पद्मावत’ के जौहर दृश्य पर स्वरा भास्कर की टिप्पणी के बाद पूनम पांडे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पूनम ने स्वरा के बयान को बेतुका और ‘स्टुपिड’ बताया, जबकि स्वरा ने दृश्य के रेप सर्वाइवर्स पर संभावित प्रभाव पर सवाल उठाए थे।
बॉलीवुड: फिल्म ‘पद्मावत’ के चर्चित जौहर दृश्य को लेकर एक बार फिर बॉलीवुड में बहस तेज हो गई है। अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने फिल्म के क्लाइमेक्स में दिखाए गए जौहर के दृश्य पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इसका रेप सर्वाइवर्स पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। अब अभिनेत्री पूनम पांडे ने स्वरा की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वरा की बात को ‘बेतुका’ और ‘स्टुपिड’ बताते हुए कहा कि फिल्म में इतिहास से जुड़ी घटना को दिखाने की कोशिश की गई थी।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संजय लीला भंसाली की 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘पद्मावत’ को रिलीज हुए कई साल बीत चुके हैं। फिल्म में दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म के निर्माण और रिलीज के समय भी इसके ऐतिहासिक चित्रण को लेकर व्यापक विवाद हुआ था। अब जौहर के दृश्य पर कलाकारों की अलग-अलग राय ने इस बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
पूनम पांडे ने स्वरा भास्कर की टिप्पणी पर क्या कहा
पूनम पांडे ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में स्वरा भास्कर की टिप्पणी पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से स्वरा की प्रशंसक रही हैं और उन्हें पढ़ी-लिखी तथा समझदार महिला के तौर पर देखती रही हैं। ऐसे में फिल्म और इतिहास से जुड़े इस मुद्दे पर स्वरा की टिप्पणी ने उन्हें निराश किया।
पूनम के मुताबिक, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि स्वरा ‘पद्मावत’ के दृश्य को इस तरह देखेंगी। उन्होंने स्वरा के बयान को ‘बेतुका’ बताते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए थी।
पूनम ने फिल्म का बचाव करते हुए यह भी कहा कि ‘पद्मावत’ के निर्माताओं ने कोई मनगढ़ंत कहानी तैयार नहीं की थी। उनके अनुसार, संजय लीला भंसाली ने भारतीय इतिहास से जुड़ी एक घटना को फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया और उस दौर के घटनाक्रम को पर्दे पर दिखाने की कोशिश की।
हालांकि, पूनम की यह प्रतिक्रिया उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण है। फिल्म में इतिहास के चित्रण और जौहर जैसे विषयों को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग व्याख्याएं रही हैं।
स्वरा भास्कर ने जौहर दृश्य पर क्या सवाल उठाया था
स्वरा भास्कर ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य का जिक्र किया था। उन्होंने फिल्म के क्लाइमेक्स में बड़ी संख्या में महिलाओं को जौहर करते हुए दिखाए जाने पर चिंता व्यक्त की।
स्वरा ने कहा था कि दृश्य देखते समय उनके मन में यह सवाल आया कि अगर कोई रेप सर्वाइवर इस फिल्म को देखे तो उसके मन में इसका क्या संदेश जाएगा।
उनकी आपत्ति मुख्य रूप से इस बात को लेकर थी कि जौहर को जिस तरह पर्दे पर प्रस्तुत किया गया, उससे यौन हिंसा से बचे लोगों के लिए किस तरह का संदेश जा सकता है। उन्होंने सवाल किया था कि क्या ऐसी प्रस्तुति से यह धारणा बन सकती है कि किसी महिला ने अपनी ‘इज्जत’ बचाने के लिए अपनी जान नहीं दी तो उसने कायरता दिखाई।
स्वरा की टिप्पणी का केंद्र फिल्म की ऐतिहासिकता से ज्यादा उसके दृश्य के संभावित सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर था। यही अंतर अब दोनों अभिनेत्रियों की प्रतिक्रियाओं के बीच बहस का प्रमुख आधार बन गया है।
‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य को लेकर क्यों होती रही है बहस
‘पद्मावत’ का जौहर दृश्य फिल्म के सबसे चर्चित हिस्सों में से एक रहा है। फिल्म के अंत में महिलाओं को जौहर करते हुए दिखाया गया है। यह दृश्य राजपूत इतिहास और उससे जुड़ी परंपराओं की सिनेमाई प्रस्तुति के संदर्भ में बनाया गया था।
