Online Money Gaming Ban: SC में केंद्र सरकार का बड़ा दावा- 'टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हैं तार'

ऑनलाइन मनी गेमिंग पर बैन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बड़ा दावा किया है। सरकार के अनुसार इसके तार टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हैं। जानिए

ऑनलाइन मनी गेमिंग पर बैन लगाने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि इस अनियंत्रित क्षेत्र के तार टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन मनी गेमिंग पर बैन के मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। इस मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए हलफनामे में कहा कि अनियंत्रित ऑनलाइन मनी गेमिंग के तार टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हुए हैं। सरकार ने अपने हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया कि ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन और रेगुलेशन एक्ट की वैधता पर सुनवाई करना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि यह कानून राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भी अभी तक नोटिफाई नहीं किया गया है।

केंद्र सरकार का रुख

केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि यह कानून खासकर युवाओं और कमजोर वर्ग को ऑनलाइन मनी गेमिंग के सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक और प्राइवेसी पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव से बचाने के लिए लाया गया है। इसके अलावा, यह कानून देश की वित्तीय व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को भी सुरक्षित रखने में मदद करेगा।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अनियंत्रित ऑनलाइन गेमिंग वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और कुछ मामलों में आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए इस्तेमाल हो रहा है। हलफनामे में कहा गया, “ऑनलाइन मनी गेमिंग के बढ़ते विस्तार ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और राज्य की अखंडता को खतरे में डाल दिया है।

Online Money Gaming Ban: SC में केंद्र सरकार का बड़ा दावा- 'टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हैं तार'

डेटा सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत होगा

केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि उनके पास पर्याप्त डेटा मौजूद है जो यह दर्शाता है कि अनियंत्रित ऑनलाइन गेमिंग के तार टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हुए हैं। हालांकि, इस डेटा को सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाएगा ताकि संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहे। सरकार के हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया कि कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां छोटे द्वीप देशों में पंजीकृत हैं। 

डेटा की जांच से पता चला कि इन कंपनियों के उपयोगकर्ताओं के खाते भारतीय बैंकों में प्रॉक्सी व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत थे। इसके अलावा, उपयोगकर्ताओं से एकत्र किए गए पैसे को गलत जानकारी देकर भारत से बाहर भेजा गया। यह स्थिति देश की वित्तीय सुरक्षा और नियामक ढांचे के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है। सरकार का कहना है कि अनियंत्रित ऑनलाइन गेमिंग न केवल व्यक्तिगत निवेशकों के लिए खतरा है, बल्कि इसका दुरुपयोग आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के लिए भी हो सकता है।

केंद्र सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि ऑनलाइन मनी गेमिंग युवाओं के लिए विशेष रूप से खतरनाक है। इसके आर्थिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव से युवा वर्ग प्रभावित हो सकता है, जिससे न केवल उनकी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ता है, बल्कि समाज में सामाजिक और नैतिक संकट भी उत्पन्न होता है।

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