पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के विवादित बयान पर इजराइल ने कड़ी आपत्ति जताई है। इजराइल ने इसे आपत्तिजनक और उकसाने वाला बताते हुए कहा कि ऐसे बयान किसी निष्पक्ष मध्यस्थ देश की छवि के खिलाफ हैं, जिससे पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इजराइल-पाकिस्तान विवाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान के बाद इजराइल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे अस्वीकार्य करार दिया है। यह मामला तब सामने आया जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है। इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्री ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि ऐसे शब्द किसी भी शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह विवाद सोशल मीडिया पर सामने आया, जहां आसिफ के बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई और पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
इजराइल ने क्यों जताई सख्त आपत्ति
इजराइल ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान को लेकर तीखी नाराज़गी जताई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इजराइल के खिलाफ विनाश जैसे शब्दों का इस्तेमाल बेहद गंभीर और अस्वीकार्य है।
इजराइली पक्ष का कहना है कि ऐसे बयान उस देश से आना, जो खुद को शांति वार्ता में मध्यस्थ बता रहा है, उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई, जिससे मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया।

ख्वाजा आसिफ के बयान से बढ़ा विवाद
ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान में इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए और उसे “मानवता के लिए खतरा” बताया। उन्होंने गाजा, ईरान और लेबनान में हिंसा का जिक्र करते हुए इजराइल की कड़ी आलोचना की।
उनकी टिप्पणी में ऐसे शब्द भी शामिल थे, जिन्हें इजराइल ने यहूदी-विरोधी और उकसाने वाला बताया। इसी वजह से यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है और कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है।
मध्यस्थता की भूमिका पर उठे सवाल
पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम को लेकर मध्यस्थता कर रहा है और 11 अप्रैल को संभावित शांति वार्ता की मेजबानी की तैयारी में है। ऐसे में यह विवाद उसकी भूमिका को प्रभावित कर सकता है।
इजराइल के विदेश मंत्री ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शांति की बात करने वाली सरकार से इस तरह के आरोप और बयान स्वीकार्य नहीं हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस घटनाक्रम से पाकिस्तान की निष्पक्ष मध्यस्थ की छवि को झटका लग सकता है।