जौहर का ऐतिहासिक संदर्भ बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसमें युद्ध या घेराबंदी की परिस्थितियों में महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से आत्मदाह किए जाने की ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख मिलता है। हालांकि, इतिहासकारों और सामाजिक टिप्पणीकारों के बीच इसके स्वरूप, संदर्भ और आधुनिक समय में इसकी व्याख्या को लेकर अलग-अलग मत रहे हैं।
इसी वजह से जब किसी फिल्म में जौहर को दर्शाया जाता है, तो उसके ऐतिहासिक चित्रण के साथ-साथ उसके सामाजिक संदेश पर भी बहस होती है।
‘पद्मावत’ के मामले में यह बहस फिल्म की रिलीज से पहले भी सामने आई थी। फिल्म को लेकर ऐतिहासिक तथ्यों, पात्रों के चित्रण और कहानी की प्रस्तुति पर विभिन्न समूहों ने आपत्तियां जताई थीं। रिलीज के बाद भी फिल्म के कई दृश्य और उनका अर्थ सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बने रहे।
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इतिहास दिखाने और उसके संदेश की जिम्मेदारी पर बहस
पूनम पांडे और स्वरा भास्कर की टिप्पणियां मूल रूप से फिल्म के एक ही दृश्य को देखने के दो अलग नजरिए सामने लाती हैं।
पूनम का तर्क है कि फिल्म निर्माताओं का उद्देश्य ऐतिहासिक घटना को पर्दे पर प्रस्तुत करना था। उनके अनुसार, ऐतिहासिक घटनाओं को दिखाते समय उन्हें मौजूदा सामाजिक नजरिए से पूरी तरह अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
दूसरी ओर, स्वरा की चिंता यह है कि किसी ऐतिहासिक घटना की सिनेमाई प्रस्तुति का आधुनिक दर्शकों पर क्या प्रभाव पड़ता है। खासकर यौन हिंसा से बचे लोगों के संदर्भ में वह यह सवाल उठा रही थीं कि फिल्म का संदेश किस तरह समझा जा सकता है।
सिनेमा में इतिहास को प्रस्तुत करने को लेकर यही सवाल अक्सर उठता है कि क्या फिल्म को केवल ऐतिहासिक घटनाओं के पुनर्निर्माण के तौर पर देखा जाए या उसके सामाजिक प्रभाव का भी मूल्यांकन किया जाए।
‘पद्मावत’ की रिलीज के बाद भी कायम है चर्चा
संजय लीला भंसाली की ‘पद्मावत’ वर्ष 2018 में रिलीज हुई थी। फिल्म में दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मावती, शाहिद कपूर ने महारावल रतन सिंह और रणवीर सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका निभाई थी।
फिल्म अपनी रिलीज से पहले लंबे समय तक विवादों में रही। इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चित्रण को लेकर विरोध हुआ था। बाद में फिल्म रिलीज हुई, लेकिन इसके कई पहलुओं को लेकर सार्वजनिक बहस जारी रही।
अब स्वरा भास्कर की पुरानी टिप्पणी के संदर्भ में पूनम पांडे की प्रतिक्रिया सामने आने से फिल्म का जौहर दृश्य फिर चर्चा में है। दोनों कलाकारों की राय में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है—एक तरफ ऐतिहासिक प्रस्तुति के बचाव का तर्क है, जबकि दूसरी तरफ दृश्य के सामाजिक प्रभाव और रेप सर्वाइवर्स के नजरिए से सवाल उठाया गया है।
विवाद का केंद्र फिल्म से आगे सामाजिक संदेश तक
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि ऐतिहासिक त्रासदियों को आधुनिक सिनेमा में किस तरह प्रस्तुत किया जाए। किसी ऐतिहासिक घटना को पर्दे पर दिखाने के दौरान फिल्मकारों के सामने कहानी, इतिहास और दर्शकों की संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती रहती है।
‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य पर जारी बहस भी इसी व्यापक सवाल से जुड़ी है। जहां कुछ दर्शक इसे ऐतिहासिक घटना के सिनेमाई चित्रण के रूप में देखते हैं, वहीं कुछ लोग इसकी प्रस्तुति और संभावित संदेश पर सवाल उठाते हैं।
फिलहाल, पूनम पांडे ने स्वरा भास्कर की टिप्पणी को लेकर अपनी असहमति स्पष्ट कर दी है। वहीं स्वरा की मूल टिप्पणी महिलाओं और यौन हिंसा से बचे लोगों के नजरिए से फिल्म के दृश्य के प्रभाव पर केंद्रित थी। दोनों प्रतिक्रियाओं के बीच यह अंतर बताता है कि ‘पद्मावत’ जैसे ऐतिहासिक विषयों पर सिनेमा और समाज में बहस अब भी जारी है।









