Oracle के हालिया layoffs के बाद पूर्व कर्मचारियों ने severance package, RSU benefits और WARN Act नियमों को लेकर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिना पूर्व सूचना कर्मचारियों के अकाउंट बंद किए गए, जिससे कंपनी की HR policies पर विवाद बढ़ गया है।
Tech: Oracle के हालिया layoffs को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 31 मार्च 2026 को हजारों कर्मचारियों को अचानक termination ईमेल भेजे गए, जिसके बाद severance benefits, RSUs और WARN Act compliance पर सवाल उठने लगे। कई पूर्व कर्मचारियों का दावा है कि बिना advance notice उनके सिस्टम और कंपनी एक्सेस तुरंत बंद कर दिए गए।
बिना नोटिस नौकरी खत्म होने पर उठे सवाल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रभावित कर्मचारियों को अचानक ईमेल के जरिए नौकरी खत्म होने की जानकारी दी गई। कई कर्मचारियों ने दावा किया कि उन्हें किसी प्रकार की advance warning नहीं दी गई थी। ईमेल मिलने के तुरंत बाद कंपनी सिस्टम, VPN और ऑफिस अकाउंट्स का एक्सेस भी बंद कर दिया गया।

कुछ पूर्व कर्मचारियों ने बताया कि लॉगिन करने पर उन्हें “this user doesn’t exist anymore” जैसा मैसेज दिखाई दिया। इस तरीके को लेकर सोशल मीडिया और टेक इंडस्ट्री में Oracle की आलोचना बढ़ रही है।
Severance Package और RSU Benefits बना बड़ा मुद्दा
कंपनी की ओर से प्रभावित कर्मचारियों को शुरुआती वर्ष के लिए चार हफ्तों की salary और अतिरिक्त वर्षों के लिए प्रति वर्ष एक हफ्ते का भुगतान ऑफर किया गया है। इसकी अधिकतम सीमा 26 हफ्तों तक रखी गई है। साथ ही सीमित अवधि के लिए COBRA health coverage भी दी गई।
हालांकि सबसे बड़ा विवाद Restricted Stock Units (RSUs) को लेकर सामने आया है। कई कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी ने accelerated vesting का विकल्प नहीं दिया, जिसके कारण वे बड़े stock benefits से वंचित हो गए। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ कर्मचारियों को लाखों डॉलर के संभावित RSU gains का नुकसान हुआ।
WARN Act Compliance को लेकर बढ़ी जांच
पूर्व कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोगों को “remote worker” category में classify किया गया, जिससे वे अमेरिकी WARN Act protections के दायरे से बाहर हो गए। यह कानून बड़े layoffs से पहले कर्मचारियों को advance notice देने से जुड़ा है।
अब इस मामले को लेकर टेक इंडस्ट्री में corporate layoff policies, employee rights और stock compensation practices पर नई बहस शुरू हो गई है।









