ट्रम्प ने ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराया, मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ा

ट्रम्प को सीजफायर प्रस्ताव अस्वीकार, इसके बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। होर्मुज स्ट्रेट संकट, तेल की कीमतों में उछाल और सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के शांति और सीजफायर प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। इसके बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। होर्मुज स्ट्रेट संकट, तेल की कीमतों में उछाल और सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।

ईरान/अमेरिका वॉर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान द्वारा पेश किए गए नए शांति और सीजफायर प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा है, लेकिन यह उन्हें “बिल्कुल पसंद नहीं आया” और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इस बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।

ईरान का प्रस्ताव क्या था?

ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए अमेरिका को एक नया कूटनीतिक प्रस्ताव भेजा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे, जैसे:

  • पूरे क्षेत्र में, विशेष रूप से लेबनान में, युद्ध को समाप्त करने की मांग
  • फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना
  • परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत फिर से शुरू करना

ईरान का दावा है कि उसका जवाब “सकारात्मक और व्यावहारिक” है, लेकिन उसने अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी बड़े समझौते से इनकार किया है।

अमेरिका की शर्तें और सख्त रुख

अमेरिका की ओर से पहले ही ईरान को 14 सूत्रीय प्रस्ताव दिया गया था, जिसमें सबसे अहम शर्त यह थी कि ईरान कम से कम 12 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पूरी तरह रोक दे।

इसके अलावा अमेरिका ने मांग की थी कि ईरान अपने पास मौजूद लगभग 440 किलो 60% संवर्धित यूरेनियम को सौंप दे। इसके बदले अमेरिका प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज करने की बात कर रहा था।

हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ बताते हुए पूरी तरह स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ा संकट

मध्य-पूर्व में तनाव का सबसे बड़ा केंद्र अब होर्मुज स्ट्रेट बन गया है, जो दुनिया का एक महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद के कारण इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कई देशों के जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा मंडराने लगा है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा संकट गहराया

मध्य-पूर्व में हालात तेजी से अस्थिर हो रहे हैं। लेबनान में इजराइली हमलों में कई लोगों की मौत की खबरें हैं, जबकि मेडिकल कर्मियों को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं, होर्मुज क्षेत्र में ड्रोन हमलों और जहाजों पर रुकावट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत में ड्रोन अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कुछ देशों ने ईरान पर आरोप लगाया है कि वह क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दे रहा है।

ईरान की चेतावनी

ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि यदि पश्चिमी देश, विशेषकर अमेरिका, फ्रांस या ब्रिटेन ने होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य हस्तक्षेप बढ़ाया तो इसका “कड़ा और तुरंत जवाब” दिया जाएगा। ईरान का दावा है कि इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा का अधिकार केवल उसी के पास है।

वैश्विक चिंता बढ़ी

अमेरिका और ईरान के बीच यह ताजा कूटनीतिक विफलता वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू नहीं होती, तो यह तनाव बड़े सैन्य या आर्थिक संकट में बदल सकता है।

तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और मध्य-पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर इसका सीधा असर देखा जा रहा है।

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