BJP नेता आर. अशोक ने कर्नाटक सरकार पर किसान कर्जमाफी की जिम्मेदारी केंद्र पर डालने का आरोप लगाया। उन्होंने राज्य से खुद कर्जमाफी की घोषणा, प्राकृतिक आपदा कोष से मुआवजा और सूखा प्रभावित किसानों से सीधे संवाद की मांग की।
बेंगलुरु: कर्नाटक में किसानों की कर्जमाफी को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ BJP नेता आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की आलोचना करते हुए राज्य सरकार से किसानों के कर्ज माफ करने की दिशा में खुद पहल करने की मांग की है। अशोक ने आरोप लगाया कि किसानों की मांग पर राज्य सरकार जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डालने की कोशिश कर रही है।
आर. अशोक ने सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसान कर्जमाफी की मांग कर रहे हैं, तब केंद्र सरकार की ओर उंगली उठाना किस तरह का शासन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को पहले अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी चाहिए और उसके बाद ही केंद्र से मदद मांगने के लिए प्रतिनिधिमंडल ले जाने की बात करनी चाहिए।
किसानों की कर्जमाफी पर राज्य सरकार से पहल की मांग
अशोक ने कहा कि अतीत में कर्नाटक समेत कई राज्यों की सरकारों ने जरूरत पड़ने पर किसानों के कर्ज माफ किए हैं और संकट के समय उनके साथ खड़ी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए केंद्र सरकार की ओर देखना उचित नहीं है।
BJP नेता ने राज्य सरकार से मांग की कि वह अपने स्तर पर किसानों के लिए कर्जमाफी की घोषणा करे। उनके अनुसार, किसानों को तत्काल राहत की जरूरत है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार को पहले किसानों से जुड़े अपने दायित्वों को पूरा करना चाहिए और उसके बाद केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता की मांग करनी चाहिए।
2023 के चुनावी वादों को लेकर भी सवाल
आर. अशोक ने कांग्रेस के 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में किए गए वादों को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से ₹1.50 लाख करोड़ के ‘कृषि सर्वोदय निधि’ और ₹5,000 करोड़ के स्थायी प्राकृतिक आपदा कोष से जुड़े वादों का उल्लेख किया।
अशोक ने सवाल किया कि इन घोषणाओं का क्या हुआ और किसानों को इनके तहत कितनी सहायता मिली। उन्होंने कांग्रेस के उस वादे पर भी सवाल उठाया जिसमें ₹3 लाख से ₹10 लाख तक के ब्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
BJP नेता ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले किसानों से बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन सत्ता में आने के बाद राज्य के खजाने पर दबाव बढ़ा और अब किसानों की कर्जमाफी की जिम्मेदारी केंद्र पर डालने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने इसे सरकार की ‘गैर-जिम्मेदारी’ करार दिया। हालांकि, ये आरोप विपक्षी नेता द्वारा लगाए गए हैं और खबर में राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया है।
प्राकृतिक आपदा कोष से मुआवजा देने की मांग
अशोक ने राज्य सरकार से ₹5,000 करोड़ के प्रस्तावित स्थायी प्राकृतिक आपदा कोष के तहत प्रभावित किसानों को मुआवजा जारी करने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को पहले अपने स्तर पर किसानों के लिए राहत पैकेज और कर्जमाफी की घोषणा करनी चाहिए। इसके बाद ही केंद्र सरकार से सहायता लेने के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने की पहल की जानी चाहिए।
उनका कहना था कि किसान संकट के समय तत्काल आर्थिक सहायता की उम्मीद करते हैं। इसलिए सरकार को घोषणाओं और राजनीतिक बयानबाजी के बजाय जमीनी स्तर पर राहत पहुंचाने पर ध्यान देना चाहिए।
सूखा प्रभावित इलाकों के हवाई सर्वे पर भी सवाल
आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के सूखा प्रभावित इलाकों के हवाई सर्वेक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि हेलीकॉप्टर से किए गए सर्वेक्षण के जरिए किसानों की वास्तविक समस्याओं को किस हद तक समझा जा सकता है।
अशोक ने कहा कि बाढ़ जैसी परिस्थितियों में हवाई सर्वेक्षण का अपना महत्व हो सकता है, लेकिन सूखे और फटी हुई जमीन वाले खेतों की स्थिति को हेलीकॉप्टर से देखने की आवश्यकता पर उन्होंने सवाल उठाया।
उन्होंने मुख्यमंत्री से किसानों के खेतों में जाकर उनसे सीधे बातचीत करने की मांग की। उनके अनुसार, प्रभावित किसानों से आमने-सामने संवाद करने से उनकी वास्तविक समस्याओं और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।
बल्लारी, विजयनगर और बागलकोट के किसानों का मुद्दा
BJP नेता ने विशेष रूप से बल्लारी, विजयनगर और बागलकोट जिलों के किसानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में किसानों को तत्काल राहत की आवश्यकता है।
अशोक ने आरोप लगाया कि किसानों को राहत देने के बजाय सरकार की गतिविधियां केवल सार्वजनिक प्रचार तक सीमित दिखाई दे रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रभावित क्षेत्रों में जाकर किसानों से बातचीत करने और उन्हें व्यक्तिगत रूप से भरोसा दिलाने की अपील की।
उन्होंने यह भी दावा किया कि हेलीकॉप्टर के किराये और ईंधन पर खर्च होने वाली राशि का इस्तेमाल प्रभावित किसान परिवारों को राहत देने के लिए किया जा सकता था। यह भी विपक्षी नेता का आरोप है और इसके समर्थन में कोई अलग वित्तीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
किसानों से सीधे संवाद की अपील
अशोक ने मुख्यमंत्री से अपील की कि वह हवाई सर्वेक्षण तक सीमित न रहें और प्रभावित किसानों के खेतों का दौरा करें। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को समझने और उनकी चिंताओं का समाधान करने के लिए जमीनी स्तर पर मौजूद रहना जरूरी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री पर किसानों के सवालों से बचने का आरोप भी लगाया। अशोक ने दावा किया कि अगर मुख्यमंत्री सीधे किसानों के बीच जाते हैं तो सरकार की कथित विफलताएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, यह भी उनका राजनीतिक आरोप है और मुख्यमंत्री की ओर से इस संबंध में प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
कर्जमाफी पर केंद्र और राज्य की भूमिका बनी राजनीतिक बहस
कर्नाटक में किसान कर्जमाफी का मुद्दा अब राज्य सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। BJP का तर्क है कि राज्य सरकार को किसानों की तत्काल जरूरतों को देखते हुए अपने स्तर पर राहत देनी चाहिए, जबकि अशोक ने केंद्र की ओर जिम्मेदारी स्थानांतरित किए जाने पर सवाल उठाया है।
विपक्ष ने चुनावी घोषणापत्र में किए गए कृषि संबंधी वादों को भी बहस के केंद्र में ला दिया है। इसमें कर्जमाफी, प्राकृतिक आपदा के समय मुआवजा और ब्याज मुक्त कृषि ऋण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
आगे सरकार के कदम पर रहेगी नजर
आर. अशोक की मांगों के बाद अब किसानों से जुड़े मुद्दों पर कर्नाटक सरकार के अगले कदम पर राजनीतिक और सार्वजनिक नजर रहेगी। खासतौर पर कर्जमाफी, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के मुआवजे और कृषि ऋण से जुड़े वादों को लेकर सरकार से जवाब की मांग की जा रही है।
इस बीच, सूखा प्रभावित क्षेत्रों का जमीनी आकलन और किसानों से सीधा संवाद भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। BJP ने राज्य सरकार से तत्काल राहत देने और किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने की मांग की है।
कुल मिलाकर, किसान कर्जमाफी का मुद्दा कर्नाटक में केवल आर्थिक राहत का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य सरकार की नीतियों, चुनावी वादों और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।









