहद जरूरी है कि हर नए काम को लेकर उनके भीतर उत्साह या घबराहट हो। वह मानते हैं कि जब कोई कलाकार किसी नई जगह या नए किरदार में कदम रखता है, जहां वह पहले कभी नहीं गया होता, तभी वह अपनी असली क्षमता को परखता है। शाहिद के अनुसार एक्टर होना सिर्फ अनुशासन या सीखने का नहीं बल्कि खुद को उड़ान देने, नए रास्ते चुनने और जोखिम उठाने का मौका भी है। अगर कलाकार यह सब एक्सप्लोर नहीं करता तो वह इस पेशे के सबसे बड़े रोमांच से वंचित रह जाता है। शाहिद का साफ मानना है कि यही अभिनय का सबसे खूबसूरत हिस्सा है।
मंच पर आते ही बदल जाता है एहसास
मुंबई में एक हालिया कार्यक्रम के दौरान शाहिद ने कहा कि हर कलाकार के भीतर गहरा डर मौजूद होता है। वह बताते हैं कि कलाकार चाहे जितना तैयारी कर ले, लेकिन जैसे ही वह मंच पर आता है और सैकड़ों लोगों की निगाहें उस पर टिक जाती हैं, तब भीतर से कई तरह की भावनाएं उमड़ने लगती हैं। कलाकार को इन सबके बीच आगे बढ़कर खुद पर भरोसा करना पड़ता है।
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हर भूमिका आपकी नहीं होती
शाहिद इस बात को स्वीकारते हैं कि हर बार भूमिका चुनना कलाकार के हाथ में नहीं होता। वह कहते हैं कि जिंदगी एक यात्रा है और इंसान वही बनता है जो उसे बनना होता है। अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए शाहिद बताते हैं कि जब वह युवा थे, तब उन्हें लगता था कि कुछ किरदार वह दूसरों से बेहतर कर सकते थे, लेकिन अब उनमें यह भावना नहीं है।
आज वह दूसरों का अच्छा काम देखकर खुश होते हैं। शाहिद का मानना है कि कलाकार हर समय खुद ही परफॉर्म नहीं कर सकता। कई बार लोग किसी अन्य अभिनेता की परफॉर्मेंस को पसंद करते हैं और उसे देखकर कलाकार को सीख मिलती है। इसलिए शाहिद कहते हैं कि वह कभी नहीं कहेंगे कि कोई किरदार उन्हें मिलना चाहिए था क्योंकि ऐसा कहना किसी अन्य कलाकार के काम का अनादर होगा।
निर्देशकों ने दिया नया दृष्टिकोण
शाहिद मानते हैं कि कई निर्देशक ऐसे रहे जिन्होंने उनके अभिनय को लेकर उनकी सोच को बदला और मजबूत बनाया। इस संदर्भ में वह सबसे पहले विशाल भारद्वाज का नाम लेते हैं। शाहिद बताते हैं कि उनकी फिल्म ओ रोमियो पूरी हो चुकी है जो वैलेंटाइन डे के आसपास रिलीज़ होगी। यह शाहिद और विशाल भारद्वाज की चौथी फिल्म है और इसकी कास्ट भी शानदार है।
शाहिद कहते हैं कि विशाल सर हमेशा उन्हें चुनौती देते हैं। उन्होंने शाहिद को देश के बेहतरीन कलाकारों जैसे तब्बू, इरफान खान और के. के. मेनन के साथ एक ही फ्रेम में खड़ा किया। हैदर जैसी फिल्म में इतना मजबूत कलाकारों के बीच काम करना शाहिद के लिए एक सपने जैसा अनुभव था।










