ओडिशा के केंद्रापड़ा में विजिलेंस ने असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अनुपमा साहू के कार्यालय और आवास पर छापेमारी की। कार्रवाई में अब तक ₹7.15 लाख नकद मिले हैं। विजिलेंस ठेकेदारों के लंबित बिलों से जुड़े कथित रिश्वत मामले और नकदी के स्रोत की जांच कर रही है।
भुवनेश्वर: ओडिशा विजिलेंस ने केंद्रापड़ा ड्रेनेज डिवीजन की असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (AEE) अनुपमा साहू के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके कार्यालय और आवासीय ठिकानों पर तलाशी ली। विजिलेंस की यह कार्रवाई ठेकेदारों के लंबित बिलों को मंजूरी दिलाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत की रकम इकट्ठा किए जाने की सूचना के बाद की गई। 5 सितंबर 2026 को मिली जानकारी के आधार पर विजिलेंस टीम ने अनुपमा साहू को रास्ते में रोका। उनके पास से ₹3.15 लाख नकद बरामद किए गए। इसके बाद उनके आवास पर की गई तलाशी में ₹4 लाख और मिले। इस तरह कार्रवाई में अब तक कुल ₹7.15 लाख नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
ठेकेदारों के लंबित बिलों से जुड़ी सूचना पर कार्रवाई
ओडिशा विजिलेंस के मुताबिक, 5 सितंबर को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना मिली थी कि केंद्रापड़ा ड्रेनेज डिवीजन कार्यालय में ठेकेदारों के लंबित बिलों को क्लियर कराने के लिए कथित तौर पर रिश्वत की रकम जुटाई जा रही है।
सूचना मिलने के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने मामले की निगरानी शुरू की। जांच के तहत अनुपमा साहू की गतिविधियों पर नजर रखी गई और बाद में उन्हें रोककर नकदी की जांच की गई।
विजिलेंस की कार्रवाई का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि उनके पास इतनी बड़ी मात्रा में नकदी किस स्रोत से आई। अधिकारी कथित तौर पर बरामद रकम के स्रोत के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सकीं।
हालांकि, मामले में रिश्वत के आरोपों और बरामद नकदी के बीच संबंध की जांच अभी जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
NH-53A पर रोका गया वाहन
विजिलेंस टीम ने अनुपमा साहू को मार्शाघाई क्रॉसिंग के पास NH-53A पर रोका। बताया गया कि वह अपने कार्यालय से केंद्रापड़ा के नयनविहार स्थित आवास की ओर जा रही थीं।
वह सरकारी वाहन संख्या OD-29-S-6644 में यात्रा कर रही थीं। तलाशी के दौरान वाहन में मौजूद अनुपमा साहू के पास से ₹3,15,000 नकद बरामद किए गए।
विजिलेंस ने बरामद रकम को संदिग्ध मानते हुए नकदी और वाहन को जब्त कर लिया। इसके बाद मामले को आय से अधिक संपत्ति के संभावित एंगल से भी जांच के दायरे में लिया गया।
आवास पर तलाशी में मिले ₹4 लाख
रास्ते में नकदी बरामद होने के बाद विजिलेंस ने अनुपमा साहू से जुड़े कार्यालय और आवासीय परिसरों में तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान केंद्रापड़ा स्थित उनके आवास की भी जांच की गई।
तलाशी के दौरान घर से ₹4 लाख अतिरिक्त नकद बरामद किए गए। पहले बरामद ₹3.15 लाख और आवास से मिले ₹4 लाख को मिलाकर कुल नकदी ₹7.15 लाख हो गई।
विजिलेंस अब बरामद रकम के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच कर रही है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या बरामद नकदी का संबंध ठेकेदारों के लंबित बिलों को मंजूरी देने से जुड़े कथित लेनदेन से है।
आय से अधिक संपत्ति के एंगल से जांच
विजिलेंस ने नकदी बरामद होने के बाद मामले में आय से अधिक संपत्ति के पहलू की जांच भी शुरू की है। इस तरह की जांच में अधिकारी की ज्ञात आय और संपत्तियों के बीच संभावित अंतर की पड़ताल की जाती है।
अनुपमा साहू से बरामद नकदी के संबंध में पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि रकम किस उद्देश्य से रखी गई थी और इसका स्रोत क्या था।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तलाशी अभियान में कुल ₹7.15 लाख नकद मिले हैं। इसके अलावा जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की दिशा आगे तय की जाएगी।
कार्यालय और आवास दोनों जांच के दायरे में
विजिलेंस की कार्रवाई केवल आवास तक सीमित नहीं रही। अधिकारी के कार्यालय से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य संभावित साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
क्योंकि मामला ठेकेदारों के लंबित बिलों को क्लियर कराने के लिए कथित रिश्वत की रकम इकट्ठा किए जाने की सूचना से जुड़ा है, इसलिए संबंधित बिलों और कार्यालयी प्रक्रिया की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या किसी ठेकेदार से रकम लेने या दिलाने की कोई व्यवस्था बनाई गई थी। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
पूछताछ और तलाशी अभी जारी
विजिलेंस के अधिकारी अनुपमा साहू से लगातार पूछताछ कर रहे हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य बरामद नकदी के स्रोत और उसके संभावित उपयोग का पता लगाना है।
इसके अलावा एजेंसी कथित रिश्वत की सूचना की भी जांच कर रही है। यदि जांच में बरामद रकम और ठेकेदारों के लंबित बिलों के बीच कोई संबंध स्थापित होता है, तो मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल विजिलेंस की ओर से कुल ₹7.15 लाख नकद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले की जांच और तलाशी अभियान जारी है।
आगे की जांच पर टिकी नजर
ओडिशा में सरकारी अधिकारी के ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई ने कथित भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई को फिर चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, इस मामले में आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। अभी तक सामने आई जानकारी के आधार पर विजिलेंस ने नकदी बरामद की है और अधिकारी से उसके स्रोत को लेकर पूछताछ की जा रही है।
आने वाले चरण में जांच एजेंसी यह स्पष्ट करने का प्रयास करेगी कि बरामद ₹7.15 लाख का स्रोत क्या था, क्या इसका संबंध ठेकेदारों के लंबित बिलों से था और क्या मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी सामने आती है।










