Textile industry इन दिनों वैश्विक स्तर पर चर्चा में है और इसमें भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। दुनिया के बड़े कपड़ा उत्पादक देशों में China पहले स्थान पर माना जाता है, जबकि Bangladesh इस क्षेत्र में एक प्रमुख प्रतिस्पर्धी और विशेष रूप से साउथ एशिया में भारत का बड़ा प्रतिद्वंद्वी देश है।
बिजनेस न्यूज़: मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट का असर अब दुनिया के सबसे बड़े रोजगार आधारित उद्योगों में से एक—टेक्सटाइल सेक्टर—पर साफ दिखाई देने लगा है। इस बदलाव के बीच बांग्लादेश की कपड़ा इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ा है, जबकि भारत के लिए वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मजबूत होता दिख रहा है।
दुनिया की टेक्सटाइल सप्लाई चेन में चीन के बाद बांग्लादेश दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है, जबकि भारत इस सूची में शीर्ष पांच देशों में शामिल है। दोनों ही देश वैश्विक परिधान बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां प्रतिस्पर्धा का संतुलन बदल सकती हैं।
ऊर्जा संकट और बढ़ती लागत से बांग्लादेश की इंडस्ट्री पर दबाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के चलते ईंधन व ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ रहा है, जो पहले से ही कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही थी। विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती और ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता बढ़ी है। इसके कारण फैक्ट्रियों में उत्पादन बाधित हो रहा है और मशीनें लगातार नहीं चल पा रही हैं, जिससे ऑर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल हो गया है।
ऊर्जा संकट के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स लागत में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है। ईंधन महंगा होने के कारण माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है, जिससे निर्यातकों का मुनाफा घट रहा है। टेक्सटाइल एसोसिएशन से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, समय पर डिलीवरी न दे पाने की स्थिति में खरीदारों से बातचीत और समझौते करने पड़ रहे हैं। कई मामलों में एयर कार्गो का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे कुल लागत का 50 से 60 प्रतिशत तक हिस्सा केवल ट्रांसपोर्टेशन में खर्च हो रहा है।
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रोजगार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में टेक्सटाइल सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे बड़ी मानी जाती है। यह उद्योग लगभग 40 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देता है। ऐसे में उत्पादन और निर्यात में गिरावट का असर सीधे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 के बाद से यह सेक्टर लगातार दबाव में है। पहले रूस-यूक्रेन युद्ध, फिर वैश्विक मुद्रास्फीति, अमेरिकी व्यापार नीतियों और अब मध्य पूर्व संकट ने मिलकर उद्योग की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।
भारत वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में पांचवें स्थान पर है और तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। कपास उत्पादन, मैन्युफैक्चरिंग बेस, और सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के कारण भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। बांग्लादेश की मौजूदा चुनौतियों के बीच वैश्विक खरीदार वैकल्पिक सप्लाई बाजारों की तलाश में हैं, और ऐसे में भारत एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर सकता है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत समय पर उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और लॉजिस्टिक्स सुधार पर ध्यान दे, तो वह वैश्विक ऑर्डर का बड़ा हिस्सा हासिल कर सकता है।









