तमिलनाडु विधानसभा की 17वीं बैठक आज यानी सोमवार, 11 मई को आयोजित होगी। बैठक सुबह 9:30 बजे सचिवालय में शुरू होगी, जहां सभी नवनिर्वाचित विधायक शपथ लेंगे। इसके अगले दिन विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा।
चेन्नई: दक्षिण भारत की राजनीति में एक बड़े बदलाव के बीच तमिलनाडु की 17वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार, 11 मई को शुरू होने जा रहा है। राज्य सचिवालय में सुबह 9:30 बजे आयोजित होने वाली इस बैठक में सभी नवनिर्वाचित विधायक शपथ लेंगे। इसके बाद 12 मई को विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा, जबकि मुख्यमंत्री Vijay को 13 मई तक सदन में बहुमत साबित करना होगा।
राज्य की राजनीति में यह बदलाव इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि अभिनेता से नेता बने Vijay की पार्टी टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल कर दशकों पुराने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
उदयनिधि स्टालिन बने विपक्ष के नेता
इस राजनीतिक परिवर्तन के बीच Udhayanidhi Stalin को तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया है। वह डीएमके विधायक दल का नेतृत्व भी करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विधानसभा में टीवीके और डीएमके के बीच मजबूत राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता है। वहीं टीवीके नेता एमवी करुप्पैया को विधानसभा का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
उन्होंने रविवार को राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar की उपस्थिति में शपथ ली। कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी सभी नव-निर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने की होगी।
विजय ने तमिलनाडु के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में ली शपथ

ऐतिहासिक चुनावी जीत के बाद Vijay ने तमिलनाडु के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित समारोह में राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar ने विजय और उनके मंत्रिमंडल के नौ सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई स्थित तमिलनाडु सचिवालय में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। इसके बाद उन्होंने सामाजिक सुधारक Periyar E. V. Ramasamy को श्रद्धांजलि अर्पित की और द्रविड़ कजगम के अध्यक्ष के. वीरमणि से मुलाकात की।
2026 के विधानसभा चुनावों में तमिलनाडु की राजनीति में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला। टीवीके ने अपने पहले चुनाव में 108 सीटों पर जीत दर्ज कर डीएमके और एआईएडीएमके के लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दी। लोकप्रिय अभिनेता और ‘थलपति’ के नाम से पहचाने जाने वाले विजय की तुलना पूर्व मुख्यमंत्री और फिल्म अभिनेता M. G. Ramachandran से की जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी लोकप्रियता और युवा वोटरों में मजबूत पकड़ ने इस ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई।
पेरम्बूर सीट बरकरार रखेंगे विजय
मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय ने तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा के प्रधान सचिव को सौंप दिया है। हालांकि वह पेरम्बूर विधानसभा सीट से विधायक बने रहेंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला प्रशासनिक और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले संबोधन में Vijay ने राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया और “धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के नए युग” की शुरुआत की बात कही। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शिता, समावेशी विकास और सामाजिक समानता के सिद्धांतों पर काम करेगी। उनके इस भाषण को समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार समर्थन दिया।
राहुल गांधी सहित कई राष्ट्रीय नेता हुए शामिल
शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi भी शामिल हुए। उनके साथ कांग्रेस, CPI, CPI(M) और VCK के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। इन दलों ने विधानसभा चुनाव में टीवीके को समर्थन दिया था, जिससे पार्टी को बहुमत हासिल करने में मदद मिली। विजय ने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और पार्टी महासचिव K. C. Venugopal का भी सार्वजनिक रूप से समर्थन के लिए धन्यवाद किया।









