‘ओ रोमियो’: सपना दीदी की असली कहानी- दाउद इब्राहिम से बदला और दर्दनाक अंत

‘ओ रोमियो’: सपना दीदी की असली कहानी- दाउद इब्राहिम से बदला और दर्दनाक अंत

शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी स्टारर फिल्म ओ रोमियो का ट्रेलर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। यह फिल्म हुसैन जैदी की किताब माफिया क्वींस ऑफ मुंबई पर आधारित है।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: विशाल भारद्वाज की आगामी फिल्म ‘ओ रोमियो’ का ट्रेलर रिलीज होते ही यह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी अभिनीत यह फिल्म अंडरवर्ल्ड की सच्ची घटनाओं से प्रेरित है और मशहूर लेखक हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ पर आधारित बताई जा रही है। फिल्म में शाहिद कपूर अंडरवर्ल्ड डॉन हुसैन उस्तरा की भूमिका में हैं, जबकि तृप्ति डिमरी ने सपना उर्फ सपना दीदी का किरदार निभाया है।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर असल जिंदगी में सपना दीदी कौन थीं? क्यों उनका जीवन दाउद इब्राहिम से बदले के इर्द-गिर्द घूमता रहा? और उनका अंत इतना दर्दनाक क्यों हुआ?

सपना दीदी की असल पहचान

सपना दीदी का असली नाम अशरफ था। वह 1980 के दशक के अंत और 1990 के शुरुआती वर्षों में मुंबई के अंडरवर्ल्ड से जुड़ा एक जाना-पहचाना नाम बन गई थीं। उनकी जिंदगी उस वक्त पूरी तरह बदल गई, जब उनके शौहर की हत्या कर दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स और अंडरवर्ल्ड से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, इस हत्या के पीछे कुख्यात डॉन दाउद इब्राहिम का हाथ बताया जाता है।

पति की मौत के बाद सपना दीदी के लिए जिंदगी का सिर्फ एक ही मकसद बचा—दाउद इब्राहिम से बदला। इसी इरादे ने उन्हें अपराध की दुनिया में उतार दिया।

हुसैन उस्तरा से गठजोड़

दाउद इब्राहिम का विरोध करने वाले अंडरवर्ल्ड डॉन हुसैन उस्तरा से सपना दीदी की मुलाकात हुई। हुसैन उस्तरा की भी दाउद से गहरी दुश्मनी थी। ऐसे में दोनों ने एक-दूसरे का साथ दिया। माना जाता है कि हुसैन उस्तरा ने सपना दीदी को हथियार चलाने और अपराध की दुनिया में टिके रहने की ट्रेनिंग दी। सपना दीदी धीरे-धीरे एक मजबूत और निडर महिला के रूप में उभरीं, जिसने पुरुष-प्रधान अंडरवर्ल्ड में अपनी अलग पहचान बनाई।

सपना दीदी ने चुपचाप दाउद इब्राहिम के काले कारोबार को नुकसान पहुंचाना शुरू किया। उन्होंने अपना एक छोटा गैंग बनाया, जो दाउद की डी-कंपनी के खिलाफ काम करता था। बताया जाता है कि उनके प्रयासों से मुंबई में डी-कंपनी से जुड़े कई जुए के अड्डे, डांस बार और अवैध गतिविधियां बंद हुईं। इतना ही नहीं, 1990 के दशक में शारजाह में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान दाउद इब्राहिम की हत्या की एक साजिश भी रची गई। हालांकि, यह योजना लीक हो गई और सपना दीदी अपने मकसद में सफल नहीं हो सकीं।

दर्दनाक अंत

सपना दीदी की चुनौती दाउद इब्राहिम को रास नहीं आई। साल 1994 में दाउद के गुर्गों ने उन पर बेरहमी से हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन पर 22 बार चाकू से वार किए गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस तरह बदले की आग में जलती एक महिला की कहानी बेहद क्रूर अंत के साथ खत्म हो गई।

फिल्म ‘ओ रोमियो’ में सपना दीदी और हुसैन उस्तरा के बीच एक रोमांटिक कहानी भी दिखाई गई है, जिस पर हुसैन उस्तरा के परिवार ने आपत्ति जताई है। उनकी बेटी ने एक इंटरव्यू में कहा कि सपना दीदी उनके पिता के लिए बहन जैसी थीं और फिल्म में दिखाया गया प्रेम प्रसंग गलत है। उनके अनुसार, सपना दीदी अकेली थीं और उनके पिता ने मानवीय आधार पर उनकी मदद की थी।

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